हाड़ौती के गुलाब को मिलेगी खास पहचान, 5 लाख रुपए किलो बिकेगा तेल

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कोटा। हाड़ौती में गुलाब की खेती को अब खास पहचान मिलेगी। कम लागत से गुलाब की फसल से पांच लाख रुपए किलो की कीमत वाला तेल निकाला जा सकता है। इसके लिए शहर से 15 किमी दूर बूंदी रोड पर नोताड़ा भोपत में केंद्र सरकार की ओर से सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिशनल ऐरोमेटिक प्लांट लखनऊ की टीम ने चार दिन तक गुलाब के फूलों से तेल, किस्म, बॉयो प्रोडक्ट सहित अन्य विषयों पर रिसर्च वर्क किया।

प्रारंभिक रुझान में बेहतर परिणाम सामने आए हैं और तेल की कीमत 5 लाख रुपए आंकी जा रही है। वैज्ञानिकों की टीम ने यहां के गुलाब की क्वालिटी से लेकर फूल, प्लांटिंग मटेरियल और अन्य सैंपल कलेक्ट किए हैं। जिनकी लखनऊ में जांच होगी। इनकी फाइनल रिपोर्ट 15 दिन में आएगी।

टीम में रिटायर्ड साइंटिस्ट डॉ. डीसी जैन के अलावा लखनऊ के साइंटिस्ट डॉ. बीआर राव, इंजीनियर जमील और असिस्टेंट गोपाल शामिल रहे। टीम ने किसानों को चार दिन तक गुलाब की खेती में सावधानी और किस्म सहित अन्य विषयों को लेकर जानकारी दी।

उल्लेखनीय है कि हाड़ौती में गुलाब की खेती के लिए नोताड़ा भोपत की खास पहचान है। किसान परमेश्वर, लोकेश ने बताया कि सरकार से प्लांट के लिए सब्सिडी और ट्रेनिंग मिल जाए तो यह खेती और प्लांट किसानों के लिए किफायती साबित हो सकती है।

चार दिन तक नोताड़ा भोपत में लखनऊ की टीम ने रिसर्च किया। इसके बाद टीम ने गुलाब का तेल 5 लाख रुपए किलो तक बिकने की संभावना जताई है।

क्या है प्रोसेस का तरीका : यहां के गुलाब में यह प्रारंभिक रुझान में एक किलो ऑयल के लिए करीब पांच हजार किलो फूल की जरूरत होगी। गुणवत्ता सुधार के बाद यह ग्राफ कम हो सकता है।

प्लांट खर्च : गुलाब से निकले वाले तेल सहित अन्य प्रोडक्ट तैयार करने के लिए एक प्लांट के लिए न्यूनतम दो से पांच लाख रुपए तक प्लांट पर खर्च हो सकते हैं।

मार्केट : ऐरोमेटिक के लिए मुंबई में एसोसिएशन बनी हुई हैं। इसके अलावा लखनऊ, दिल्ली के अलावा इंटरनेशनल मार्केट भी है।

पौधों की खरीद में 50 प्रतिशत छूट
हाड़ौती में गुलाब की खेती के प्रति हर साल किसानों का रुझान बढ़ता जा रहा है। पिछले साल 1.35 लाख पौधे लगाए थे, इस बार 1.55 लाख पौधे लगाए गए हैं। एक बीघा से अधिक में गुलाब की खेती के लिए पौधों की खरीद में 50 प्रतिशत छूट है। -डॉ. रामावतार शर्मा, संयुक्त निदेशक उद्यान विभाग