नियमों के तहत 1 एकड़ तक ‘डीम्ड कन्वर्जन’ का प्रावधान
कोटा। स्मॉल स्केल इंडस्ट्री एसोसिएशन, कोटा ने तहसीलदार, चेचट द्वारा क्षेत्र की 26 औद्योगिक इकाइयों को कृषि भूमि के कथित गैर-कृषि उपयोग के संबंध में जारी किए गए नोटिसों पर गहरा आश्चर्य और चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मगंलवार को बैठक आयोजित कर इस प्रशासनिक कार्रवाई को राज्य सरकार की औद्योगिक मित्र नीतियों के विपरीत बताया है।
एसोसिएशन के सचिव समीर सूद ने स्पष्ट किया कि राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बेहद स्पष्ट एवं उदार कानूनी प्रावधान किए गए हैं। “राजस्थान भू-राजस्व (ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए रूपांतरण) नियम, 2007” के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर उद्योग स्थापित करने के लिए कड़े नियमों को शिथिल किया गया है।
सरकार के नियमों और 3 अक्टूबर 2017 के आदेश के अनुसार, यदि कोई खातेदार किसान अपनी स्वयं की खातेदारी भूमि पर सूक्ष्म या लघु औद्योगिक इकाई अथवा छोटा ईंट-भट्ठा (कजावा) स्थापित करना चाहता है, तो 1 एकड़ (4046.86 वर्ग मीटर) तक की भूमि के लिए किसी पूर्व लिखित अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।
नियमों के तहत इस प्रक्रिया को “डीम्ड कन्वर्जन” या “स्वचालित रूपांतरण” माना जाता है। जिसके लिए उद्यमियों से कोई रूपांतरण शुल्क या अतिरिक्त प्रभार नहीं लिया जा सकता। इस रूपांतरण के बाद भी भूमि की स्थिति खातेदार के नाम ही बनी रहती है।
इस प्रावधान के अंतर्गत उद्यमी को केवल उद्योग स्थापित कर संबंधित उप-विभागीय अधिकारी (SDO) या तहसीलदार को इसकी सूचना देनी होती है। इस संबंध में जिला उद्योग केंद्र द्वारा भी समय-समय पर उद्योग विभाग एवं स्थानीय प्रशासन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा चुका है।
एसोसिएशन का कहना है कि जब क्षेत्र की ये 26 औद्योगिक इकाइयाँ पूरी तरह से राज्य सरकार की नीतियों, उद्योग विभाग के दिशा-निर्देशों और कानूनी सीमाओं के भीतर संचालित हो रही हैं, तो ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया जाना न्यायसंगत नहीं है। इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाई से स्थानीय उद्यमियों और निवेशकों के बीच अनावश्यक भ्रम, भय और चिंता का माहौल पैदा हो रहा है, जो राज्य के औद्योगिक विकास के लिए बाधक है।
अतः ‘SSI कोटा’ ने तहसीलदार से पुरजोर आग्रह किया है कि वे राज्य सरकार की प्रचलित औद्योगिक नीतियों, 2017 के आदेशों और भू-राजस्व नियमों के इस विशेष प्रावधान की तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त कर मामले का पुनः परीक्षण करें। साथ ही, भविष्य में इस प्रकार की कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने या नोटिस जारी करने से पूर्व जिला उद्योग केंद्र एवं संबंधित विभागों से आवश्यक समन्वय स्थापित करें।
उद्योग जगत प्रदेश और जिले के आर्थिक विकास, राजस्व वृद्धि और स्थानीय युवाओं के रोजगार सृजन में मुख्य भूमिका निभा रहा है। इसलिए, उद्योगों के हितों की रक्षा करते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, स्पष्टता और आपसी समन्वय बनाए रखना नितांत आवश्यक है।

