गोल्ड ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग के लिए डेडलाइन के बाद जुर्माना और सजा पर रोक

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नई दिल्ली। गोल्ड ज्वैलरी (Gold Jewellery) पर अनिवार्य हॉलमार्किंग (Mandatory Hallmarking) को लेकर ज्वैलर्स के लिए राहत भरी खबर आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay Highcourt) की नागपुर बेंच ने एसेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर्स के मामले में पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते हॉलमार्किंग प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर पा रहे ज्वैलर्स पर कड़ा एक्शन लेने या जुर्माना लगाने से BIS को रोक दिया है। यह रोक अगली सुनवाई तक के लिए है, जो 14 जून 2021 को होगी। नागपुर बेंच ने इस बारे में 7 मई को एक अंतरिम आदेश पारित किया।

उल्लेखनीय है कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के प्रावधानों के तहत देश में गोल्ड ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग 1 जून 2021 से अनिवार्य होने वाली है। इस नए नियम के लागू होने के बाद ज्वैलर्स बिना हॉलमार्क वाली गोल्ड ज्वैलरी न ही स्टोर कर सकेंगे और न ही बेच सकेंगे।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि तर्क यह है कि गोल्ड ज्वैलरी पर 1 जून से हॉलमार्किंग अनिवार्य करने के प्रावधान से देश के 5 लाख ज्वैलर्स के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। कोर्ट में इस मामले में रिट पिटीशन ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डॉमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने दायर की थी। GJC, ज्वैलर्स के प्रमोशन, प्रोटेक्शन और उन्नति को सुनिश्चित करती है।

GJC के चेयरमैन आशीष पीठे के मुताबिक, ‘अदालत ने ज्वैलर्स की मुश्किलों को देखा। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अगली मुश्किल यह है कि ज्वैलर्स की संख्या के अनुपात में देश में हॉलमार्किंग सेंटर्स का प्रतिशत, 733 जिलों का लगभग 34% है। भारत में ऐसे 488 जिले हैं, जहां कोई हॉलमार्किंग सेंटर नहीं है। अभी ज्वैलरी के लगभग 6000 करोड़ पीस ऐसे हैं, जिनकी हॉलमार्किंग होना बाकी है।

GJC के पूर्व चेयरमैन नितिन खंडेलवाल का कहना है कि अगर अनिवार्य हॉलमार्किंग को लेकर BIS कानून का पालन नहीं किया गया तो पेनल्टी तो है ही, साथ ही अधिकतम 1 साल की जेल भी हो सकती है।