Tuesday, May 5, 2026
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नई Renault Duster की तस्वीरें लीक, बदल गया एसयूवी का लुक

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नई दिल्ली।रेनॉ अपनी पॉप्युलर एसयूवी Duster को नए अवतार में लॉन्च करने वाली है। नई डस्टर की कुछ तस्वीरें लीक हुई हैं, जिनमें इसका नया लुक सामने आया है। ये तस्वीरें एसयूवी के फाइनल प्रॉडक्शन के बाद इसकी टेस्टिंग के दौरान की हैं। नई डस्टर की फ्रंट स्टाइलिंग में काफी अपडेट किए गए हैं, ताकि यह आने वाले पैदल यात्री सुरक्षा मानदंडों पर खरी उतर सके।

नई डस्टर के बोनट को दोबारा डिजाइन करके इसे थोड़ा ऊंचा बनाया गया है। इसके अलावा एसयूवी में नई ग्रिल और हेडलैम्प में हल्के बदलाव के साथ नया फ्रंट बंपर दिया गया है। इसकी हेडलाइट की डिजाइन पुरानी डस्टर जैसी है, लेकिन अब इसमें एलईडी डीआरएल और प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स दिए गए हैं, जो पहले वाले मॉडल्स में नहीं हैं। नई डस्टर की ग्रिल ज्यादा बड़ी है और ग्रिल पर दी गई क्रोम फिनिश इसके लुक को अट्रैक्टिव बनाती है।

एसयूवी को फ्रेश लुक देने के लिए रेनॉ ने नई डस्टर में नए रूफ रेल्स, नए डिजाइन के अलॉय वील्ज और पीछे वाले गेट पर ब्लैक प्लास्टिक क्लैडिंग दी है। इंटीरियर की तस्वीर सामने नहीं आई है, लेकिन ऐसी संभावना है कि इसमें नया सीट फैब्रिक, अपडेटेड इन्फोटेनमेंट सिस्टम और कुछ कनेक्टेड कार फीचर्स मिलेंगे। सेफ्टी की बात करें, तो इसमें ड्यूल फ्रंट एयरबैग्स, स्पीड वॉर्निंग, पार्किंग सेंसर्स और एबीएस सभी वेरियंट्स में स्टैंडर्ड मिलेंगे।

इंजन:अपडेटेड डस्टर में बीएस6 इंजन होगा। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कंपनी डस्टर का 110hp पावर वाला 1.5-लीटर K9K डीजल इंजन ही बीएस6 में अपडेट करेगी, जबकि 85hp पावर वाला डीजल इंजन एसयूवी में बंद कर दिया जाएगा। नई डस्टर का पेट्रोल इंजन भी बीएस6 नॉर्म्स के मुताबिक होगा। बता दें कि नई डस्टर वर्तमान मॉडल का फेसलिफ्ट वर्जन है।

सालभर में 10 लाख नकद निकासी पर लगेगा टैक्स, सरकार की तैयारी

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने की बात करते रहते हैं। अब इसे और बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही एक नया कदम उठा सकती है। मोदी सरकार एक वर्ष में 10 लाख रुपये नकद निकालने वालों पर कर लगाने की संभावना तलाश रही है। दरअसल, सरकार यह कदम कागजी मुद्रा के उपयोग को कम करने और काले धन पर नकेल कसने के लिए उठा सकती है। साथ ही उसका एक और लक्ष्य डिजिटल भुगतान के उपयोग को बढ़ावा देने का भी है।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि सभी उच्च-मूल्य नकद निकासी के लिए आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। माना जा रहा है कि आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य करने से व्यक्तिगत और टैली टैक्स रिटर्न को ट्रैक करना आसान होगा। ऐसा करने में सरकार केवल विशिष्ट पहचान संख्या मांगने से भी आगे बढ़ जाएगी, जैसा कि 50,000 रुपये से अधिक जमा के मामले में है, जहां पैन दिया जाना अनिवार्य है। ऐसे में यूआईडी प्रमाणीकरण और ओटीपी यह सुनिश्चित करेगा कि आधार संख्या का दुरुपयोग न हो सके।

