Thursday, June 18, 2026
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ईपीएफ अंशदान में एक फीसद का इजाफा कर सकती है सरकार

नई दिल्ली । संगठित क्षेत्र में नौकरी के नए अवसर सृजित करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) के तहत कर्मचारियों के कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान बढ़ाने का विचार कर रही है। इसमें बेसिक पे का एक फीसद हिस्सा बढ़ाया जा सकता है।

सरकार ने यह स्कीम बीते वर्ष अगस्त में लॉन्च की थी। सरकार रोजगार के पहले तीन वर्षों के दौरान कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के अंतर्गत उन कर्मचारियों का ईपीएस (इम्प्लॉई पेंशन स्कीम) योगदान का पूरा हिस्सा भुगतान करने के लिए बाध्य है, जिनका वेतन 15,000 रुपये प्रति माह है। 

ईपीएफ के कुल योगदान में से 8.33 फीसद ईपीएस में, 3.67 फीसद ईपीएफ में, 0.65 फीसद एडमिनिस्ट्रेटिव, 0.5 फीसद इम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड (ईडीएलआई) स्कीम में और 0.01 फीसद ईडीएलआई के मेंटेनेंस में जाता है।

पीएमआरपीवाई के तहत ईपीएस का हिस्सा सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाता है ताकि कंपनियां बेरोजगार लोगों को नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित हों और असंगठित कर्मचारियों को पेरोल पर लाएं।

पीएमआरपीवाई को अब तक सुस्त प्रतिक्रिया मिली है। इसमें केवल 6588 इस्टेबिलिशमेंट्स ने ही इस योजना का लाभ उठाया है और करीब तीन लाख कर्मचारियों ने 30 जून, 2017 तक इसमें एनरोल किया है। इस योजना के लिए 1000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन अब तक महज 31 करोड़ रुपये ही इसके लिए खर्च किये गये हैं।

 

सेंसेक्स एक महीने से अधिक के निम्न स्तर पर, 32214 अंक पर बंद

अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपये में गिरावट से भी धारणा प्रभावित हुई।

मुंबई। मुंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स आज 318 अंक की गिरावट के साथ एक महीने से अधिक के निम्न स्तर 31,214 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी 9,800 अंक के नीचे पहुंच गया।

भू-राजनीतिक तनाव तथा आर्थिक समीक्षा में आर्थकि वृद्धि को लेकर लगाये गये अनुमान में उच्च स्तर की वृद्धि हासिल होना मुश्किल कहे जाने से बाजार को झाटका लगा।

बाजार में पिछले छह सप्ताह में साप्ताहिक आधार पर यह पहली गिरावट है। इसके अलावा अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपये में गिरावट से भी धारणा प्रभावित हुई। तीस शेयरों वाला सेंसेक्स कारोबार के दौरान नकारात्मक दायरे में रहा और अंत में 317.74 अंक यानी 1.01 प्रतिशत टूटकर 31,213.59 अंक पर बंद हुआ।

चार जुलाई के बाद साप्ताहिक आधार पर बाजार का यह सबसे न्यूनतम स्तर है। पिछले चार सत्रों में सेंसेक्स 794.08 अंक नीचे आ चुका है। एनएसई निफ्टी 109.45 अंक 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 9,710.80 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले यह स्तर सात जुलाई को देखा गया। कारोबार के दौरान यह 9,685.55 अंक के न्यूनतम स्तर तक चला गया था।

आर्थकि समीक्षा में कहा गया है कि आर्थकि वृद्धि का पूर्व में लगाये गये 6.75-7.5 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान में उच्च स्तर वाले अनुमान को प्राप्त करना मुश्किल होगा। इसका कारण रुपये की विनिमय दर में वृद्धि, कृषि कर्ज माफी तथा जीएसटी क्रियान्वयन के दौरान होने वाली चुनौतियां हैं।

सप्ताह के दौरान सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों में छह सप्ताह में पहली बार गिरावट आयी। जहां सेंसेक्स 1,111.82 अंक या 3.43 प्रतिशत नीचे आ गया वहीं निफ्टी में 355.60 अंक या 3.53 प्रतिशत की गिरावट आयी है।

 

 

मिठाइयों पर जीएसटी के विरोध में 21 से प. बंगाल बंद

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असोसिएशन ने बताया कि 21 अगस्त से मिठाई की सारी दुकानें बंद रहेंगी।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मिठाई बेचने वालों ने जीएसटी के खिलाफ राज्य स्तर के बंद की घोषणा की है। राज्य के मिठाई बेचने वालों के असोसिएशन ने बताया कि 21 अगस्त से मिठाई की सारी दुकानें बंद रहेंगी।

