ज्ञान और संस्कार ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी: मुनि विवर्धनसागर

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत शुक्रवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने कहा कि ज्ञान और संस्कार ही मानव जीवन की वास्तविक संपत्ति हैं। जीव का मूल स्वरूप ज्ञान और दर्शन है।

जीव में ज्ञानोपयोग और दर्शनोपयोग विद्यमान रहता है, इसलिए मनुष्य को अपने ज्ञान का सदुपयोग धर्मश्रवण, स्वाध्याय, पूजा, दान और आत्मकल्याण में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग धर्म और सदाचार के मार्ग पर हो।

मुनिश्री ने माता-पिता से बच्चों के संस्कारों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान करते हुए कहा कि अच्छे संस्कारों की शुरुआत घर से होती है। बच्चों को केवल उच्च शिक्षा ही नहीं, बल्कि धार्मिक वातावरण और संतों की संगति भी मिलनी चाहिए, जिससे उनका व्यक्तित्व श्रेष्ठ बन सके और वे गलत संगति से बच सकें।

मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं महामंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज समिति के संरक्षक राजमल पाटौदी, अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला, कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।