इस्तीफा देने वाले दोनों दिग्गजों की भूमिका व उनकी संपत्तियों की भी जांच की मांग
नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और दान में हेराफेरी के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह कदम उठाया है।
यह इस्तीफा तब आया है जब विशेष जांच दल यानी SIT की शुरुआती जांच में मंदिर के दान की देखरेख और मैनेजमेंट में गंभीर कमियां पाई गईं। SIT की सिफारिश पर इस मामले में पहली एफआईआर (FIR) भी दर्ज कर ली गई है।
इस पूरे घोटाले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यों वाली एक SIT टीम का गठन किया था। SIT ने अपनी शुरुआती जांच में पाया कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान को रखने, गिनने और उसे बैंक में जमा करने के नियमों में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई।
FIR दर्ज होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मामले में नामजद सभी 8 आरोपियों को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों के नाम अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू हैं। पुलिस इन सभी से कड़ी पूछताछ कर रही है और कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने में जुटी है।
इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
इसमें चोरी, आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट), चोरी का माल छिपाने और आपराधिक साजिश रचने जैसे आरोप शामिल हैं। इस मामले में पहली शिकायत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है, जो सितंबर 2025 में पूर्व ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इस ट्रस्ट से जुड़े थे।
सोने-चांदी के रिकॉर्ड में मिलीं कमियां
सूत्रों के अनुसार, SIT की शुरुआती जांच में सुरक्षा और प्रबंधन की कई बड़ी खामियां उजागर हुई हैं। जांचकर्ताओं को पता चला कि मंदिर परिसर में काम करने वाले कर्मचारियों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) में बड़ी चूक हुई थी। संवेदनशील इलाकों में आने-जाने वाले स्टाफ की चेकिंग ठीक से नहीं होती थी और वहां लगे CCTV कैमरे भी काफी कमजोर थे। इसके अलावा, मंदिर परिसर से दान की रकम को ट्रस्ट के दफ्तर और फिर वहां से बैंक ले जाने की प्रक्रिया में भी गड़बड़ियां मिलीं।
इतना ही नहीं, दान की गिनती करने के काम में बैंक की तरफ से कुछ बाहरी (आउटसोर्स) लोगों को लगाया गया था, जिनकी नियुक्ति और उन पर नजर रखने के तौर-तरीकों पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। SIT की टीम सिर्फ पैसों की ही नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी, गहनों और अन्य कीमती सामानों के रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच कर रही है, क्योंकि इनके स्टॉक और कागजी दस्तावेजों में काफी अंतर देखने को मिला है।
उठने लगी कानूनी कार्रवाई की मांग
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब इस मामले पर राजनीति और कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। BJP कार्यकर्ता डॉ. रजनीश सिंह, जिन्होंने इस गड़बड़ी को लेकर सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी, का कहना है कि सिर्फ इस्तीफे दे देना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और इस्तीफा देने वाले दोनों दिग्गजों की भूमिका व उनकी संपत्तियों की भी जांच की जानी चाहिए।
हालांकि, रजनीश सिंह ने यह साफ किया कि वे निजी तौर पर ट्रस्ट या किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का मामला है, इसलिए सच सामने आना चाहिए। इससे पहले उन्होंने इस मामले की जांच CBI या प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की मांग की थी, जिसमें करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये के गबन की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि SIT की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद सरकार और कड़े कदम उठाएगी।
दूसरी तरफ, इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने गायब हुए फंड की खबरों का हवाला देते हुए इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस घोटाले में सिर्फ छोटे स्तर के लोगों पर ही गाज गिरेगी या बड़े लोगों की भी जवाबदेही तय होगी?
इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि सनातन मूल्यों और जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। देवरिया में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि SIT की रिपोर्ट आते ही तुरंत एक्शन लिया गया है। सरकार अयोध्या की गरिमा और मर्यादा से कोई समझौता नहीं करेगी। अब सबकी नजरें SIT की उस फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो जल्द ही मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली है।