मिठाई बेचने वाले जीएसटी का विरोध कर रहे हैं क्योंकि नए टैक्स सिस्टम से मिठाई की कीमतें काफी बढ़ रही हैं।

पश्चिम बंगाल स्वीट सेलर्स असोसिएशन के रबींद्र कुमार पाल ने कहा, ‘संदेश और रसगुल्ला जैसी मिठाइयों पर 5 पर्सेंट जीएसटी लगाया गया है। ज्यादातर बंगाली मिठाइयां जल्द खराब होती हैं क्योंकि ये छेना से बनी होती हैं। हमने इन मिठाइयों पर जीएसटी ना लगाए जाने का अनुरोध किया है।

हमारे फाइनैंस मिनिस्टर अमित मित्रा ने मिठाइयों पर जीएसटी 12 पर्सेंट से घटाकर 5 पर्सेंट करवाने का प्रयास किया।’ वाम दलों की सरकार के दौरान मिठाई बनाने और बेचने वालों के विरोध के बाद मिठाई पर लगे वैट को वापस ले लिया गया था।

असोसिएशन का मानना है कि इस बार भी सरकार को मिठाइयों पर से जीएसटी हटाना ही होगा। 21 अगस्त से बंद के अलावा असोसिएशन ने 24 से 26 अगस्त तक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया है। कोलकाता के मशहूर मिठाई विक्रेता धिमान दास का कहना है, ‘ग्राहक पहले के जैसे मिठाइयां नहीं खरीद रहे हैं, इसलिए हम हड़ताल करने पर मजबूर हैं।’

यात्री कारों की बिक्री जुलाई में 15 फीसदी बढ़ी

नयी दिल्ली। इस साल जुलाई महीने में यात्री कारों की बिक्री 15.12 प्रतिशत बढ़कर 2,98,997 इकाई पर पहुंच गयी। पिछले साल के इसी महीने में कुल 2,59,720 यात्री कार बेची गईं थीं।

वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सिआम) के आज जारी आंकड़ों के अनुसार आलोच्य माह में घरेलू बाजार में कारों की बिक्री 8.52 फीसदी बढ़कर पिछले साल की 1,77,639 इकाइयों के मुकाबले इस साल 1,92,773 इकाई पर पहुंच गयी है।

मोटरसाइकिलों की बिक्री भी इस दौरान पिछले साल की 8,97,084 इकाइयों से 16.9 प्रतिशत बढ़कर 10,48,657 इकाई हो गयी है। दोपहिया वाहनों में इस साल जुलाई में कुल 16,79,055 वाहन बेचे गये जो पिछले साल के इसी महीने के 14,76,332 वाहनों के मुकाबले 13.73 फीसदी अधिक है।

सिआम ने कहा कि इस दौरान व्यावसायिक वाहनों की बिक्री 13.78 फीसदी बढ़कर 59 हजार इकाई पर पहुंच गयी है।सभी श्रेणियों के वाहनों की बिक्री इस दौरान 13.3 प्रतिशत बढ़कर 20,78,313 इकाई पर पहुंच गयी। पिछले साल के जुलाई महीने में यह 18,34,302 इकाई रही थी।

नोटबंदी से सरकार को घाटा, आधा लाभांश देगा रिजर्व बैंक

मुंबई। रिजर्व बैंक ने सरकार को जून 2017 को समाप्त वित्त वर्ष में 30,659 करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की है। यह लाभांश पिछले साल के मुकाबले करीब आधा है।

विश्लेषकों के अनुसार, नोटंबदी के कारण नए नोटों की छपाई समेत अन्य कारणों से रिजर्व बैंक की ओर से सरकार को मिलने वाले लाभांश में कमी आई है। पिछले वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक ने सरकार को लाभांश के रूप में 65,876 करोड़ रुपये दिए थे।

केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा, ‘रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल ने आज हुई बैठक में 30 जून 2017 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए अधिशेष राशि 306.59 अरब रुपये (30,659 करोड़ रुपये) भारत सरकार को ट्रांसफर करने का फैसला किया है।’

हालांकि शीर्ष बैंक ने कम लाभांश दिए जाने के बारे में कुछ नहीं बताया। बजटीय अनुमान के सरकार ने रिजर्व बैंक से 2017-18 में 58,000 करोड़ रुपये के लाभांश मिलने का अनुमान रखा था।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक, सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 74,901.25 करोड़ रुपये के लाभांश का अनुमान रखा गया था।

इसके पीछे के कारणों को बताते हुए रिजर्व बैंक के पूर्व डेप्युटी गवर्नर आर गांधी ने कहा कि पिछले कुछ साल से रिटर्न कम हो रहा है जिसका कारण विकसित देशों में नकारात्मक ब्याज दरें हैं।

