नई दिल्ली। Stock Market This Week: भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते कारोबार की दिशा कई अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से तय हो सकती है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, निवेशकों की नजर खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर अब खत्म हो चुका है, ऐसे में विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली भी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती है।
पिछले हफ्ते घरेलू शेयर बाजार में लगातार दो हफ्तों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया। BSE सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 फीसदी गिरकर बंद हुआ। वहीं, NSE निफ्टी में 204.65 अंक यानी 0.83 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और एक बार फिर बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के भरोसे पर दबाव डाला।
रिलायंस ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और रिसर्च प्रमुख अजित मिश्रा के मुताबिक, आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर बाजार की नजर रहेगी। उनके अनुसार, कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर खत्म हो चुका है और इस हफ्ते घरेलू स्तर पर ज्यादा बड़े आंकड़े आने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में निवेशक वैश्विक मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर ज्यादा ध्यान देंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया में ऊर्जा की सप्लाई के लिहाज से एक अहम समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां होने वाली किसी भी हलचल का असर कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ शेयर बाजार के माहौल पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई में हुई मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स भी इस हफ्ते बाजार के लिए अहम रहेंगे। ये मिनट्स 19 अगस्त को जारी किए जाएंगे। निवेशक इनमें अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत तलाशेंगे।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अमेरिका-ईरान तनाव के साथ फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स पर भी बाजार की नजर रहेगी। अगर फेड का रुख उम्मीद से ज्यादा सख्त नजर आता है, तो उभरते बाजारों से विदेशी निवेश निकल सकता है और भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली भी इस हफ्ते बाजार के लिए अहम रहेगी। हाल में विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव देखने को मिला है। ऐसे में उनकी तरफ से होने वाली खरीदारी या बिकवाली बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है।
बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक, निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े घटनाक्रमों पर रहेगी।
इसके अलावा, चीन से आने वाले आर्थिक आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, फेड के मिनट्स और चीन के आर्थिक आंकड़ों से वैश्विक आर्थिक विकास और अमेरिकी फेड की आगे की नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

