मौसम विज्ञान विभाग ने मानसून आने की घोषणा बदली, जानिए अब कब आएगा

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नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पहले 26 मई को केरल के सुदूर दक्षिणी तट पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने की भविष्यवाणी की थी लेकिन वह समय अब बीत चुका है।

श्रीलंका के मौसम विभाग ने 27 मई को मानसून के आने की औपचारिक घोषणा की। श्रीलंका से भारत तक मानसून को पहुंचने में करीब एक सप्ताह का समय लगता है बशर्ते तमाम मौसम परिस्थितियां अनुकूल हैं। केरल तट पर हवा का प्रवाह अनुकूल तो है मगर रफ्तार धीमी है।

इससे श्रीलंका में मानसून का ठहराव कुछ ज्यादा दिनों तक हो सकता है। वैसे स्वयं श्रीलंका में मानसून इस बार वह सात दिनों की देरी से पहुंचा है इसलिए भारत आने में इसे स्वाभाविक रूप से विलम्ब हो जाएगा।

इसका मतलब यह हुआ कि भारत में मानसून अब मई के बजाए जून में ही आ सकता है। श्रीलंका पहुंचने से पूर्व मानसून को अनेक बाधाओं एवं चुनौतियों का सामना करना पड़ा था जो अब खत्म हो गया है।

इस बीच देश का करीब 75-80 प्रतिशत भाग भीषण गर्मी से झुलस रहा है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, उड़ीसा एवं झारखंड सहित अन्य कई प्रांतों में तापमान काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जबकि मानसून-पूर्व की बारिश का घोर अभाव देखा जा रहा है। बांधों-जलाशयों में पानी का बहुत कम स्टॉक बचा हुआ है।

खेतों की मिटटी सूख गई है। खरीफ फसलों की बिजाई पर असर पड़ने की आशंका है। मानसून की पहली बौछार के साथ ही खरीफ फसलों की खेती आरंभ होती है। फिलहाल गन्ना एवं कपास की फसल खेतों में खड़ी है जिसे बढ़ती गर्मी से नुकसान हो सकता है। इसी तरह ग्रीष्मकालीन या जायद फसलों पर भी खतरा मंडराने लगा है।