भारतीय दूत ने संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया, जानिए क्या बोला

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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण पर भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत करारा पलटवार किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद, सेना के शासन, अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर जमकर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से बार-बार दोहराए जाने वाले झूठ सच नहीं बन जाते। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि पाकिस्तान को हमारे केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर नहीं बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके की बात करनी चाहिए कि वहां कितने बुरे हालात हैं।

पेटल गहलोत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयान को ‘बेतुका’ बताते हुए कहा कि दुनिया को 9/11 आतंकी हमले के संदर्भ को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल करीब रह रहा था।

उन्होंने कहा, “यह वही सेना है, जिसकी आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने हमारे सामने इतनी गहरी तारीफ की।” भारत की राजनयिक ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार पर भी तंज कसा और उसे पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले शब्द ‘फॉर्म 47 सरकार’ से जोड़ दिया। उन्होंने कहा, “लेकिन पाकिस्तान के लोग जिसे खुद ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहते हैं, उससे ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है।”

पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की ओर से धार्मिक असहिष्णुता और मानवाधिकारों को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ये बातें ऐसी सरकार की ओर से आ रही हैं, जिस पर खुद कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास होने के आरोप हैं। उन्होंने कहा, “वे दिन में सुरक्षा कायम रखने का दावा करते हैं, जबकि रात में वास्तव में आतंकवाद को अंजाम देते हैं।”

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि दुनिया इस बात से परिचित है कि वहां अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता पर दिए गए खोखले उपदेश दुनिया को गुमराह नहीं कर सकते।

कश्मीर पर भारत का दो टूक जवाब
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में पेटल गहलोत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, “भारतीय संघ का जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।” इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान से वहां के लोगों की स्थिति पर ध्यान देने को कहा। गहलोत ने कहा, “अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है तो अपना ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर करें। रावलकोट के लोगों से पूछिए कि वे लंबे समय से मनमानी हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का सामना कर रहे हैं।”

‘सीमा पार आतंकवाद पाकिस्तान की पुरानी नीति’
भारत ने अपने जवाब में सबसे ज्यादा जोर पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद पर दिया। पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और भारत ने पिछले साल यह दिखा दिया था कि आतंकवादियों के लिए कहीं भी भागकर छिपना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा और जारी रखा जाएगा। पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे।”