जेईई मेन अप्रैल सत्र का लेखा-जोखा; मैथ्स ने उलझाया, केमिस्ट्री बनी स्कोर का सहारा

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कोटा। JEE Main 2026 April session: इंजीनियरिंग प्रवेश के लिए देश की सबसे बड़ी परीक्षा जेईई मेन 2026 का अप्रैल सत्र बुधवार को संपन्न हो गया। इस बार पेपर कुल मिलाकर मॉडरेट स्तर का रहा, लेकिन तीनों विषयों के बीच कठिनाई का संतुलन साफ दिखाई दिया। जहां मैथ्स ने छात्रों को सबसे ज्यादा उलझाया, वहीं केमिस्ट्री ने राहत दी और फिजिक्स ने संतुलन बनाए रखा।

मोशन एजुकेशन के फाउंडर और एजुकेटर नितिन विजय के अनुसार जेईई मेन का अप्रैल अटेम्प्ट सिर्फ ज्ञान की ही नहीं, बल्कि धैर्य और रणनीति की भी परीक्षा साबित हुआ। जिन छात्रों ने सही समय प्रबंधन, प्रश्न चयन और सटीकता पर ध्यान दिया, वही बेहतर प्रदर्शन कर पाए। परीक्षा ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि परीक्षा के दौरान निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

मैथ्स: सबसे ज्यादा चर्चा मैथ्स सेक्शन की रही। 2, 4 और 6 अप्रैल की शिफ्ट्स में मैथ्स ने छात्रों को सबसे ज्यादा चुनौती दी। सवाल न केवल कठिन थे बल्कि काफी लंबे भी थे। कैलकुलस, वेक्टर और 3डी ज्योमेट्री से अधिक प्रश्न पूछे गए, जिनमें कई सवाल ऐसे थे जिन्हें हल करने में 5 से 7 मिनट तक लग गए। इसका सीधा असर छात्रों के टाइम मैनेजमेंट पर पड़ा। हालांकि स्टेटिस्टिक्स और प्रॉबेबिलिटी जैसे टॉपिक्स ने थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन कुल मिलाकर मैथ्स ने स्कोर को सीमित करने का काम किया।

फिजिक्स: फिजिक्स सेक्शन अपेक्षाकृत संतुलित और स्कोरिंग रहा। 5 और 6 अप्रैल की शिफ्ट्स में कुछ सवालों में कॉन्सेप्ट की गहराई जरूर देखने को मिली, लेकिन अधिकांश प्रश्न सीधे फॉर्मूला आधारित थे। मॉडर्न फिजिक्स, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स और थर्मोडायनामिक्स से प्रमुख सवाल आए। जिन छात्रों ने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास किया था, उनके लिए यह सेक्शन आसान साबित हुआ। लगभग 80 प्रतिशत सवाल ऐसे थे जिन्हें अच्छी प्रैक्टिस के आधार पर तेजी से हल किया जा सकता था।

केमिस्ट्री: केमिस्ट्री ने एक बार फिर छात्रों को संभालने का काम किया। यह सेक्शन सबसे आसान और समय बचाने वाला रहा। ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में मैकेनिज्म आधारित सवाल थे, जबकि इनऑर्गेनिक में केमिकल बॉन्डिंग और एनसीईआरटी आधारित सीधे प्रश्न पूछे गए। फिजिकल केमिस्ट्री के सवाल सीमित रहे और मुख्य रूप से इंटीजर टाइप में आए। एनसीईआरटी की लाइन-बाय-लाइन तैयारी करने वाले छात्रों ने इस सेक्शन को बेहद कम समय में पूरा कर लिया, जिससे उन्हें अन्य विषयों के लिए अतिरिक्त समय मिला।

अगर जनवरी और अप्रैल सत्र की तुलना करें तो प्रतिस्पर्धा का स्तर इस बार अधिक ऊंचा नजर आया। फिजिक्स और केमिस्ट्री का पैटर्न लगभग समान रहा, लेकिन मैथ्स में सवालों को अधिक घुमाकर और कॉन्सेप्ट आधारित तरीके से पूछा गया। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि केवल रटने से काम नहीं चलेगा, बल्कि गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता जरूरी हो गई है।

इस परीक्षा से छात्रों के लिए तीन बड़े सबक निकलकर सामने आए हैं। पहला, स्मार्ट सिलेक्शन-मैथ्स के लंबे सवालों को शुरुआत में हल करने के बजाय अंत के लिए छोड़ना अधिक फायदेमंद है। दूसरा, केमिस्ट्री में सफलता का सीधा रास्ता एनसीईआरटी से होकर जाता है, जहां से लगभग 90 प्रतिशत प्रश्न पूछे गए। और तीसरा, नियमित अभ्यास-यदि छात्र 70 से 80 प्रतिशत सिलेबस को गहराई से समझकर समय प्रबंधन के साथ तैयारी करते हैं, तो 98 से 99 परसेंटाइल हासिल करना पूरी तरह संभव है।