नई दिल्ली। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को दो महीने पहले असंवैधानिक करार दे दिया था। आज से उन कंपनियों के लिए रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो रही है जिन्होंने टैरिफ चुकाया था। इसे अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ा रिफंड माना जा रहा है।
यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) इसके लिए एक पोर्टल सिस्टम लॉन्च कर रहा है। अमेरिकन कंपनियां इसमें टैरिफ के रिफंड के लिए आवेदन कर सकती हैं। इन कंपनियों का सरकार पर 166 अरब डॉलर का रिफंड प्लस इंटरेस्ट बकाया है।
सीबीपी का अनुमान है कि मंजूरी मिलने के बाद 60 से 90 दिन में रिफंड जारी कर दिया जाएगा। लेकिन इसमें ज्यादा समय भी लग सकता है। इस प्रोग्राम को कंसोलिडेटेड एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोसेसिंग ऑफ एंट्रीज नाम दिया गया है।
ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में कई देशों पर टैरिफ लगा दिया था। लेकिन 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस टैरिफ को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि टैरिफ तय करने का अधिकार संसद को है।
किसे मिलेगा रिफंड
हालांकि कोर्ट ने रिफंड के बारे में कुछ नहीं कहा था लेकिन यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने पिछले महीने कहा कि इंटरनेशनल एमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ से प्रभावित कंपनियां रिफंड पाने की हकदार होंगी। सीबीपी के मुताबिक 330,000 इम्पोर्टर्स ने 53 मिलियन से अधिक शिपमेंट्स के लिए 166 अरब डॉलर का टैरिफ चुकाया था। रिफंड की यह प्रक्रिया कई चरणों में होगी।

