जयपुर। प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में सरसों की आवक की गति अब धीमी पड़ने लगी है। संकलित आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती 5 महीनों में यानी मार्च-जुलाई – 2026 के दौरान देश में सरसों की कुल आवक 72 लाख टन पर पहुंची।
इसमें से महज 50 हजार टन सरसों सरकारी क्रय केन्द्रों में पहुंची जबकि शेष मात्रा की आवक खुली मंडियों में हुई। केवल मई में सरकारी क्रय केन्द्रों पर सरसों की आवक हुई। जुलाई में खुली मंडियों में 7 लाख टन सरसों आई।
मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के अनुसार 2 लाख टन के आरंभिक स्टॉक तथा 107.25 लाख टन के अनुमानित उत्पादन के साथ सरसों की कुल उपलधता 109.25 लाख टन पहुंची जिसमें से 72 लाख टन की आवक हो गई और 31 जुलाई 2026 को किसानों के पास 37.25 लाख टन का स्टॉक बच गया।
जहां तक सरकारी एजेंसियों की बात है तो उसके पास 1.00 लाख टन सरसों का पुराना स्टॉक था जिसकी बिक्री हो गई है लेकिन चालू सीजन के दौरान खरीदे गए 50 हजार टन का स्टॉक अभी बाकी है।
उल्लेखनीय है कि भरतपुर में आयोजित रबी तिलहन-तेल सेमिनार के दौरान 117.25 लाख टन सरसों के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया गया था मगर 1 अगस्त 2026 को गुरुग्राम में आयोजित एक बैठक में इसे 7 लाख टन घटाकर 110.25 लाख टन नियत किया गया।
मार्च-जुलाई के दौरान 61 लाख टन सरसों की क्रशिंग हुई। 1 अगस्त 2026 को देश में कुल 50.25 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ था।

