राजस्थान में 4 चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, 14 नवंबर तक मतदान, 20 को मतगणना

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कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली में प्रधान और प्रमुखों के चुनाव दिसंबर में होंगे

जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल बज गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज चुनावों का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस बार चुनाव चार चरणों में होंगे और पहली बार प्रदेश में पंचायत चुनाव एक साथ कराए जा रहे हैं।

जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव 23 अक्टूबर से शुरू होकर 14 नवंबर तक चलेंगे, जबकि सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव 25 अक्टूबर से 16 नवंबर तक होंगे। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव का रिजल्ट 20 नवंबर को घोषित किया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू हो गई है।

23 अक्टूबर से शुरू होगी जिला परिषद-पंचायत समिति की वोटिंग
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में होंगे। पहले चरण में 23 अक्टूबर, दूसरे चरण में 29 अक्टूबर, तीसरे चरण में 4 नवंबर और चौथे चरण में 14 नवंबर को मतदान होगा। सभी चरणों की मतगणना एक साथ 20 नवंबर को होगी। इसके साथ ही प्रदेश की 41 जिला परिषदों और पंचायत समितियों के सदस्यों के चुनाव कराए जाएंगे। पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के चुनाव ईवीएम से होंगे।

16 नवंबर तक चुने जाएंगे सरपंच
सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव भी चार चरणों में होंगे। पहले चरण की वोटिंग 25 अक्टूबर, दूसरे चरण की 31 अक्टूबर, तीसरे चरण की 6 नवंबर और चौथे चरण की वोटिंग 16 नवंबर को होगी। इन चुनावों में मतदान के दिन ही देर रात तक नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे।

कोटा समेत 4 जिलों में दिसंबर में होंगे प्रधान-प्रमुख के चुनाव
पंचायत चुनाव के बाद पंचायत समितियों के प्रधान और जिला परिषदों के जिला प्रमुख चुने जाएंगे। कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली में प्रधान और प्रमुखों के चुनाव दिसंबर में होंगे। बाकी जगहों पर भी निर्वाचित सदस्य अपने-अपने स्तर पर प्रधान और जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे।

1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे
इन चुनावों के जरिए प्रदेश में करीब 1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। इनमें 1403 जिला परिषद सदस्य और 8245 पंचायत समिति सदस्य शामिल हैं। वहीं 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और करीब 1.30 लाख वार्ड पंच चुने जाएंगे। पंचायत समिति सदस्य मिलकर 457 पंचायत समितियों के प्रधान चुनेंगे। वहीं जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे।

50% आरक्षण से चुनी जाएंगी 80 हजार से ज्यादा महिलाएं
पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण है। ऐसे में करीब 1.69 लाख प्रतिनिधियों में आधे पदों पर महिलाएं चुनकर आएंगी। इनमें 7200 महिला सरपंच, 7200 महिला उपसरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच शामिल होंगी।

सरपंच पदों में 3058 ST (अनुसूचित जनजाति), 2493 SC (अनुसूचित जाति) और 1961 ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण है। वहीं करीब 1.30 लाख वार्ड पंच पदों में 21,962 एससी, 19,117 एसटी और 15 हजार ओबीसी के लिए आरक्षित हैं।

51.82 प्रतिशत पुरुष, 48.18 प्रतिशत महिला वोटर
पंचायतीराज चुनाव में पुरुष वोटरों की हिस्सेदारी 51.82 फीसदी, जबकि महिला वोटरों की हिस्सेदारी 48.18 फीसदी है। 41 जिलों में जयपुर में सबसे ज्यादा 18.99 लाख वोटर हैं। वहीं जैसलमेर में सबसे कम 4.36 लाख वोटर हैं।

आचार संहिता लागू, गांवों में अब उद्घाटन-शिलान्यास पर रोक
चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू हो गई है। इसके साथ ही सरकारी तबादलों पर रोक रहेगी। मंत्री अपने क्षेत्रों में सरकारी गाड़ी से नहीं जा सकेंगे और सरकारी गेस्ट हाउस या डाक बंगलों में ठहरने पर भी पाबंदी रहेगी।

सरकार नई योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा नहीं कर सकेगी। हालांकि पहले से चल रहे काम जारी रहेंगे और जिन टेंडरों की प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है, उन पर रोक नहीं लगेगी। ऐसी कोई सरकारी घोषणा नहीं की जा सकेगी, जिससे सीधे तौर पर मतदाताओं के प्रभावित होने की स्थिति बने।

पंचायत चुनाव बनेंगे भाजपा-कांग्रेस के लिए बड़ी परीक्षा
पंचायत चुनावों के नतीजे गांवों की सियासत की दिशा तय करने में अहम माने जाएंगे। बीजेपी के सामने कांग्रेस से ज्यादा जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य जिताने की चुनौती होगी। ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक प्रभाव रहा है, ऐसे में इस बार बीजेपी की माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति की भी परीक्षा होगी।

असली तस्वीर 20 नवंबर को सामने आएगी
प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव में सियासी जोड़तोड़ की तस्वीर अलग हो सकती है, क्योंकि दलबदल विरोधी कानून का प्रावधान यहां लागू नहीं होता। लेकिन राजनीतिक ताकत का बड़ा संकेत जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव से मिलेगा। 20 नवंबर को जब सभी वार्डों के नतीजे सामने आएंगे, तभी साफ होगा कि गांवों में किस दल को कितना समर्थन मिला।

कांग्रेस मुक्त होंगे गांव
उधर, राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर ने पचायतों चुनावों को लेकर शनिवार को कोटा में पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि शहरों की तरह गांव भी कांग्रेस मुक्त होंगे। उन्होंने दावा किया कि पंचायतों में भी बीजेपी के ही सरपंच बनेंगे। पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने सात संभागों के लिए चुनाव संचालन समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू करते हुए संभागवार जिम्मेदारियां तय की हैं।

प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने 3 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। घोषित सूची के अनुसार जयपुर संभाग की जिम्मेदारी ओंकार सिंह लखावत और अल्का सिंह गुर्जर को, अजमेर की जिम्मेदारी ज्ञानचंद पारख और जोगेश्वर गर्ग को दी गई है।