उन्होंने कहा कि बैंकों में नकदी बढ़ने के कारण रिजर्व बैंक रिवर्स रीपो पर धन उधार लेता रहा है और ब्याज दे रहा है। इससे उसके राजस्व पर असर पड़ा। विश्लेषकों के अनुसार, रिजर्व बैंक की आय में कमी का एक कारण नई मुद्रा की छपाई की लागत भी है।

इसके अलावा, 500 और 1,000 रुपये के नोटों को चलन से हटाने के बाद की व्यवसथा को संभालने पर भी रिजर्व बैंक की लागत बढ़ गई।

सॉफ्टबैंक ने फ्लिपकार्ट को दिया सहारा, $2.5 अरब का निवेश

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टेक्नॉलोजी और ई-कॉमर्स स्केल के लिहाज से भारत लीडर बनने का दम रखता है। फ्लिपकार्ट के संस्थापकों सचिन और बिन्नी ने कहा।

बेंगलुरु। देश की सबसे कीमती स्टार्टअप फ्लिपकार्ट में दुनिया के सबसे बड़े टेक्नॉलजी फंड सॉफ्टबैंक विजन फंड ने 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। देश के कंज्यूमर टेक्नॉलजी सेक्टर में यह सबसे बड़ा निवेश है।

जापान के सॉफ्टबैंक के पास अब भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन कंपनी के 25 पर्सेंट शेयर होंगे, जो अभी अमेरिका के ऐमजॉन से यहां मुकाबला कर रही है। फ्लिपकार्ट के संस्थापकों सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने कहा, ‘यह फ्लिपकार्ट और भारत के लिए ऐतिहासिक डील है।’

उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि टेक्नॉलोजी और ई-कॉमर्स स्केल के लिहाज से भारत लीडर बनने का दम रखता है। सॉफ्टबैंक कंपनी में कुछ शेयर सीधे तो कुछ मौजूदा शेयरहोल्डर्स से खरीदेगा। इस सौदे से टाइगर ग्लोबल को कुछ हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा।

न्यूयॉर्क की यह इन्वेस्टमेंट कंपनी अब तक फ्लिपकार्ट की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर थी। सॉफ्टबैंक के साथ डील की खबर रखने वाले तीन सूत्रों ने यह जानकारी दी है। इस सौदे में कंपनी की कीमत 7-8 अरब डॉलर लगाई गई है।

सूत्रों ने बताया कि कंपनी के दोनों संस्थापक और इसमें सबसे पहले निवेश करने वाले वेंचर फंड एक्सेल पार्टनर्स भी सॉफ्टबैंक को कुछ हिस्सेदारी बेचेंगे। एक सूत्र ने कहा, ‘दोनों संस्थापक अपनी कुछ शेयरहोल्डिंग बेच रहे हैं।’

आईआईटी दिल्ली के क्लासमेट्स सचिन और बिन्नी बंसल ने 2007 में ऑनलाइन किताबें बेचने की शुरुआत इस कंपनी से की थी। एक दशक में उन्होंने फ्लिपकार्ट को सफलता के इस मुकाम तक पहुंचाया।

अप्रैल 2017 में कंपनी ने ईबे, चीन की टेनसेंट और माइक्रोसॉफ्ट से 1.4 अरब डॉलर का फंड जुटाया था, तब इसकी वैल्यू 11.6 अरब डॉलर लगाई गई थी।

सचिन और बिन्नी बंसल ने एक बयान में कहा, ‘हम सॉफ्टबैंक विजन फंड को पार्टनर बनाकर खुश हैं। हम सभी भारतीयों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने बिजनस को बढ़ा रहे हैं। हम देश में अगले फेज के टेक्नॉलजी अडॉप्टेशन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।’

इससे दो सप्ताह पहले स्नैपडील को खरीदने की बातचीत फ्लिपकार्ट के साथ टूट गई थी। सॉफ्टबैंक के संस्थापक मासायोशी सन ने एक स्टेटमेंट में कहा, ‘हम इनोवेटिव कंपनियों को सपॉर्ट करना चाहते हैं, जो भारत में विजयी बनें। ये ‘इस डील के साथ सॉफ्टबैंक का भारत में कुल निवेश 6 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। 