एक अधिकारी ने बताया, ‘मनरेगा लाभार्थी को आधार प्रमाणिकता की आवश्यकता होती है, लेकिन फिलहाल 5 लाख रुपये तक नकद निकालने वाले को ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है।’ सरकार का मानना है कि अधिकांश व्यक्तियों और व्यवसायों को 10 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक नकद निकासी की आवश्यकता नहीं है।

5 जुलाई को पेश होने वाले बजट से पहले विचार-विमर्श हुआ, हालांकि सरकारी सूत्रों ने कहा कि इस प्लान को अभी अंतिम रूप नहीं दिया है। हालांकि यह स्पष्ट है कि सरकार ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहती है, जिससे कि मध्यम वर्ग और गरीबों पर किसी प्रकार का बोझ बढ़े।

एक सूत्र ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा- जब डिजिटल भुगतान को बढ़ाला दिया जा रहा है तो क्यों किसी को 10 लाख से अधिक का नकद लेने-देन करने देना चाहिए? पिछले हफ्ते आरबीआई ने घोषणा की कि बैंक NEFT और RTGS पर शुल्क नहीं लगाएंगे।

साथ ही कहा था कि कार्ड के उपयोग पर शुल्क की भी समीक्षा की जा रही है। इस मामले पर वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा- गैर-नकद लेनदेन को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था में नकदी के उपयोग की जांच करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना होगा।

कम समय में मोबाईल चार्ज करने का सही तरीका

नई दिल्ली। आपके पास कोई पुराना स्मार्टफोन है और उसे चार्ज होने में ज्यादा वक्त लगता है तो आज हम आपको ऐसे कुछ आसान टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके स्मार्टफोन को तेजी से चार्ज करने में मदद कर सकता है। लेकिन, अगर आपके स्मार्टफोन की बैटरी ज्यादा डैमेज है या खराब है तो ये ट्रिक्स आपकी मदद नहीं करेंगे। इसके लिए आपको सर्विस सेंटर में जाकर बैटरी रिप्लेस कराना होगा।

आपने भी कई यूजर्स को देखा होगा जो पूरी रात स्मार्टफोन को चार्ज में लगाकर रख देते हैं। उनका कहना यह है कि स्मार्टफोन को चार्ज होने में काफी समय लगता है। ऐसे यूजर्स को अपने स्मार्टफोन के चार्ज में लगाने से पहले इन दो तरीकों को अपनाना चाहिए। ये तरीके उनके स्मार्टफोन्स को तेजी से चार्ज होने में मदद कर सकता है। वैसे रात को सोते समय भूलकर भी स्मार्टफोन को चार्ज में न लगाएं। ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं जिसमें सोते समय फोन को चार्ज में लगाने के बाद फोन ओवरचार्ज होकर ब्लास्ट हो गया है। इससे कई व्यक्ति की जान भी जा चुकी है।

पहला तरीका- एयरप्लेन मोड
अपने स्मार्टफोन को चार्ज में लगाने से पहले आप अपने स्मार्टफोन को एयरप्लेन मोड में डाल सकते हैं। अपने स्मार्टफोन को एयरप्लेन मोड में डालने के लिए आपको अपने स्मार्टफोन के सेटिंग्स में जाना होगा। इसके बाद आपको एयरप्लेन मोड का विकल्प दिखाई देगा। एंड्रॉइड 9 पाई ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को ऊपर दिए गए नोटिफिकेशन टैब में ही एयरप्लेन मोड का ऑप्शन दिखाई देगा।

