अमेरिकी और ईरानी अधिकारी 60 दिनों के MoU को लागू करने पर राजी
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर गुरुवार को बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच एक समझौते पर सहमति बन गई है। इस डील को अब सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिलनी है।
इससे पहले अमेरिकी और ईरानी अधिकारी एक 60 दिनों के समझौता ज्ञापन यानी MoU को लागू करने पर राजी हो गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि भी की है। अब अगर इसे ट्रंप की मंजूरी मिल जाती है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव भी जल्द ही खत्म हो सकता है।
एक्सिओस की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना समझौते के मुख्य बिंदुओं में से एक है। यह भारत के लिए भी बेहद अहम खबर होगी क्योंकि इस प्रमुख समुद्री रास्ते के बंद होने से ऊर्जा संकट चरम पर पहुंच गया है। वहीं कच्चे तेल के दाम आसमान पर हैं जिससे भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं।
ऐसे में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू होने से भारत के एनर्जी सेक्टर पर दबाव भी कम होगा। बता दें कि युद्ध शुरू होने से पहले तेल और गैस के वैश्विक व्यापार का 20 प्रतिशत हिस्सा इस रास्ते से ही गुजरता था। हालांकि ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने यहां से जहाजों के गुजरने पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद अमेरिका ने भी यहां नाकेबंदी लागू कर दी।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित एमओयू के तहत होर्मुजु में जहाजों को बिना किसी रोक-टोक के गुजरने दिया जाएगा। अमेरिका ने कहा है कि इसका मतलब यह भी होगा कि यहां कोई टोल टैक्स नहीं लगेगा, जहाजों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और 30 दिनों के अंदर ईरान यहां से सभी बारूदी सुरंगों को हटा लेगा। वहीं ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका ने जो नाकेबंदी लगाई है, उसे भी धीरे-धीरे हटा लिया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक इस मसौदे में ईरान की ओर से परमाणु हथियार ना बनाने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। बताया जा रहा है कि मसौदा लागू होने के बाद 60 दिनों तक दोनों पक्षों के बीच इस पर बातचीत होगी।
पहले चरण की बातचीत में ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार के भविष्य पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वहीं अमेरिका भी प्रतिबंधों में राहत देने, ईरान के जब्त किए गए धन को वापस करने और मानवीय सहायता और जरूरी उत्पादों को ईरान तक पहुंचाने के लिए एक प्लान तैयार करने पर सहमत हुआ है।
डील फाइनल होने की खबरों के बीच अब भी संकट के बादल घिरे हुए हैं। बुधवार को कैबिनेट मीटिंग के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ, तो हमले और तेज किए जा सकते हैं।
ट्रंप ने पत्रकारों से यह भी कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो मेरे बाईं ओर बैठा यह आदमी (हेगसेथ की ओर इशारा करते हुए) उन्हें खत्म कर देगा। वहीं इस दौरान रूबियो ने कहा, “मुझे लगता है कि कुछ प्रगति हुई है। अब हम अगले कुछ घंटों में देखेंगे कि क्या और प्रगति हो सकती है।” उन्होंने यह भी कहा है कि समझौते पर ट्रंप कब तक दस्तखत करेंगे, यह कहना फिलहाल मुश्किल है।
इस बीट एक अमेरिकी अधिकारी ने प्रस्तावित समझौते को ईरान के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को आजाद करने का एक मौका बताया। अधिकारी ने कहा, “उनके सिस्टम में ऐसे लोग हैं जो समझते हैं कि यह एक अलग दिशा में आगे बढ़ने का मौका है।”
उन्होंने आगे कहा, “60 दिनों की बातचीत के दौरान हमें पता चल जाएगा कि क्या वाकई ऐसा है।” अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि डील में प्रतिबंधों या आर्थिक रियायतों से जुड़ी कोई भी गुप्त शर्त नहीं होगी। एक अधिकारी ने कहा, “ईरानी पक्ष जितना ज्यादा देने को तैयार होगा, उन्हें उतना ही ज्यादा मिलेगा।”

