कोटा। Narasimha Bhagwan: शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर, पाटनपोल में आगामी 30 अप्रैल को भगवान नृसिंह का प्राकट्य उत्सव श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार, इस अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दर्शनों का आयोजन होगा। जिसमें प्रभु के अद्भुत अवतार की लीलाओं का गुणगान किया जाएगा।
मंदिर के व्यवस्थापक चेतन शेठ ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि उत्सव की शुरुआत प्रातः काल से ही हो जाएगी। मंगला दर्शन के पश्चात प्रभु को चंदन, आंवला और फुलेल से अभ्यंग कराया जाएगा। ज्येष्ठ मास की गर्मी को देखते हुए प्रभु को शीतलता प्रदान करने के विशेष जतन किए जाएंगे। संध्या आरती के बाद मंदिर के चौक में शीतल जल का छिड़काव किया जाएगा। साथ ही, राजभोग दर्शन से लेकर संध्या आरती तक जल का थाल सजाया जाएगा। जिसमें प्रभु जलविहार के लिए पधारेंगे।
सूर्यास्त के समय होंगे जन्म के दर्शन
भगवान नृसिंह का प्राकट्य न दिन में हुआ था और न रात में, बल्कि गोधूलि वेला (संध्या काल) में हुआ था। इसी भाव को आत्मसात करते हुए मंदिर में संध्या आरती के पश्चात नृसिंह जन्म के विशेष दर्शन होंगे। इस दौरान ठाकुर जी के सम्मुख शालिग्राम जी को पंचामृत स्नान कराया जाएगा। चूंकि नृसिंह भगवान को उग्र अवतार माना जाता है, अतः उनके क्रोध के शमन और उन्हें शीतलता प्रदान करने के भाव से शयन दर्शन के समय विशेष ‘शीतल सामग्री’ का भोग धराया जाएगा।
पुष्टिमार्ग में चार अवतारों की महत्ता
प्रथम पीठ के युवराज मिलन कुमार बाबा ने नृसिंह जयंती के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुष्टिमार्ग में मुख्य रूप से चार अवतारों को विशेष मान्यता दी गई है, श्री राम, श्री कृष्ण, नृसिंह भगवान और वामन अवतार। उन्होंने बताया कि ये चारों अवतार प्रभु ने अपने उन भक्तों पर कृपा करने के लिए लिए थे। जो पूर्णतः नि:साधन थे और केवल प्रभु के भरोसे थे। इन अवतारों के माध्यम से की गई लीलाओं को ‘पुष्टिलीला’ माना जाता है। जो भक्त और भगवान के अनन्य प्रेम का प्रतीक हैं।