आप चाहे तो वहां जाकर इसे इनेबल कर सकते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि चार्ज करने से पहले स्मार्टफोन को एयरप्लेन मोड में क्यों डालना चाहिए? तो आपको बता दें कि एयरप्लेन मोड में डालने के बाद मोबाइल नेटवर्क और अन्य कनेक्टिविटी स्मार्टफोन से खत्म हो जाती है जो बैट्री की खपत को भी कम करता है।

दूसरा तरीका- स्वीच ऑफ
स्मार्टफोन को स्वीच ऑफ करके चार्ज में लगाना ज्यादा कारगर साबित हो सकता है। स्वीच ऑफ करने के बाद आपके स्मार्टफोन में बैटरी की खपत जीरो हो जाती है जो बैटरी को तेजी से चार्ज करने में मदद करता है। इस तरह से आप स्मार्टफोन को तेजी से चार्ज कर सकते हैं।

दुनिया की सबसे अधिक कमाई करने वाला एप बना PUBG

सैन फ्रांसिस्को। ‘पबजी मोबाइल गेम’ और इसके नए वर्शन ‘गेम फॉर पीस’ के चलते चीन तगड़ी कमाई कर रहा है। बताते चलें कि, पबजी मोबाइल गेम’ और ‘गेम फॉर पीस’ के कारण चीन के इंटरनेट पॉवरहाउस टेनसेंट का राजस्व मई में एक दिन में 48 लाख डॉलर (लगभग 33 करोड़ रुपए) से अधिक दर्ज रहा। कमाई के इस आंकड़े को पार करने के बाद यह दुनिया की सबसे अधिक कमाई करने वाला एप बन गया है। यह खास जानकारी मोबाइल एप इंटेलीजेंस कंपनी सेंसर टॉवर की रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों वर्शन को मिलकर चीनी कंपनी ने मई में कुल 14.6 करोड़ डॉलर की कमाई की है। जबकि, अप्रैल के महीने में कंपनी को लगभग 6.5 करोड़ डॉलर तक की ही कमाई हुई थी। अप्रैल की कमाई की तुलना में मई की कमाई 126 फीसदी अधिक है। मई के आंकड़े सामने आने से पहले अप्रैल महीने की कमाई को सबसे अधिक माना जा रहा था। बता दें कि, चीन में एंड्रायड से मिलने वाले राजस्व को शामिल नहीं किया गया है।

पबजी मोबाइल, गेम फॉर पीस से मई में हुए कुल राजस्व में से लगभग 10.1 करोड़ डॉलर का राजस्व एप्पल के स्टोर से मिला है। जबकि, गूगल के प्लेटफार्म से कुल 4.53 करोड़ डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। सेंसर टावर के मोबाइल इनसाइट्स के प्रमुख रैंडी नेल्सन ने ब्लॉग पोस्ट में पबजी मोबाइल के दोनों वर्शन से हुई कमाई का जिक्र किया है।

रैंडी नेल्सन ने लिखा कि- ‘पबजी मोबाइल के दोनों वर्शन से होने वाली कमाई को एक साथ मिलाने से यह दूसरे स्थान पर रहने वाली गेम ऑनर ऑफ किंग्स से 17 फीसदी अधिक है। इसने करीब 12.5 करोड़ डॉलर की कमाई की। ऐप स्टोर और गूगल प्ले यूजर्स ने पिछले महीने पबजी के दोनों मोबाइल वर्शन पर औसतन 48 लाख डॉलर रोजना खर्च किए है।’

राजस्थान में 4 साल का हाेगा स्नातक काेर्स, BA की जगह BLA व BSC अब BLE

जयपुर। शिक्षण संस्थानाें काे अब साधारण ग्रेजुएशन के अलावा स्टूडेंट्स के लिए चार वर्षीय लिबरल एजुकेशन में स्नातक कार्यक्रम लागू करना हाेगा। इन डिग्रियाें के नाम स्टूडेंट्स बैचलर ऑफ लिबरल आर्ट्स (बीएलए) और बेचलर ऑफ लिबरल एजुकेशन (बीएलई) तय किए गए है। बीएससी आदि डिग्रियाें में भी चार वर्षीय एजुकेशन कार्यक्रम चलाएं जाएंगे ।

