बेसिक सैलरी पर नहीं चलेगी कंपनियों की चालाकी, बढ़ेगा पीएफ का पैसा

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नई दिल्‍ली। अब कंपनियां आपकी सैलरी को अलाउंसेज में बांट कर बेसिक सैलरी कम रखने की चालाकी नहीं कर पाएंगी। इससे आपके पीएफ अकाउंट में ज्‍यादा पैसा जाएगा। वेसिक सैलरी पर कंपनियों की चालाकी पर अंकुश लगाने के लिए कर्मचारी भविष्‍य निधि ने वेज की परिभाषा तय करने का फैसला किया है।

इसके तहत अगर बेसिक सैलरी का 50 फीसदी से अधिक अलाउंस रखा जाता है तो इसे भी बेसिक सैलरी का हिस्‍सा माना जाएगा और कंपनी को भी इस पर भी पीएफ काटना होगा। सीबीटी की अप्रैल में होने वाली बैठक में रखा जाएगा प्रस्‍ताव वेज की परिभाषा तय करने की जरूरत क्‍यों पड़ी

मौजूदा समय में ईपीएफ एक्‍ट में वेज की परिभाषा तय नहीं है। इसकी वजह से एम्‍पलॉयर और असेसिंग अथॉरिटी वेज की व्‍याख्‍या अलग अलग तरह से करते हैं। इसके अलावा ईपीएफओ के अधिकारी भी वेज के मुद्दे पर अलग अलग स्‍टैंड लेते हैं।

ईपीएफओ को ऐसी शिकायतें मिल रहीं हैं कि एम्‍पलॉयर बेसिक सैलरी प्‍लस डियरनेस अलाउंस 10 से 30 फीसदी तक दिखाते हैं बाकी सैलरी तमाम अलाउंस जैसे परफार्मेंस अलाउंस, एंटरटेनमेंट अलाउंस, कन्‍वेंस अलाउंस और पर्सनल अलाउंस में बांट देते हैं।

इम्‍पलाई का कम कटता है पीएफ
इम्‍पलाई की बेसिक वेज और डियरनेस अलाउंस कम रहने से उसकी इन हैंड सैलरी तो बढ़ जाती है लेकिन उसका पीएफ कंट्रीब्‍यूशन कम हो जाता है। इससे उसके पीएफ अकाउंट में कम पैसा जाता है। इस तरह से रिटायरमेंट के समय उसके पीएफ फंड में उतना पैसा नहीं होगा जितना उसको रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए चाहिए।

नहीं पूरा हो रहा है सोशल सिक्‍योरिटी कवर मुहैया कराने का मकसद
ईपीएफओ के एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि कंपनियां वेज की तय परिभाषा तय न होने का फायदा उठा कर सैलरी को तमाम अलाउंस में बांट देती हैं। इम्‍पलाई की बेसिक सैलरी कम रखी जाती है। इससे इम्‍पलाई का पीएफ कम कटता है। ऐसे में ईपीएफ एक्‍ट के तहत इम्‍पलाई को सोशल सिक्‍योरिटी कवर मुहैया कराने का मकसद पूरा नहीं हो पाता है। इसकी वजह से इम्‍पलाई की पेंशन भी कम बनती है।