डॉ. पाण्डेय एवं डॉ. विदुषी ने यूनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया का दौरा किया

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कोटा। प्रख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ, लेखक एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. सुरेश पाण्डेय तथा डॉ. विदुषी शर्मा ने हाल ही में अमेरिका के लॉस एंजेलिस स्थित विश्वप्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया (University of Southern California) एवं उसके प्रतिष्ठित रोस्की आई इंस्टीट्यूट शैक्षणिक एवं प्रेरणादायी दौरा किया।

इस विशेष यात्रा के दौरान डॉ. सुरेश पाण्डेय ने अपनी चर्चित एवं प्रेरणादायी पुस्तक ‘एन आई फॉर द स्काई’) यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया की लाइब्रेरी को सप्रेम भेंट की। यह पुस्तक संघर्ष, सेवा, चिकित्सा और सपनों की शक्ति को दर्शाने वाली एक प्रेरक आत्मकथा मानी जाती है, जिसने देश-विदेश के अनेक पाठकों को प्रेरित किया है।

यात्रा के दौरान डॉ. पाण्डेय, डॉ. विदुषी एवं उनकी सुपुत्री इशिता पाण्डेय ने यूनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया के प्रेसिडेंट मिस्टर बियोंग-सू किम से भी शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा, नवाचार, युवा प्रेरणा और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने यूएससी एनेनबर्ग स्कूल की डीन विलो बे से भी शिष्टाचार भेंट कर शिक्षा, मीडिया, संचार एवं युवा नेतृत्व जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा की।

अपने अमेरिकी प्रवास में डॉ. पाण्डेय एवं डॉ. विदुषी ने विश्वविख्यात रोस्की आई इंस्टीट्यूट का भी भ्रमण किया, जहां उनकी विशेष मुलाकात प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मार्क एस. हुमायूं से हुई। डॉ. मार्क एस. हुमायूं को दुनिया का पहला सफल आर्टिफिशियल रेटिना विकसित करने के लिए जाना जाता है।

उन्होंने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मेडिसिन, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक बहुआयामी टीम का नेतृत्व करते हुए दृष्टिहीन लोगों की आंखों में फिर से रोशनी लाने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

डॉ. पाण्डेय ने कहा कि यूएससी और रोस्की आई इंस्टीट्यूट का यह दौरा उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान, रिसर्च और नवाचार के क्षेत्र में डॉ. मार्क हुमायूं का योगदान पूरी दुनिया के युवा डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

डॉ. पाण्डेय एवं डॉ. विदुषी की यह अमेरिका यात्रा भारत और वैश्विक चिकित्सा जगत के बीच ज्ञान, नवाचार और मानवीय सेवा के आदान-प्रदान का उत्कृष्ट उदाहरण है।

एक छोटे से शहर कोटा से निकलकर वैश्विक स्तर पर चिकित्सा, साहित्य और प्रेरणा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. पाण्डेय की यह उपलब्धि युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि बड़े सपने, समर्पण और सतत प्रयास किसी भी व्यक्ति को विश्व मंच तक पहुंचा सकते हैं।