12वीं के बाद सामान्य स्नातक तीन साल का रहता है लेकिन इन तीन साल के कार्यक्रम में विषयाें में बदलाव की च्वाॅइस अाैर एक साल का रिसर्च व इंटर्नशिप जाेड़ा गया है। रिसर्च व इंटर्नशीट के लिए स्टूडेंट्स काे अलग से अंक मिलेंगे। लिबरल एजुकेशन के काेर्सेस में भाषा, साहित्य, कला, खेल अाैर संगीत के पार्ट ज्यादा फाेकस किया जाएगा

लिबरल एजुकेशन पाॅलिसी काॅन्सेप्ट :
हायर एजुकेशन पाॅलिसी में लिबरल एजुकेशन पाॅलिसी के तहत इसे देशभर में लागू करने की याेजना है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि जिस तरह से नालंदा – तक्षशीला आदि जगहाें पर पढ़ाई हाेती थी। ठीक उसी तरह से लिबरल एजुकेशन पाॅलिसी के तहत चार साल के स्नातक काेर्सेस तैयार करके लागू करने हाेंगे।

साथ ही हर जिले तक इसकी पहुंच रखनी हाेगी । इन काेर्सेस में रिसर्च एजुकेशन काे बड़ा पार्ट मानते हुए लागू किया है। साथ ही इंटर्नशीट काे भी इसमें तव्वजाें दी गई है ताकि प्रेक्टिकल एजुकेशन करके छात्र और बेहतर तैयार हाे।

ड्राफ्ट में गिनाए फायदे :

  • स्टूडेंट्स काे खुद की स्ट्रीम जैसे साइंस, इंजीनियरिंग आर्ट्स आदि के दायरे से बाहर निकलने का माैका मिलेगा और नए सब्जेक्ट लेने व रिसर्च का माैका मिलेगा।
  • हर जिले में गुणवत्ता के लिए बेचलर ऑफ लिबरल आटर्स कार्यक्रम।
  • संवैधानिक मूल्यों के विकास के लिए एजुकेशन ढांचे को मजबूत करना।
  • इससे डिग्री के साथ – साथ एक्सपर्ट तैयार हाेंगे । साेयासटी के प्रति इनका याेगदान बढ़ेगा। लिबरल एजुकेशन अप्राेच स्टूडेंट्स काे प्रेक्टिकल एजुकेशन एक मजबूत पाठ भी बताएगी।
  • लिबरल एजुकेशन के जरिए पेशेवर शिक्षा काे समृद्ध बनाया जा सकता है। इस प्रोग्राम के जरिए यूजी के सभी कार्यक्रमों को मजबूत बनाना। इसके साथ ही स्टूडे्ंटस में ऊर्जा संचार करना।

एक्सपर्ट मानते है इसमें कमियां भी हैं :
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बरल एजुकेशन के चार वर्षीय कार्यक्रम काे अगर स्नातक के समकक्ष का दर्जा मिले तब स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में जुटेंगे । राज्य सरकार इसे नाैकरियाें में प्राथमिकता और पीजी के दर्जे का माने तब ये सब वर्किंग मजबूती से सफल हाेगी। विश्वविद्यालय और सरकारी काॅलेजाें में इन काेर्सेस काे तैयार करके लागू करने के प्रति शिक्षण संस्थानाें काे ए जज्बा दिखाना हाेगा क्याेंकि इनके बगैर ये सफल नहीं हाेगा।

इंटर डिसिप्लेनरी एजुकेशन यानी की आर्ट्स , साइंस और काॅमर्स संकाय में एक दूसरे के सब्जेक्ट बदलने के प्रावधान पहले से माैजूद लेकिन ये प्रभावी रूप से अब तक प्रदेश में लागू नहीं हाे सकें है। पुराने ढर्रे से ही स्टूडेंट्स काे सब्जेक्ट चूज करने का माैका दिया जा रहा है। इस संबंध में शिक्षण संस्थानाें की तरफ से काेई जागरूकता अब तक नहीं जगाई गई है।

कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के चुनाव 12 जून को

कोटा । एशिया की सबसे बड़ी भामाशाह मंडी में व्यापारियों की संस्था कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के द्विवार्षिक चुनाव 12 जून को भामाशाह भवन में होंगे। कार्यकारिणी में अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष, सहमंत्री, सहमंत्री (कार्यालय) व 10 कार्यकारिणी सदस्यों के लिए संस्था के सदस्य मतदान करेंगे।

विभिन्न पदों के लिए नामांकन भरने का शनिवार काे अंतिम दिन था। ऐसे में संस्था के पूर्व पदाधिकारियों समेत कई सदस्यों ने निर्वाचन अधिकारी वीरेंद्र कुमार राठौर काे नामांकन पत्र सौंपे। निर्वाचन अधिकारी राठाैर ने बताया कि सभी पदों पर 2-2 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र दाखिल किए है। वहीं 10 कार्यकारिणी सदस्यों के लिए 16 नामांकन पत्र प्राप्त हुए। नाम वापसी का अंतिम दिन 10 जून है। वर्तमान अध्यक्ष अविनाश राठी फिर से अध्यक्ष की दाैड़ में है। उन्हाेंने दाे नामांकन दाखिल किए हैं। चुनाव की स्थिति साेमवार शाम तक स्पष्ट हाेगी।

यह प्रत्याशी हैं मैदान में
अध्यक्ष : अविनाश राठी, विनोद कुमार जैन (सेठिया)
वरिष्ठ उपाध्यक्ष: विशाल गर्ग, दीपक कुमार जैन
उपाध्यक्ष : पदम कुमार जैन, अशाेक कुमार खंडेलवाल
महामंत्री : महेन्द्र कुमार जैन, पुरुषोत्तम बल्दवा
कोषाध्यक्ष : महेश खंडेलवाल, संजय कुमार शर्मा
सहमंत्री : कैलाश पोकरा, सत्यनारायण मूंदड़ा
सहमंत्री (कार्यालय): सुशील गंभीर, गिरिराज झाला

कार्यकारिणी सदस्य: अनिल खंडेलवाल, बृजेन्द्र कुमार जगरोटिया, बृजेश कुमार पंचोली, गगन जैन, हरीश कुमार, जगदीश चित्तौड़ा, जगदीशचन्द्र नागर, कमलेश धामाणी, कुन्जबिहारी शर्मा, मनोज कटारिया, राजेन्द्र कुमार जैन, राजेन्द्र प्रसाद अटल, रवि प्रकाश, सुनील मेहता, सुनील विजय, विनय बंसलआदि चुनाव मैदान में हैं। ।

ऐपल ने अपने स्मार्टफोन्स से हटाया पॉप्युलर फीचर, जानिए अब क्या होगा

नई दिल्ली। दिग्गज टेक कंपनी ऐपल ने अब अपने स्मार्टफोन्स से एक पॉप्युलर फीचर हटा दिया है। WWDC 2019 में कंपनी ने यह घोषणा की ऐपल के फोन्स से 3D फीचर को हटाया जाएगा। इसके कंपनी ने iOS 13 सॉफ्टवेयर का बीटा वर्जन रोल आउट कर दिया है। कंपनी ने यह फीचर आईफोन 6एस के साथ लॉन्च किया था। जिन यूजर्स ने इस सॉफ्टवेयर का बीटा वर्जन इंस्टॉल किया है वो अब 3D टच फीचर का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

आईफोन 6एस के साथ लॉन्च हुए इस फीचर का इस्तेमाल इसके बाद के सभी मॉडल्स XS और XS Max में किया गया। कंपनी ने इस फीचर को इसलिए हटाया क्योंकि कंपनी के पुराने मॉडल्स यह फीचर सपॉर्ट नहीं करते हैं। इस फीचर के हटने के बाद से यूजर्स स्क्रीन पर लॉन्ग प्रेस करके शॉर्टकट्स को पॉप अप नहीं कर सकेंगे।

