पाप कर्मों से हटकर शुभ कार्यों में लगना ही सम्यक चरित्र: आर्यिका सौम्यनन्दिनी

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कोटा। श्री दिगम्बर जैन मंदिर महावीर नगर विस्तार योजना में पावन चातुर्मास कर रही आर्यिका सौम्यनन्दिनी माताजी ने सोमवार को प्रवचन करते हुए कहा कि पाप कर्मों से हटकर शुभ कार्यों में लगना ही सम्यक चरित्र है। अपने मन वचन कार्य से शुभ कार्यों में प्रवृत्ति करना। जिससे अपने हित की पुष्टि हो और अहित का नाश हो यही सही रूप में सम्यक चारित्र है।

सौम्यनन्दिनी माताजी ने कहा कि इसमें सत्य, अहिंसा, तप तथा पांच पापों और चार कषायों का त्याग किया जाता है। मोक्ष मार्ग में सम्यक् चरित्र की प्रधानता है क्योंकि जीव को सम्यक दर्शन और सम्यक् ज्ञान होता भी है और यदि वह सम्यक चरित्र का पालन सत्य रूप से न करें तो मोक्ष मार्ग प्रशस्त न होगा।

उन्होंने कहा कि यदि पूजन पाठ करते हुए सालों व्यतीत हो गए हैं और फिर भी धर्म का मर्म समझ में नहीं आ पाया है तो पहले जिनवाणी के उपदेशों को समझो। इस दौरान नवग्रह विधान का पाठ किया गया तथा तथा माताजी के सान्निध्य में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, किया गया। जिसका पुण्याजक परिवार ललित कुमार पारसकुंमार लूंग्या परिवार रहा।