फसल और ट्रैक्टर के लिए लोन लिया है तो इस पर एक्स ग्रेशिया का फायदा नहीं मिलेगा

0
486

मुंबई। खेती और इससे जुड़े कामकाज के लिए अगर आपने कर्ज लिया है तो आप को सरकार की ओर से एक्स ग्रेशिया का फायदा नहीं मिलेगा। यानी ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच जो अंतर है, वह आपको नहीं मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है।

वित्त मंत्रालय ने सवाल-जवाब जारी कर कहा कि कृषि से संबंधित गतिविधियों जैसे ट्रैक्टर और फसल पर राहत नहीं दी जाएगी। सरकार ने फैसला किया है कि आपने लोन पर मोरेटोरियम लिया है या नहीं, उस पर जो भी ब्याज पर ब्याज होगा और साधारण ब्याज के बीच अंतर होगा, वह आपको मिलेगा।

क्रेडिट कार्ड धारकों को बकाया पर राहत मिलेगी
इसी के साथ सरकार ने यह भी कहा है कि उन क्रेडिट कार्ड धारकों को इस स्कीम का फायदा मिलेगा, जिन पर 29 फरवरी तक बकाया था। सरकार ने कहा है कि फसल और ट्रैक्टर लोन कृषि गतिविधियों में आता है। यह उन सेगमेंट में नहीं है, जिन्हें स्कीम के तहत फायदा मिलना है। सरकार ने 8 सेगमेंट इस स्कीम के दायरे में रखे हैं। इनमें MSME लोन, एजुकेशन लोन, हाउसिंग लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन, क्रेडिट कार्ड का बकाया, ऑटोमोबाइल लोन, प्रोफेशनल के लिए पर्सनल लोन और कंजम्प्शन लोन को शामिल किया गया है।

RBI ने जारी किया आदेश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को बैंकों और NBFC से कहा था कि वे एक्स ग्रेशिया के लिए स्कीम को लागू करें। यानी जो भी ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच का अंतर है, उसके पेमेंट के लिए तैयारी करें और 5 नवंबर से पहले इसे लागू करें। यह राहत 2 करोड़ रुपए तक के लोन के लिए लागू होगी। इसमें 6 महीने का लोन मोरेटोरियम है जो एक मार्च से 31 अगस्त के बीच के पीरियड को माना गया है।

शुक्रवार को सरकार ने मंजूरी दी थी
पिछले शुक्रवार को ही सरकार ने इस मामले में घोषणा की थी कि एक्स ग्रेशिया का पेमेंट सबको मिलेगा। इस मामले में 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होनी है। सरकार और RBI ने इससे पहले ही जो भी इसके मामले थे उसमें अपनी मंजूरी दे दी है। अब अंतिम काम बैंकों और एनबीएफसी को करना है। इस राहत के लिए किसी को कोई अप्लाई नहीं करना है। यह ऑटोमैटिक ग्राहकों के खाते में डिपॉजिट हो जाएगा। लोन मोरेटोरियम के लिए आरबीआई ने 27 मार्च को घोषणा की थी। इस स्कीम के जरिए सरकार को 6,500 करोड़ रुपए करीबन खर्च करने पड़ सकते हैं।