जयपुर। राजस्थान में जनगणना प्रक्रिया का आगाज़ 1 मई 2026 से होने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस बार जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से पहले चरण में ‘स्व-गणना’ की सुविधा उपलब्ध कराई है, जिसके तहत नागरिक स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 16 मई से जनगणना कर्मी घर-घर जाकर मकानों की गणना और सूचीकरण का कार्य शुरू करेंगे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से प्रदेशवासियों को यह जानकारी दी। उन्होंने अपने संदेश में बताया कि 1 मई से 15 मई 2026 तक नागरिक स्व-गणना कर सकते हैं, जबकि 16 मई से 14 जून 2026 तक जनगणना कर्मी फील्ड में उतरकर मकानों की गणना करेंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है, ऐसे में जनगणना कर्मियों को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचना होगा। उन्होंने कहा कि जब कर्मी घर-घर पहुंचें, तो उन्हें सही और सटीक जानकारी प्रदान करें। यह जानकारी भविष्य में राज्य और देश के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा कि आज नागरिकों द्वारा दी गई सही जानकारी ही कल ‘विकसित राजस्थान’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में सहायक बनेगी। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में स्व-गणना से संबंधित लिंक भी साझा किया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
मुख्यमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में जनगणना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की नींव है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और उनकी गणना का कार्य किया जाएगा।
यह प्रक्रिया 16 मई से शुरू होकर 14 जून 2026 तक चलेगी, जिसमें जनगणना कर्मी प्रत्येक घर तक पहुंचकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। इस दौरान मकानों की स्थिति, उपयोग और अन्य बुनियादी जानकारी भी दर्ज की जाएगी, जिससे विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भी जनगणना को लेकर प्रदेशवासियों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि 1 मई से 15 मई के बीच नागरिक स्व-गणना पोर्टल पर जाकर अपनी और अपने परिवार की सही जानकारी दर्ज करें।
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल लोगों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया है। इसमें शिक्षा, रोजगार, लिंग अनुपात और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से जुड़ी जानकारी शामिल होती है।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं, विकास कार्यक्रम और नीतियां तैयार करती है, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा सके।