बिना टैक्स निर्यात के लिए मैन्यूअल फॉर्म जरूरी

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नई दिल्ली। जीएसटी लागू होने के बाद से नए नियमों के जाल में फंसे निर्यातकों को दिल्ली सरकार स्पेशल सेल के जरिए सहूलियतें देने जा रही है। फिलहाल बिना टैक्स चुकाए निर्यात के लिए जरूरी फॉर्म FRD-11 कॉमन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होने के चलते ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग ने इसे मैन्यूअली मुहैया कराने की सुविधा शुरू कर दी है।

सीबीईसी की ओर से 1 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि अगर निर्यातक बिना आईजीएसटी का भुगतान किए गुड्स या सर्विसेज की सप्लाई करना चाहता है तो उसे अपनी रेंज के असिस्टेंट कमिश्नर को GST-RFD-11 फॉर्म के साथ लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) या बॉन्ड सौंपना होगा।

इसकी शर्तें होंगी कि अगर वह इनवॉइस जारी करने के तीन महीने के भीतर तय गुड्स या सर्विस का निर्यात नहीं करता तो तीन महीना बीतने के 15 दिन के भीतर उसे तय आईजीएसटी के साथ ही ब्याज देना होगा।

दिल्ली ट्रेड एंड टैक्सेज विभाग के स्पेशल कमिश्नर कपिल सिंह ने बताया कि जीएसटी कॉमन पोर्टल पर यह सुविधा अभी बहाल नहीं होने के चलते बड़े पैमाने पर निर्यातकों की ओर से शिकायतें आ रही थीं और एक्सपोर्ट ऑर्डर व कंसाइमेंट रुके पड़े थे।

विभाग ने अपने जीएसटी फैसिलिटेशन सेंटर में स्थानीय निर्यातकों के लिए एक सेल बनाया है, जहां से जीएसटी आरएफडी-11 फॉर्म लिया जा सकता है। फिलहाल यह फॉर्म सुबह 10.30 से 1.30 तक मिलेगा, जबकि एक्सेप्टेंस लेटर 2.30 से 4.00 बजे तक जारी होंगे।

उन्होंने बताया कि एलयूटी के लिए एक्सेप्टेंस लेटर एक साल के लिए वैलिड होगा, जबकि बॉन्ड के लिए इसकी वैधता 31 मार्च तक होगी। दिल्ली गुड्स एंड सर्विस टैक्स रूल्स के रूल 96ए के मुताबिक जीएसटी आरएफडी-11 के साथ बॉन्ड भरने के लिए एक बैंक गारंटी भी देनी होगी, जो बॉन्ड की रकम का 15 पर्सेंट होगी।

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स के जनरल सेक्रेटरी संजय शर्मा ने बताया कि एलयूटी और बॉन्ड के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि निर्यातक वास्तव में निर्यात कर रहा है। निर्यात चूंकि जीरो रेटेड है, ऐसे में टैक्स लाइबिलिटी तो नहीं बनती, लेकिन उसे पहले टैक्स जमा करना होता है और फिर रिफंड मिलता है।

लेकिन बिना टैक्स निर्यात के लिए जरूरी फॉर्म आरएफडी-11 जीएसटी कॉमन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होने के चलते हजारों निर्यातकों का काम अधर में लटका था। स्टेट लेवल पर मैन्यूअल फॉर्म जारी होने से उन्हें काफी मदद मिलेगी।

 

वेंकैया नायडू बने देश के 13वें उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली। वेंकैया नायडू देश के 13वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं। राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। नायडू ने अपनी शपथ हिंदी में ली।

इस मौके पर पीएम मोदी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसद और विपक्षी दलों के नेता मौजूद थे। शपथ से पहले नायडू सुबह अपने घर से निकलकर सीधे राजघाट पहुंचे जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधी पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद वो डीडीयू पार्क पहुंचे जहां पं. दीनदयाल उपाध्याय को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। शपथ ग्रहण के बाद नायडू राज्यसभा के सभापति के नाते मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन का संचालन भी करेंगे।

इससे पहले गुरुवार को उन्होंने सदन ठप करने की प्रवृत्ति रोकने के लिए सख्ती बरतने के इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि सदन चलाने के लिए वे नियमों को लागू करेंगे।

नायडू ने निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का नाम लिए बिना देश के अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना के माहौल वाले बयान को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों की असुरक्षा का मुद्दा केवल राजनीतिक फायदे के लिए उठाया जा रहा है।

राष्ट्रपति भवन में नायडू को सुबह 10 बजे उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद नायडू राष्ट्रपति भवन से सीधे संसद भवन पहुंचेंगे और सभापति के रूप में सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करेंगे।

निर्वतमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल गुरुवार की मध्यरात्रि को खत्म हो गया। सक्रिय राजनीतिज्ञ से संवैधानिक पद के अपने नए सफर की शुरुआत से ठीक पहले नायडू ने अंसारी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना की बात कर रहे हैं। यह राजनीतिक प्रोपेगैंडा है।

