सहायता कोष दोगुना, बेटियों के विवाह पर मिलेगा आर्थिक संबल: राठौड़
कोटा। सहकारिता के साथ संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए कोटा-बूंदी जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ बोर्ड की बैठक शुक्रवार को चेयरमैन चैनसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में आयोजित की गई। प्रबंध निदेशक दिलखुश मीणा ने कार्यवाही संचालन किया। बैठक में आरसीडीएफ प्रतिनिधि सहित संचालक मंडल के सभी सदस्य मौजूद रहे।
बैठक में संघ की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए दुग्ध क्रय-विक्रय दरों में संशोधन की पुष्टि सहित कुल नौ अहम प्रस्तावों पर चर्चा कर निर्णय लिए गए। इस दौरान बोर्ड ने ऐतिहासिक और मानवीय पहल करते हुए सचिव सहायता कोष की राशि 50 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये करने का निर्णय लिया। यह सहायता राशि अध्यक्ष/सचिव के निधन पर परिजनों को उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके साथ ही सामाजिक सरोकार निभाते हुए बोर्ड ने यह भी तय किया कि समिति के सचिव/अध्यक्ष की पुत्री के विवाह पर कोटा दुग्ध संघ परिवार की ओर से 21 हजार रुपये की राशि एफडी/डीडी के रूप में कन्या के नाम मायरे के रूप में भेंट की जाएगी। यह उसी समिति को प्राप्त होगा जो संघ को नियमित दुग्ध देती है।
बैठक के अवसर पर चेयरमैन चैनसिंह राठौड़ के सफल तीन वर्ष पूर्ण होने पर पूरे बोर्ड का अभिनंदन किया गया। राठौड़ को साफा व माला पहनाकर सम्मानित किया गया, वहीं एमडी दिलखुश मीणा सहित सभी सदस्यों का भी सम्मान किया गया।
अपने संबोधन में राठौड़ ने तीन वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि घाटे में चल रही संस्था को लाभ की स्थिति में लाया गया है। दुग्ध उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य दिलाए गए और उनका भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया गया।
साथ ही उपभोक्ताओं पर भार न बढ़े, इसका ध्यान रखते हुए दुग्ध दरों में वृद्धि नहीं की गई। उन्होंने बताया कि समय-समय पर किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बाजार में उतारे गए हैं तथा क्यूआर कोड प्रणाली के माध्यम से उपभोक्ताओं को शुद्धता की गारंटी भी दी जा रही है।

