हॉस्टल एसोसियेशन ने स्थायी शुल्क के नाम पर मनमानी राशि जोड़ने पर जताया रोष
कोटा। Electricity bill scam:कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने केईडीएल द्वारा हॉस्टल व्यवसायियों को भेजे गए बिजली के बिलों में भारी अनियमितताओं का मामला उठाते हुए जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता अजय कुमार गुप्ता को अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पिछले लगभग 10 वर्षों से संचालित हॉस्टलों में पहले ₹400 से ₹800 प्रतिमाह तक स्थायी शुल्क आ रहा था, लेकिन इस माह अचानक बिजली के बिलों में स्थायी शुल्क के नाम पर ₹16,000 से लेकर ₹27,000 तक की राशि जोड़कर भेज दी गई है। इससे हॉस्टल व्यवसायियों में हड़कंप मच गया है। कई बिलों में हॉस्टल का अपना ट्रांसफार्मर लगा होने के बावजूद ट्रांसफार्मर किराए के नाम पर ₹5,500 की राशि भी जोड़ दी गई है।
चंबल हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा, सचिव सुरजीत सिंह एवं पूर्व सचिव अशोक लड्ढा ने बताया कि वर्तमान में लैंडमार्क सिटी में 15 प्रतिशत बच्चे भी हॉस्टलों में नहीं रह रहे हैं तथा लगभग 75 प्रतिशत हॉस्टल खाली पड़े हैं। हॉस्टल व्यवसाय पहले से ही भारी मंदी और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है।
ऐसे समय में बिजली के बिलों में हजारों रुपये का अतिरिक्त स्थायी शुल्क जोड़कर भेजना व्यवसायियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने जैसा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ हॉस्टलों में विद्यार्थियों के नहीं रहने के कारण पूरे माह में मात्र 375 यूनिट बिजली की खपत हुई है, लेकिन स्थायी शुल्क के नाम पर ₹27,000 जोड़ दिए गए।
इसके चलते संबंधित हॉस्टल का कुल बिजली बिल लगभग ₹35,000 तक पहुंच गया है। इस प्रकार बिजली की वास्तविक खपत को देखते हुए प्रति यूनिट खर्च लगभग ₹90 तक बैठ रहा है, जो हॉस्टल व्यवसायियों के लिए असहनीय है।
हॉस्टल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में हॉस्टलों का स्टाफ, बैंक की किस्तों एवं अन्य आवश्यक खर्चों का भुगतान करना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसी स्थिति में हजारों रुपये का अतिरिक्त स्थायी शुल्क देना संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की वसूली के संबंध में न तो उन्हें कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही कोई स्पष्ट कारण बताया गया। इसके बावजूद बिलों में भारी राशि जोड़कर भेज दी गई है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इस शुल्क व्यवस्था को स्पष्ट किए बिना लागू रखा गया, तो बंद पड़े हॉस्टलों को भी स्थायी शुल्क के नाम पर भुगतान करना पड़ेगा तथा चालू हॉस्टलों पर भी प्रतिमाह हजारों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे पहले से संकटग्रस्त हॉस्टल व्यवसाय के सामने और गंभीर आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी।
अधीक्षण अभियंता अजय कुमार गुप्ता ने व्यापारियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए केईडीएल के संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही, उन्होंने व्यापारियों की समस्या के समाधान एवं बिलों में जोड़ी गई राशि के संबंध में चर्चा करने के लिए 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे विद्युत वितरण निगम कार्यालय में केईडीएल के अधिकारियों, व्यापारियों एवं हॉस्टल व्यवसायियों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।

