नई दिल्ली। Crude Oil Import: रूस से भारत का कच्चा तेल आयात जुलाई में बढ़कर रेकॉर्ड 28 लाख बैरल प्रति दिन पहुंच गया। इससे भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही। इस दौरान भारत ने खाड़ी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आवाजाही कुछ दिनों के लिए सामान्य हो गई थी। हालांकि हाल के दिनों में एक बार फिर वहां हालात खराब हुए हैं।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में भारत ने एलपीजी का सबसे ज्यादा आयात अमेरिका से किया। बीते महीने भारत ने 12 लाख टन से ज्यादा एलपीजी का आयात किया। इसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 9 लाख टन से ज्यादा यानी करीब 73% रही। Kpler के शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार भारत ने जुलाई में 50 लाख बैरल से थोड़ा ज्यादा कच्चे तेल का आयात किया। यह जून की तुलना में थोड़ा ज्यादा था।
रूस की हिस्सेदारी
भारत ने जून में रूस से रोजाना 27 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया जो जुलाई में बढ़कर रोजाना 28 लाख बैरल हो गया। इससे भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 55.5% हो गई। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत की डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया था। जुलाई के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि भारतीय कंपनियों ने पश्चिम एशियाई देशों से फिर से खरीद शुरू कर दी है।
सऊदी अरब से आयात में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून में सऊदी अरब से रोजाना आयात 2.9 लाख बैरल था जो जुलाई में 4.2 लाख पहुंच गया। इराक से सप्लाई जून के 67,100 बैरल से लगभग दोगुनी होकर जुलाई में 1.3 लाख बैरल पहुंच गई। कुवैत से भी क्रूड का आयात फिर शुरू हो गया। जुलाई में वहां से रोजाना 51,600 बैरल तेल की सप्लाई हुई।
यूएई से आयात में गिरावट
अन्य सप्लायर्स की बात करें तो यूएई से आयात जून के 5.1 लाख बैरल से घटकर जुलाई में 4.6 लाख बैरल रह गया। हालांकि यह अभी भी भारत के लिए क्रूड का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। इस बीच कच्चे तेल की कीमत में आज करीब 5 फीसदी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड अभी 5 फीसदी गिरावट के साथ 83.53 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

