छाती की हड्डी काटने के बजाय तीन इंच के चीरे से भी संभव है हृदय की जटिल सर्जरी

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रेल चिकित्सालय में विशेषज्ञों ने दी आधुनिक कार्डियक सर्जरी और ईसीएमओ की जानकारी

कोटा। मंडल रेल चिकित्सालय कोटा के तत्वावधान में तथा एक निजी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर के सहयोग से शनिवार को सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन मंडल रेल चिकित्सालय के सभाकक्ष में किया गया।

कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुपर्णा सेन रॉय के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें हृदय रोगों के आधुनिक उपचार, हृदय शल्य चिकित्सा तथा गंभीर रोगियों की गहन चिकित्सा से जुड़ी नवीनतम तकनीकों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के वक्ता वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरुषोत्तम मित्तल ने “कोरोनरी इंटरवेंशन (एंजियोप्लास्टी) की आधुनिक तकनीकें” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि कोरोनरी इंटरवेंशन (एंजियोप्लास्टी) का उद्देश्य हृदय की बंद धमनियों को पुनः खोलकर रक्त प्रवाह को सामान्य करना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से यह प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, अधिक सटीक तथा कम दर्द वाली हो गई है, जिससे मरीजों को शीघ्र लाभ मिलता है।

हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सक डॉ. पलकेश अग्रवाल ने “हृदय शल्य चिकित्सा की नवीनतम प्रवृत्तियां एवं आपात उपचार से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ तक” विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि अब पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी के साथ-साथ मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (एमआईसीएस) तथा ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (टीएवीआर) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

इन प्रक्रियाओं में छाती की बड़ी हड्डी काटने के बजाय पसलियों के बीच दो से तीन इंच का छोटा चीरा लगाया जाता है, जिससे रक्तस्राव कम होता है, संक्रमण का खतरा घटता है, दर्द कम होता है तथा मरीज कम समय में स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।

तृतीय वक्ता गहन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. दुर्गा सुथार ने रिफ्रैक्टरी हाइपोक्सीमिया की गंभीर स्थिति के उपचार पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब शत-प्रतिशत ऑक्सीजन देने के बावजूद रक्त में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य नहीं हो पाता, तब एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ईसीएमओ) तकनीक प्रभावी उपचार विकल्प के रूप में उपयोग की जाती है। इस तकनीक में शरीर के बाहर रक्त को ऑक्सीजन प्रदान कर पुनः शरीर में प्रवाहित किया जाता है, जिससे गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुपर्णा सेन रॉय ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान निरंतर विकसित हो रहा है। ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों एवं पैरा मेडिकल स्टाफ को नवीनतम चिकित्सा तकनीकों से अद्यतन रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की सही जानकारी मरीजों एवं उनके परिजनों तक पहुंचने से उनकी भ्रांतियां दूर होती हैं तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलती है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि कोटा मंडल रेल कर्मचारियों एवं उनके परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस प्रकार के सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम चिकित्सा अधिकारियों के ज्ञान एवं कौशल को अद्यतन रखने के साथ-साथ चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।