सितंबर में लॉन्च होगा iOS 13
ऐपल iOS 13 सॉफ्टवेयर सितंबर में लॉन्च करेगा। मौजूदा वक्त में कंपनी ने इस सॉफ्टवेयर का बीटा वर्जन रोल आउट किया है। पिछले साल कंपनी आईफोन XR लॉन्च किया था जो हेप्टिक टच के साथ आता है। माना जा रहा है कि कंपनी 3D टच फीचर को हेप्टिक टच के साथ रिप्लेस करेगी।

ऐपल वॉच में मौजूद रहेगा फीचर
यह फीचर सिर्फ कंपनी ने अपने स्मार्टफोन्स से हटाया है। ऐपल वॉच सीरीज में यह फीचर अभी भी मौजूद रहेगा। WWDC में कंपनी ने iOS डार्क मोड भी लॉन्च किया था। इस मौके पर कंपनी फोटोज, मैप्स, मेसेज से जुड़े कई नए फीचर्स लॉन्च किए थे।

पंजाब के आफताब ने जीता ‘राइजिंग स्टार 3’ का खिताब

मुंबई। पंजाब के 12 साल के गायक आफताब सिंह ने शनिवार रात रिऐलिटी टेलीविजन शो ‘राइजिंग स्टार 3’ का खिताब अपने नाम कर लिया। आफताब सलमान खान फैन हैं और भविष्य में उनके लिए गाने की ख्वाहिश रखते हैं। उनकी दिली ख्वाहिश है कि वह एक दिन सुपरस्टार सलमान खान के लिए गाना गाएं।

शनिवार को पॉपुलर रिऐलिटी शो ‘राइजिंग स्टार 3’ का ग्रैंड फिनाले था जिसमें आफताब को विनर घोषित किया गया। आफताब ने कहा, ‘मुझे फाइनलिस्ट में से एक होने की जरा भी उम्मीद नहीं थी। यह एक सपने के सच होने जैसा है। यह जीत मेरे लिए बहुत मायने रखती है।’ उन्होंने कहा, ‘यह मुझे अब और अधिक कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित करेगा, ताकि मुझे एक दिन सलमान खान के लिए फिल्मों में काम करने और गाने का मौका मिले।’

अन्य तीन फाइनलिस्टों में सबसे कम उम्र के आफताब को विजेता की ट्रॉफी और 10 लाख रुपये पुरस्कार के तौर पर मिले। आफताब ने यह जीत अपने पिता को समर्पित की है। आफताब ने कहा, ‘मेरे पिता मेरी प्रेरणा हैं। उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है। मैं एक अमीर परिवार से ताल्लुक नहीं रखता। मैंने अपने पिता की मेहनत देखी है।

उन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए बहुत कुछ किया है। यह मेरी जीत नहीं है, यह उनकी जीत है।’ आदित्य नारायण द्वारा होस्ट किए गए कलर्स टीवी के शो ‘राइजिंग स्टार’ के तीसरे सीजन के जज शंकर महादेवन, नीति मोहन और दिलजीत दोसांझ थे।

आईएसआई मार्क देने वाला वैज्ञानिक इंदौर में घूस लेते पकड़ा

इंदौर। इंदौर की एक फैक्ट्री में शुक्रवार को भारतीय मानक ब्यूरो के एक वैज्ञानिक को आईएसआई मार्क के बदले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इसका खुलासा शनिवार को लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई से हुआ। लोकायुक्त पुलिस ने भाेपाल स्थित भारतीय मानक ब्यूरो के आंचलिक कार्यालय में पदस्थ वैज्ञानिक अरुण कुमार शंखवार को आईएसआई मार्क बेचने के लिए 10 हजार की रिश्वत देते हुए पकड़ा।

