जयपुर। पुरानी पेंशन स्कीम राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए गले की हड्डी बन गई है, जिसे ना खाते बन रहा है और ना निगलते। राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने साढ़े पांच लाख कर्मचारियों के हित को देखते हुए फिर से पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme in Rajasthan) लागू करने का फैसला किया था। लेकिन उनकी यह योजना दिल्ली आकर अटक गई है। वजह है 39 हजार करोड़ रुपये के लिए केंद्र सरकार की ना।
1 अप्रैल 2004 से तत्कालीन केन्द्र सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम को बंद करके नई पेंशन स्कीम यानी NPS लागू की थी। नई पेंशन स्कीम में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल रही है। इसलिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने राज्य में इसी वित्त वर्ष से पुरानी पेंशन स्कीम को फिर से लागू करने का फैसला किया।
दरअसल राज्य सरकार ने नई पेंशन स्कीम के तहत नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में राजस्थान सरकार और कर्मचारियों के योगदान से साल 2004 से जा रहे 39,000 करोड़ रुपये विदड्रॉ करने के लिए केंद्र सरकार को अपील की थी। लेकिन पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (PFRDA) ने ये 39 हजार करोड़ रुपये लौटाने से साफ इनकार कर दिया है।
‘पैसे वापस करने का कोई प्रावधान नहीं’
राजस्थान सरकार ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने की दिशा में कदम उठाते हुए मार्च और अप्रैल में कर्मचारियों के वेतन से योगदान नहीं काटा। वित्त (व्यय) सचिव नरेश कुमार ठकराल ने PFRDA को लिखे पत्र में कहा, ‘इसलिए, यह अनुरोध किया जाता है कि NPS में राजस्थान सरकार और कर्मचारियों के योगदान से साल 2004 से जा रहे 39,000 करोड़ रुपये राज्य सरकार के पास रेवेन्यु रेसिप्ट के तौर पर वापस जमा कर दिए जाएं।’ इसके बाद राज्य सरकार को 2 मई को एक लेटर मिला, जिसमें उसके अनुरोध को खारिज कर दिया गया। पीएफआरडीए के असिस्टेंट जनरल मैनेजर प्रदीप्तो चटर्जी ने लिखा कि ऐसा कोई प्रावधान उपलब्ध नहीं है, जिसके तहत एनपीएस के लिए पहले से ही किए जा चुके सरकारी योगदान और कर्मचारियों के योगदान के रूप में जमा किए गए पैसे को रेवेन्यु रेसिप्ट के तौर पर राज्य सरकार को वापस किया जा सकता हो।
पुरानी पेंशन स्कीम क्यों
पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने के पीछे राजस्थान सरकार का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एश्योर्ड इनकम उपलब्ध कराना है। पुरानी पेंशन स्कीम के तहत सरकार, कर्मचारी को रिटायरमेंट पर सैलरी का 50 फीसदी पेंशन के तौर पर देती थी। लेकिन यह सरकार के खजाने पर वित्तीय बोझ डालता है, इसलिए नई पेंशन स्कीम लाई गई। नई पेंशन स्कीम सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के कर्मचारियों के लिए है। इसमें कर्मचारी की सैलरी का 10 फीसदी जाता है और इतना ही योगदान एंप्लॉयर की ओर से भी होता है। एनपीएस में जाने वाला पैसा, सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट किया जाता है। कर्मचारी रिटायरमेट के वक्त पूरा पैसा विदड्रॉ नहीं कर सकता।