कोटा। तलवंडी स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित त्रिदिवसीय श्रुत पंचमी महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार को श्रुत स्कंध विधान एवं श्रुत पंचमी विधान श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेन्द्र की आराधना करते हुए श्रुत पंचमी विधान में भाग लिया तथा विश्व शांति, मानव कल्याण और आत्मिक उन्नति की मंगलकामना की। विनोद भैय्या के मार्गदर्शन में श्रुत पूजन का कार्य सम्पन्न हुआ तथा श्रद्धालुओं ने जिनवाणी के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में निरोग सागर महाराज, निर्मोह सागर महाराज, निरामय सागर महाराज एवं निर्भीक सागर महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि निरोग सागर महाराज ने कहा कि श्रुत पंचमी जैन धर्म में ज्ञान एवं जिनवाणी की आराधना का महत्वपूर्ण पर्व है। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन दिगम्बर जैन परंपरा के प्रथम लिपिबद्ध ग्रंथ ‘षट्खण्डागम’ को पुस्तकारूढ़ किया गया था।
आचार्य धरसेन स्वामी की प्रेरणा से आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली ने इस महान ग्रंथ की रचना कर जैन आगम परंपरा को सुरक्षित रखने का ऐतिहासिक कार्य किया। यही कारण है कि श्रुत पंचमी को जिनवाणी के संरक्षण एवं ज्ञान साधना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि जिनवाणी आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है तथा सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। शास्त्रों के अध्ययन, मनन और चिंतन से व्यक्ति का जीवन संस्कारित एवं मूल्यवान बनता है।
निरोग सागर महाराज ने श्रुत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी की दिव्य वाणी को सर्वप्रथम गणधर मुनिराजों ने ग्रहण किया था। यही ज्ञान आचार्य परंपरा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा।
कालांतर में समय के प्रभाव से श्रुतज्ञान का एक बड़ा भाग लुप्त होने लगा। तब आचार्य धरसेन ने अपने दो प्रमुख शिष्यों आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली को उपलब्ध शेष ज्ञान का उपदेश दिया।
कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजन, महिला मंडल एवं युवा शक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी रही। इस अवसर पर अध्यक्ष अशोक पहाड़िया, महामंत्री प्रकाश सामरिया, सकल समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, उपेन्द्र जैन, राजकुमार लुहाड़िया, संजय निर्वाण, अनिल जैन, अरविंद जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अध्यक्ष अशोक पहाड़िया ने बताया कि त्रिदिवसीय महोत्सव का समापन श्रुत स्कंध विधान, मंगल प्रवचन, आचार्य भक्ति एवं महाआरती के साथ सम्पन्न हुआ। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में जिनवाणी के प्रति गहरी श्रद्धा एवं ज्ञान साधना के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिला।