हकीकत यह है कि पूरे दुनिया की तुलना में भारत में अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं और उन्हें उनका हक मिलता है। नायडू ने कहा कि वास्तव में भारतीय समाज सबसे ज्यादा सहिष्णु है। सहिष्णुता की वजह से ही हमारा लोकतंत्र इतना सफल है।

नायडू ने एक समुदाय की बात करने जैसी प्रवृत्ति को गलत बताते हुए कहा कि इससे दूसरे समुदायों पर असर पड़ेगा। इसीलिए हमें सबकी बराबरी की बात करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का शीर्ष संवैधानिक पदों पर पहुंचने से साफ है कि भेदभाव जैसी कोई बात ही नहीं।

गोरक्षा के नाम पर हुए हमलों के संदर्भ में नायडू ने कहा कि भारत इतना बड़ा देश है और ऐसे में इक्का-दुक्का मामले अपवाद हैं। कुछ लोग राजनीतिक वजहों से ऐसी घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी तूल देने से बाज नहीं आते।

आम बजट दो साल बाद 26 लाख करोड़ का होगा

नई दिल्ली । विकास दर की रफ्तार में अभी भले ही उछाल नहीं आए लेकिन सरकार व्यय करने में कंजूसी नहीं करेगी। सरकार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए सार्वजनिक व्यय में खासी वृद्धि जारी रखेगी। वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार का कुल व्यय यानी आम बजट करीब 26 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा।

खास बात यह है कि इस आम बजट में रक्षा क्षेत्र का आवंटन अच्छा खासा होगा क्योंकि अगले दो वर्षो में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में करीब 22 प्रतिशत की वृद्धि होगी। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बृहस्पतिवार को मध्यावधि व्यय फ्रेमवर्क वक्तव्य लोकसभा में रखा जिसमें ये अनुमान व्यक्त किए गए हैं।

हालांकि व्यय के ये अनुमान विकास दर के जिन आंकड़ों को आधार मानकर तय किया गया है वे अधिक उत्साहजनक नहीं है। इसे देखने पर पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर (बाजार मूल्य पर) जहां 11.75 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि अगले दो वित्त वर्ष में यह 12.3 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

वित्त मंत्रालय के इस दस्तावेज के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार का कुल व्यय 25.95 लाख करोड़ रुपये होगा जबकि चालू वित्त वर्ष में यह 21.46 लाख करोड़ रुपये है।  वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार के कुल व्यय में पूंजीगत व्यय का आंकड़ा भी बढ़कर 3.90 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा जो कि चालू वित्त वर्ष में 3.09 लाख करोड़ रुपये है।

सरकार फिलहाल अपने पूंजीगत व्यय का एक चौथाई से अधिक रक्षा क्षेत्र पर खर्च करती है। माना जा रहा है कि वर्ष 2019-20 में रक्षा क्षेत्र का पूंजीगत आवंटन 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 1,04,973 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसका मतलब है कि अगले दो वर्षो में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में खासी वृद्धि होगी।

दो साल में सब्सिडी का बोझ और हल्का करेगी सरकार
लंबित आर्थिक सुधारों को लागू करने के साथ-साथ सरकार साल दर साल सब्सिडी का बोझ भी हल्का करेगी। वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि अगले दो वर्षो में सरकार पर सब्सिडी का बोझ घटकर जीडीपी का 1.3 प्रतिशत रह जाएगा।

सब्सिडी में यह कमी मुख्यत: रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी और खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी को घटाकर की जाएगी। हालांकि खाद्य सब्सिडी आने वाले वर्षो में भी बढ़ती रहेगी। मंत्रालय का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2019-20 सब्सिडी पर सरकार का व्यय घटकर जीडीपी का 1.3 प्रतिशत रह जाएगा जो कि चालू वित्त वर्ष में 1.4 प्रतिशत है।

खाद्य सब्सिडी का बोझ 2019-20 में बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। मंत्रालय का कहना है कि खाद्य सब्सिडी में बढ़ने की वजह भारतीय खाद्य निगम की देनदारियों को चुकाने के चलते बढ़ेगी। वैसे खाद्य सब्सिडी को घटाने के लिए भी सरकार प्रयास करेगी।

मंत्रालय का कहना है कि वर्ष 2015-16 में खरीफ मौसम में यूरिया का उपभोग 152.37 लाख मीटिक टन से घटकर 2016-17 में 143.71 लाख मीटिक टन रह गया है। इससे खाद सब्सिडी में लगभग 1000 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।