क्या भारत से पहले कई देशों में हुआ नीट पेपर लीक, जानिए इसके पीछे का सच

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सीकर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट यूजी 2026’ को लेकर मचे देशभर में कोहराम के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पेपर लीक के पुख्ता सबूत मिलने के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इस परीक्षा को रद्द कर दिया है। अब यह दोबारा परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि इस बार परीक्षा पुराने ढर्रे यानी पेन-एंड-पेपर मोड में ही होगी, लेकिन अगले साल से नीट को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड पर शिफ्ट कर दिया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी सेंधमारी न हो सके।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जब इस पेपर लीक के ‘भ्रष्ट तंत्र’ की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो इसके तार सीधे पुणे से जाकर जुड़े। सीबीआई ने पुणे से मास्टरमाइंड प्रोफेसर पी.पी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है, जो कई सालों से नीट के पेपर सेटिंग पैनल का हिस्सा था।

कुलकर्णी ने प्रिंटिंग प्रेस में छपने से पहले ही बायोलॉजी और केमिस्ट्री के सवाल लीक कर दिए थे। इसके बाद एंट्री हुई धनंजय लोखंडे की, जिसने इन लीक हुए सवालों को हवा की रफ्तार से राजस्थान के कोचिंग हब सीकर और जयपुर तक पहुंचा दिया।

यहीं नहीं, शुभम नाम के एक अन्य आरोपी ने तो हद ही पार कर दी, उसने टेलीग्राम ऐप पर एक युवक को 300 से 600 सवाल भेज दिए। दिल्ली की विशेष अदालत ने आरोपी धनंजय को 6 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है ताकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के अंदर बैठे ‘विभीषणों’ को बेनकाब किया जा सके।

कड़े पहरे में चूक या विदेश के सेंटरों से हुआ खेल?
नीट पेपर की सुरक्षा के लिए जो सख्त नियम हैं, उनके मुताबिक पेपर बनाने वाले एक्सपर्ट्स की बॉडी सर्च ली जाती है। उन्हें मोबाइल, कागज या पेन तक अंदर ले जाने की इजाजत नहीं होती और वे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों की कड़े पहरे में होते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा रहस्य यह है कि प्रोफेसर कुलकर्णी सवाल बाहर कैसे लाया? क्या तलाशी में लापरवाही हुई या सिस्टम ने आंखें मूंद ली थीं?

इस खेल में एक नया ‘विदेशी कनेक्शन’
जांच एजेंसियों को अब इस खेल में एक नया और बड़ा ‘विदेशी कनेक्शन’ भी नजर आ रहा है। दरअसल, भारत के बाहर 12 देशों के 14 शहरों (जैसे दुबई, दोहा, कुवैत सिटी, सिंगापुर और बैंकॉक) में परीक्षा से 8 दिन पहले यानी 25 अप्रैल को ही पेपर भेज दिए गए थे। विदेशी धरती पर सुरक्षा स्थानीय एजेंसियों के भरोसे होती है, जहां से लीक होने की सबसे ज्यादा आशंका है। राजस्थान एसओजी अब इसी विदेशी रूट की पड़ताल में जुटी है।