शंखवार ने इंदौर के सांवेर रोड सेक्टर एफ में दवा फैक्टरी के मालिक से साफ-सफाई की दवाओं को मार्क देने के बदले में 50 हजार रुपये मांगे थे। शंखवार फैक्टरी के निरीक्षण के दौरान पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये ले रहे थे, तभी लोकायुक्त डीएसपी प्रताप सिंह बघेल और उनकी टीम ने उन्हें पकड़ लिया।

जिस फैक्ट्री में वो पैसे लेने के लिए पहुंचे थे, वो सुनील अजमेरा की है। अजमेरा ने बताया कि उनकी फैक्टरी में स्वच्छता अभियान की दवाएं बनती हैं। अस्पतालों में यह दवा देने के लिए आईएसआई मार्क अनिवार्य है। इसी लाइसेंस के लिए सितंबर 2018 में आवेदन किया था।

फरवरी में खानापूर्ति हो गई और दिल्ली से सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई, पर मई में इस रिपोर्ट को शंखवार ने हाथ से फेल लिखकर खारिज कर दिया। इसे लेकर जब भोपाल में शंखवार से मुलाकात की तो उन्होंने पास लिखने के लिए रिश्वत की मांग की।

हालांकि रिश्वत की पूरी रकम 50 हजार रुपये तय हुई थी, लेकिन पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये देने की बात हुई थी। सुबह 10 बजे पैसे लेने के इरादे से फैक्ट्री पहुंचे शंखवार को पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ लिया।

GST काउंसिल की बैठक 20 जून को, ई-इनवॉइस प्रणाली सितंबर से

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नई दिल्ली। 20 जून को मोदी-2.0 सरकार के दूसरे कार्यकाल में जीएसटी काउंसिल की पहली बैठक होगी। इस बैठक में वित्त मंत्रालय कंपनी से कंपनी के बीच खरीद-फरोख्त (बिजनेस टू बिजनेस) के लिए केंद्रीकृत सरकारी पोर्टल पर ई-इनवॉइस (e-invoice) क्रिएट करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर विचार कर सकता है।

इसका लक्ष्य जीएसटी की चोरी को रोकना है। इसके साथ ही इससे इनवॉइस का दुरुपयोग भी रुकेगा। बता दें कि ये प्रस्ताव 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक के कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए पास हो सकता है। इसका निर्णय राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ परामर्श कर ही लिया जाएगा।

कंपनियों की ओर से प्रस्तुत विवरणों के विश्लेषण से पता चला कि साल 2017-18 में 68,041 कंपनियों ने 50 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दिखाया है। इन कंपनियों का जीएसटी में कुल योगदान 66.6 फीसदी रहा। बता दें कि जीएसटी भुगतान करने वाली कुल इकाइयों में ऐसी कंपनियों का हिस्सा केवल 1.02 फीसदी है। हालांकि बिजनेस टू बिजनेस इनवॉइस निकालने के मामले में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है।

इस संदर्भ में एक अधिकारी ने बताया कि, ‘जीएसटी काउंसिल के सहमत होने पर बिजनेस टू बिजनेस बिक्री के लिए ई-इनवॉइस सृजित करने को लेकर इकाइयों के लिये कारोबार सीमा 50 करोड़ रुपये तय की जा सकती है। इस सीमा के साथ बड़े करदाता जिनके पास अपने साफ्टवेयर को एकीकृत करने की बेहतर प्रौद्योगिकी है, उन्हें बिजनेस टू बिजनेस बिक्री के लिये ई-इनवॉइस सृजित करना होगा।

इनको मिलेगी राहत
इससे 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को रिटर्न फाइल करने और इनवॉइस अपलोड करने के दो काम से राहत मिलेगी। मंत्रालय ई-इनवॉइस प्रणाली सितंबर से शुरू करने की योजना बना रहा है।