होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी हटाए बिना बातचीत संभव नहीं, ईरान ने दोहराया
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे शांति वार्ता होने की संभावना है और इस बार इसको लेकर बहुत ज्यादा ढोल नहीं पीटा जा रहा है।
अलजजीरा ने बताया है कि तीन देशों की यात्रा के तहत ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद पाकिस्तानी मध्यस्थ ईरान-अमेरिका वार्ता को लेकर ‘सावधानीपूर्वक आशावादी’ हैं।
अलजजीरा ने बताया है कि ‘अमेरिका-ईरान वार्ता अभी भी गोपनीय बनी हुई है।’ अलजजीरा ने बताया है कि दोनों पक्षों ने तय किया है कि जब विवरण और तकनीकी पहलुओं को उजागर करने की बात आएगी तो वे बहुत ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे।
अमेरिका और ईरान का प्रत्यक्ष वार्ता की सार्वजनिक घोषणा करने का कोई इतिहास भी नहीं रहा है और बहुत ही सीमित, स्पष्ट रूप से अभूतपूर्व मामलों को छोड़कर अभी तक दोनों पक्षों की तरफ से बातचीत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है।
पिछले महीने अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ बातचीत नाकाम होने की जानकारी सार्वजनिक तौर पर दी थी लेकिन ईरानी पक्ष की तरफ से ईरान जाने के बाद भी बातचीत को नाकाम बताया गया था। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की है।
अलजजीरा ने तेहरान स्थिति सूत्रों के हवाला देते हुए बताया है कि अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे से कम्युनिकेश चल रहे हैं और सिर्फ इस्लामाबाद ही नहीं बल्कि कुछ और जगहों पर भी बातचीत की गई है।
इस्लामाबाद के अलावा अन्य स्थानों पर भी अप्रत्यक्ष वार्ता के कई दौर हो चुके हैं जिनमें मॉस्को भी शामिल है। इसीलिए अब बड़ा सवाल यह नहीं है कि ये वार्ता प्रत्यक्ष है या अप्रत्यक्ष, बल्कि यह है कि क्या दोनों पक्ष कूटनीति के दायरे में रहकर इन मुद्दों को सुलझाने के लिए एक साथ बैठ सकते हैं या नहीं?
दिक्कत ये है कि कम से कम चार से पांच ऐसे मुद्दे हैं जिनपर सहमति बनाना सबसे ज्यादा मुश्किल होने वाली है जिनमें परमाणु बम निर्माण, साढ़े 400 किलो संवर्द्धित यूरेनियन, बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज, प्रतिबंधों से राहत और प्रतिबंधों से ईरान को हुए नुकसान की भरपाई शामिल है।
अभी एक दिन पहले ही अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान पर नये प्रतिबंध लगाए हैं। इसीलिए फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है कि क्या दोनों पक्ष कूटनीतिक तरीके से किसी प्वाइंट पर पहुंचेंगे या नहीं।
इस बीच दोनों पक्षों से ऐसी बयानबाजी लगातार हो रही है कि उनकी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर हैं जो इस बात का संकेत है कि यदि बातचीत विफल हो जाती है तो वे टकराव के एक और दौर के लिए तैयार हैं। तेहरान के सूत्रों ने कहा है कि ईरान सावधानीपूर्ण कूटनीति भी अपना रहा है और वो सैन्य रूप से भी तैयार है।
दिक्कत कई सारी हैं। जैसे ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ आमने-सामने की वार्ता की किसी भी उम्मीद को खारिज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के दोनों दूत उनके दामाद जेयर्ड कुशेनर और स्टीव विटकॉफ आज इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं।
ये दोनों पहले भी ईरान से वार्ता कर चुके हैं और नाकाम रहे हैं। युद्ध से पहले भी ये दोनों ही बातचीत कर रहे थे तो सवाल ये है कि फिर से अगर यही दोनों बातचीत में शामिल हैं तो अब उनके पास नया क्या है?
पिछले कुछ दिनों में ईरान ने अपनी शर्तों को दोहराते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में लगाई गई नाकेबंदी हटा नहीं ली जाती तब तक वह बातचीत नहीं करेगा। इसके साथ ही उसने यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी भी तरह के दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा।
उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि इन सभी परिस्थितियों के बीच वे बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। इसीलिए मामला काफी पेचीदा है और सबसे ज्यादा डर इस बात की है कि जो भी पक्ष पहले आंख झपकेगा वो हारा माना जाएगा और उसकी घरेलू राजनीति हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

