ईश्वर के चरणों में रहे, वो भक्त भाग्यशाली हैं -पूज्य नागरजी

0
112

अमृत वर्षा : बड़ां के बालाजी धाम पर श्रीमद भागवत कथा में बुधवार को रिमझिम बरसात से भक्ति रस में डूबे हजारों श्रद्धालु। खचाखच भरे पांडाल में अपार श्रद्धा से हुए जनार्दन दर्शन 

अरविंद,बारां/कोटा। बड़ां के बालाजी धाम में बुधवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आसमान से बरसती बूंदों में भीगते हुए श्रीमद् भागवत कथामृत का भावपूर्ण रसपान किया।

दिव्य गौसेवक संत पूज्य पं. कमलकिशोर ‘नागरजी’ ने कहा कि बिछिया असली हो या नकली, वह महिला के पैर में अच्छी लगती है, किसी डिब्बी में नहीं। नारी के पैर में भले ही नकली बिछिया क्यों न हो, वह सौभाग्यवती कहलाती है।

इसी तरह,जो भक्त ईश्वर के चरणों में रहता है, वो भाग्यशाली रहता है। कोई धनाड्य होकर बंगलों में डिब्बी की तरह बंद रहते हैं, लेकिन कोई कथा-सत्संग से जाकर प्रभू के चरणों में भक्ति करते हैं, वहां वह कृपा वर्षा अवश्य करता है।

जिस पर उसने दया दृष्टि डाल दी, वो तर गए। वर्षा में भीगना और सर्दी को सहना भी तप है। आप भक्ति में भीगे हो, इसलिए प्रभू के चरणों में हो। जहां मिले रोज यह चरणामृत लेते रहो।

उन्होंने कहा कि जीवन में तीन अमृत हमेशा लेना। पहला, चरणामृत, जो मंदिरों में प्रभू दर्शन करने से मिलेगा। दूसरा, वचनामृत, जो कथा-सत्संग में अच्छी वाणी से मिलता है। तीसरा, अधरामृत, जो केवल मां की गोद में दुग्धपान से मिलता है। अधरामृत न धरती पर मिलता है, न आसमान में। यह केवल मां की गोद में मिल पाता है।

पांडाल में ‘भजन करो, गोविंद नहीं है दूर, गोविंद मिलेगा जरूर..’ गूंजा तो उन्होंने कहा कि यह चौथा अमृत प्राकृत दया के रूप में ऊपर से किसानों पर बरसा है। वो आपके खेत में वर्षा कर आगे की हरियाली की व्यवस्था कर रहा है।

हर गांव-द्वार वृंदावन बने
पूज्य नागरजी ने कहा कि जिस घर के द्वार या गांव में ठाकुरजी की दया व कृपा हो, समझ लेना आप वृंदावन में है। अपने घर-गांव को वृंदावन बनाने के लिए तुलसी क्यारा (वृंदा), देशी शहद (मधुवन), मोरपंख, कदम का पेड़ एवं गाय अवश्य हो, तभी वह वृंदावन का रूप लेगा। वहां कलियुग या असमय यमदूत का प्रवेश नहीं हो सकता।

श्रीमद भागवत कथा का आंनद लेते पूर्व मंत्री प्रमोद भाया धर्मपत्नी के साथ।

पाप की धारा से हटो, पुण्य की धारा से जुड़ो
उन्होंने कहा कि आजकल केश (धन) से केस दब जाता है। अपराध करके मुलजिम पैसों से धारा बदलवा देते हैं, बरी हो जाते हैं। आप पैसों से केवल दोष मुक्त हो सकते हो। आज न चाहते हुए भी हमसे कहीं न कहीं पाप हो रहे हैं।

भजन-दर्शन -सत्संग की धारा से जुड़कर आप पापमुक्त हो जाओ। षरीर के दोशों को भजन से दूर कर लो। भक्ति की धारा से हमेषा जुड़े रहो।

पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया व समाजसेविका  उर्मिला भाया ने बताया कि विषम परिस्थिति में अटूट श्रद्धाभाव से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से बालाजी धाम की धरा पर भक्ति अमृत बरसता रहा। बरसते पानी में हजारों भक्तों ने उत्साह से महाआरती की। कथा में गुरूवार को कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

तृतीय सोपान सूत्र-

  •  निंदा पाठ हम रोज कर रहे हैं, गीता पाठ करना भूल रहे हैं।
  • संसार नहीं है यहां रहने को, यहां कष्ट ही कष्ट हैं सहने को। बस, भक्ति से जुड़े रहो।
  • बरसात हो या ठंड हमें भजन सुनना है। यही भक्ति का तप है।
  • निंदा पाठ हम रोज कर रहे हैं, गीता पाठ करना भूल रहे हैं।
  • ज्ञानवाणी से अपने अज्ञान को राख की तरह ढक दें।
  • कथा व श्मसान दोनों जगह हम बिना बुलाए जाते हैं।
  •  मन भटकता है लेकिन बुद्धि चाहे तो एक क्षण में ईश्वर से मिला दे।