व्यक्ति की सोच और संस्कार ही उसका नजरिया तय करते हैं: मुनि विवर्धनसागर

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत शुक्रवार को भव्य धार्मिक आयोजनों के साथ चातुर्मास की विधिवत स्थापना हुई।

इसके पश्चात गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज की मंगल देशना एवं शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन, जिनवाणी स्तुति का आयोजन किया गया। अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा व महामंत्री पंकज खटोड ने बताया कि इस अवसर पर विरागोदय तीर्थ एवं श्रेयांशगिरी तीर्थ के नाम से दो विशेष कलश भी स्थापित किए गए। पूरे चातुर्मास के दौरान मुख्य कलश सहित कुल 226 कलशों की स्थापना की जाएगी।

मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला ने बताया कि गुरु भक्ति से सराबोर वातावरण में श्रावक-श्राविकाओं ने भक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिला मंडल, बालिका महिला मंडल एवं रिद्धि-सिद्धि महिला मंडल ने गुरुपूजन के दौरान अक्षत, पुष्प, दीप एवं अर्घ्य समर्पण की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। चंद्रप्रभु नवयुवक मंडल, गुरु सेवा संघ तथा बाहर से आए श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

धर्मसभा में जुडने के लिए कर्नाटक, भोपाल, ग्वालियर, जयपुर, उज्जैन, पथरिया, आगरा, पिडावा सहित कई क्षेत्रो से सैकडो भक्त कोटा पहुंचे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने कहा कि श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से किए गए कार्य सदैव सफल होते हैं।

उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल जैन धर्म ही नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का साधना पर्व है। यह आत्मचिंतन, संयम और धर्म साधना का सर्वोत्तम अवसर है। उन्होंने कहा कि “यह केवल कुन्हाड़ी का नहीं, बल्कि पूरे कोटा का चातुर्मास है। प्रत्येक व्यक्ति यहां आकर धर्मलाभ प्राप्त कर सकता है।”

उन्होंने महाभारत के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब युधिष्ठिर को नगर में किसी बुरे व्यक्ति की खोज करने और दुर्योधन को किसी अच्छे व्यक्ति की तलाश करने को भेजा गया, तब दोनों खाली हाथ लौटे। दुर्योधन ने कहा कि उसे पूरे नगर में कोई अच्छा व्यक्ति नहीं मिला, जबकि युधिष्ठिर ने बताया कि उन्हें कोई बुरा व्यक्ति दिखाई नहीं दिया।

इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि संसार हमें वैसा ही दिखाई देता है, जैसा हमारा दृष्टिकोण होता है। व्यक्ति की सोच और संस्कार ही उसके देखने-समझने का नजरिया तय करते हैं। इसलिए सकारात्मक दृष्टि अपनाने से हर व्यक्ति और परिस्थिति में अच्छाई दिखाई देने लगती है।

सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज ने कहा कि जहां गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वह भूमि स्वतः पावन हो जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सामूहिक सहयोग और श्रद्धा से यह चातुर्मास ऐतिहासिक बनेगा। कार्यक्रम का संचालन पारस बज आदित्य ने किया।

इस अवसर पर समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, विमल जैन नांता, विमल जैन टोरड़ी, अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, महामंत्री पदम बड़ला, कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।