फिच ने चालू वित्त वर्ष के लिए इण्डिया की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.4% किया

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% से घटाकर 6.4% कर दिया है।

फिच का कहना है कि जंग की वजह से तेल और ईंधन महंगे हो रहे हैं। इससे लोगों की जेब पर दबाव बढ़ेगा, खर्च कम होगा और अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। एजेंसी के मुताबिक इसका सबसे ज्यादा असर सितंबर और दिसंबर तिमाही में देखने को मिल सकता है।

फिच ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत घरेलू मांग बनी रहेगी, लेकिन बढ़ती महंगाई लोगों की असली कमाई को कम कर देगी। यानी सैलरी भले वही रहे, लेकिन खर्च बढ़ने से खरीदारी की ताकत घट जाएगी।

दिलचस्प बात यह है कि पिछले हफ्ते RBI ने भी FY27 के लिए ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया था और महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया था। फिच के मुताबिक हाल के हफ्तों में पेट्रोल-डीजल और दूसरे ईंधनों की कीमतों में 4-5% तक बढ़ोतरी हुई है। इससे आम लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है।

हालांकि एजेंसी को उम्मीद है कि FY28 में हालात कुछ बेहतर होंगे। अगर तेल की कीमतों का दबाव कम हुआ और निवेश व खपत बढ़ी, तो भारत की ग्रोथ 6.7% तक पहुंच सकती है। सिर्फ भारत ही नहीं, पूरी दुनिया पर भी तेल संकट का असर पड़ रहा है। फिच ने 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर 2.4% कर दिया है। एजेंसी ने ब्रेंट क्रूड ऑयल का औसत भाव भी बढ़ाकर 87 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। मार्च में इसका अनुमान 70 डॉलर प्रति बैरल था।

महंगाई को लेकर भी फिच ने चेतावनी दी है। एजेंसी का मानना है कि साल के आखिर तक खुदरा महंगाई बढ़कर 5.3% तक पहुंच सकती है। कमजोर मानसून और कई इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी भी कीमतों को ऊपर धकेल सकती है।

फिच का यह भी मानना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए RBI इस साल एक बार ब्याज दर बढ़ा सकता है। फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर है, जो बढ़कर 5.5% हो सकती है। हालांकि रुपये को लेकर एजेंसी ज्यादा चिंतित नहीं है। फिच का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में रुपये में बड़ी गिरावट नहीं आएगी और डॉलर के मुकाबले इसकी औसत कीमत 97.50 रुपये के आसपास रह सकती है।