मुम्बई। इंडोनेशिया में 1 जुलाई से बी 50 प्रोग्राम लागू होने वाला है जिससे वहां बायो डीजल के निर्यात में क्रूड पाम तेल का अनिवार्य उपयोग बढ़कर 50 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा जो अभी 40 प्रतिशत है।
इससे वहां पाम तेल के निर्यात योग्य स्टॉक में कमी आएगी और कीमत ऊंची उठ सकती है। भारत में पाम तेल का सर्वाधिक आयात होता है और इसका बड़ा भाग, इंडोनेशिया से ही मंगाया जाता है। इसके अलावा भारत में मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे देशों से भी पाम तेल का आयात होता है।
इंडोनेशिया से आयात में बाधा पड़ने से भारत को अन्य देशों से पाम तेल का आयात बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी मगर इन आपूर्तिकर्ता देशों का दायरा सीमित है। इससे इंडोनेशिया की कमी की भरपाई उन देशों से होने में संदेह है। इसके फलस्वरूप आगामी महीनों में भारत में खाद्य तेलों और खासकर पाम तेल की आपूर्ति पर संकट बढ़ सकता है।
पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के कारण पेट्रोलियम की आपूर्ति में बाधा पड़ने एवं कीमत ऊंची होने से अनेक देशों को अपनी ईंधन नीति में बदलाव करना पड़ रहा है।
मलेशिया और थाईलैंड में भी बायोडीजल निर्माण में पाम तेल का उपयोग होता है। इंडोनेशिया से आयात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने की जरूरत पड़ेगी।
भारत में पाम तेल के सकल वार्षिक आयात में अकेले इंडोनेशियाई माल की भागीदारी 60 प्रतिशत के करीब रहती है। वहां से भारत में सालाना करीब 40-42 लाख टन पाम तेल मंगाया जाता है और इसका विकल्प खोजना आसान नहीं होगा।
मलेशिया एवं थाईलैंड में पाम तेल का भाव इंडोनेशिया से 5-10 डॉलर प्रति टन ऊंचा रहता है जबकि आगे वहां इसमें और बढ़ोत्तरी हो सकती है। वैसे सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल के आयात को बढ़ाकर पाम तेल की कमी पूरी की जा सकती है।

