सौरवदास और आशुतोष रांका कानून का सम्मान नहीं करते, दो दिन हिरासत बढ़ाई

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नई दिल्ली। दिल्ली की एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को जिस आधार पर बढ़ाया है, वह बहुत ही गंभीर है। कोर्ट ने कहा है कि ये कानून का सम्मान नहीं करते, इसलिए प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन आयोजित करते हैं। एसईएम कोर्ट ने फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाई है।

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने सोमवार को दिए अपने आदेश में कहा इन दोनों प्रतिवादियों ने 11 अक्टूबर वाले बॉन्ड को जानबूझकर तोड़ा और शांति भंग की। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार रांका और सौरव को लेकर कोर्ट ने जो टिप्पणी की हैं, वह बहुत ही गंभीर हैं

कोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने जो बयान दिए हैं, उससे उनके आचरण को देखते हुए और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखकर विश्वास पैदा नहीं होता कि ये भविष्य में इसी तरह का अपराध नहीं करेंगे।


दिल्ली पुलिस की दलीलों से घिरे

  • अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत पांच दिन से आगे बढ़ाने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणियां की हैं।
  • इस दौरान जांच अधिकारी ने अदालत के सामने यह दलील रखी कि केस से संबंधित जो डेवलपमेंट हुए हैं, उससे शांति भंग होने की आशंका बनी हुई है।
  • इसमें उस तथ्य को भी कोर्ट के सामने रखा गया कि किस तरह से इसी मामले के पूर्व मजिस्ट्रेट को कथित रूप से एक अज्ञात व्हाट्सएप भेजा गया। इसे धमकी बताया जा रहा है, जिसके बाद उन्होंने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
  • सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि प्रतिवादी कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य हैं और इन्होंने जंतर-मंतर के प्रोटेस्ट साइट के रूप में डि-नोटिफाई होने के बावजूद लोगों को वहां पर जुटने का आह्वान किया।
  • पुलिस का यह भी आरोप है कि इन्होंने जंतर-मंतर ही नहीं, सोशल मीडिया के जरिए कनॉट प्लेस में प्रदर्शन का भी एलान किया, जबकि यह धरना-प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र हैं।

अदालत से रिहाई की लगाई गुहार
वहीं पुलिस की याचिका का विरोध करते हुए आशुतोष रांका और सौरव दास के वकील ने अदालत से दोनों को तत्काल रिहा करने की गुहार लगाते हुए कहा कि वे कथित अपराध फिर नहीं दोहराएंगे। उन्होंने ये भी दावा किया कि 10 अक्टूबर के बाद इन्होंने किसी प्रोटेस्ट का आह्वान नहीं किया है और इस मामले में गिरफ्तार हुए एआईएसए नेता नेहा बोरा और सीजेपी चीफ अभिजीत दिपके को रिहा भी किया जा चुका है।

आशुतोष रांका, सौरव से लिखित जवाब मांगा
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंची कि पुलिस ने जो साक्ष्य दिए हैं, उससे शांति भंग होने की गंभीर चिंता है और इससे आम जनजीवन पर असर पड़ सकता है। बहरहाल, कोर्ट ने दोनों नेताओं को दो दिनों के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का मौका दिया और उसे पहले जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

21 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
कोर्ट ने यह भी कहा कि इनकी ओर से जो शुरिटीज जमा की गई हैं, उसमें विसंगतियां हैं और पहचान संबंधी और निजी जानकारियों से संबंधित दस्तावेज संतोषजनक नहीं हैं। इन्हें फ्रेश शुरिटीज जमा करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार (21 अक्टूबर,2026) को दोपहर बाद 2 बजे होगी, जब आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।