गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धा से किया पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज का पूजन-अभिषेक
कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत चल रहे चातुर्मास में बुधवार को गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने विशुद्धसागर महाराज का विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक किया।
कोषाध्यक्ष ताराचंद बडला ने बताया कि गुरु भक्ति से ओतप्रोत वातावरण में श्रावक-श्राविकाओं ने “गुरुवर ओ गुरुसा तेरो चेलो भक्त बनूं…” और “सावन की ऋतु के अवसर आया अवसर भक्ति का…” जैसे भक्तिमय गीतों की प्रस्तुति देकर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हुए हैं और भगवान महावीर 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर हैं।
उन्होंने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा के पावन दिवस पर भगवान महावीर ने इंद्रभूति गौतम को अपना प्रथम शिष्य स्वीकार कर उन्हें दीक्षित किया था। इसी ऐतिहासिक घटना के कारण जैन समाज गुरु पूर्णिमा को विशेष श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ मनाता है, क्योंकि इस दिन भगवान महावीर गुरु स्वरूप में प्राप्त हुए थे।
मुनिश्री ने कहा कि गुरु के प्रति ऐसी अटूट श्रद्धा रखनी चाहिए, पिच्छी और कमंडल धारण करने वाले संयमी साधु को ही अपना गुरु मानते हुए उनकी भक्ति, वैयावृत्ति और आज्ञापालन को जीवन का आधार बनाया जाए।
उन्होंने कामना व्यक्त की कि गुरुजनों की साधना अंतिम श्वास तक अविरल चलती रहे तथा वे संलेखना पूर्वक समाधिमरण को प्राप्त हों। यही प्रत्येक श्रद्धालु की मंगल भावना होनी चाहिए।
कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, विमल जैन नांता, अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, पारस गोधा, अशोक पांडिया तथा चंद्रप्रभु दिगम्बर नवयुवक मंडल के सदस्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

