माया रूपी संसार में रहें, पर जीवन की नाव में माया को न आने दें

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धरणीधर गार्डन में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

​कोटा। श्री धरणीधर जन सेवा संस्थान एवं समस्त धाकड़ समाज, कोटा के संयुक्त तत्वावधान में विनोबाभावे नगर स्थित श्री धरणीधर गार्डन में सात दिवसीय भव्य ‘श्रीमद्भागवत कथा एवं रासलीला महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है।

कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालु भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए सुप्रसिद्ध प्रवचन सेवक पं. हरिओम बनेठ वाले ने जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल रूप में समझाया।

​द्वितीय दिवस की कथा का सार प्रस्तुत करते हुए महाराज ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को इस नश्वर संसार के बंधनों से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। यदि हम रति भर भी संसार में लिप्त रहे और मौत आ गई, तो अंत समय में हमारा मन जिसमें अटका रहेगा।

उसे पाने के लिए हमें दोबारा इस मृत्युलोक में जन्म लेना पड़ेगा। इसलिए मौत आने से पहले ही इंसान को सावधान होकर सबसे परे (मोह-मुक्त) हो जाना चाहिए।

​उन्होंने जीवन का एक अनुपम सूत्र देते हुए कहा कि हमारी जीवन रूपी नाव भले ही माया (संसार) के पानी में रहे, लेकिन उस जीवन की नाव के भीतर माया का पानी नहीं घुसना चाहिए। तभी जीवन सुरक्षित पार लगेगा।

​कथावाचक ने व्यावहारिक जीवन दर्शन समझाते हुए कहा कि यदि गृहस्थी को ठीक से चलाना है, तो एक निश्चित समय सारणी बनाएं। सुबह समय से उठकर सबसे पहले भगवान को समय दें, फिर माता-पिता, बेटा-बेटी और अपने काम-धंधे व परिवार को समय दें।

उन्होंने भक्तों को नियम दिया कि दिन में एक बार पास के मंदिर जरूर जाएं और घर के ठाकुर जी के तीन बार दर्शन करें। वर्ष में चार कथाएं सुनें। मंदिर और कथा में जाकर भगवान की नजरों में रोज आएं।

​महाराज जी ने कलयुग की महिमा गाते हुए कहा कि भवसागर से पार उतरने के लिए कलयुग से श्रेष्ठ कोई युग नहीं है। यहाँ कठिन जतन या तप की अग्नि की आवश्यकता नहीं है, बल्कि भगवान का नाम ही तरने के लिए काफी है।

​संस्थान के कोषाध्यक्ष महावीर नागर अंथेड़ा ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से अपराह्न 3 बजे तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में अमृत वर्षा हो रही है।

वहीं, प्रतिदिन रात्रि को वृंदावन के ख्यातिप्राप्त कलाकार हरिवल्लभ शर्मा ‘छोटे ठाकुर’ महाराज के निर्देशन में दिव्य रासलीला का मंचन किया जा रहा है। जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और महारास के सजीव प्रसंगों को देखकर भक्त भावविभोर हो रहे हैं।