अगस्त में सोयाबीन तेल के 46% अधिक आयात होने का अनुमान

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मुम्बई। Soybean Oil Import: विभिन्न कारणों से चालू माह (अगस्त) के दौरान देश में सोयाबीन तेल का आयात तेजी से बढ़कर एक नए मासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है।

वैश्विक बाजार में सोया तेल का भाव प्रतिस्पर्धी स्तर पर बना हुआ है जबकि रूस-यूक्रेन के बीच भयंकर युद्ध जारी रहने से सूरजमुखी तेल का आयात बुरी तरह प्रभावित होने के संकेत मिल रहे हैं।

इसकी क्षतिपूर्ति सोयाबीन तेल से की जा सकती है। भारत में त्यौहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भी आयात बढ़ाना आवश्यक है।

उद्योग व्यापार समीक्षकों के अनुसार अगस्त 2026 में सोयाबीन तेल का आयात तेजी से उछलकर 6.20 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान है जो न केवल अगस्त के लिए बल्कि किसी भी एक माह के लिए आयात का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान अभी तक सोयाबीन तेल का औसत मासिक आयात 4.25 लाख टन रहा है जिसके मुकाबले अगस्त 2026 का आयात 46 प्रतिशत अधिक हो सकता है।

भारत में सोयाबीन तेल का आयात मुख्यतः अर्जेन्टीना एवं ब्राजील से होता है जबकि सूरजमुखी तेल रूस एवं यूक्रेन से मंगाया जाता है। रूस एवं यूक्रेन एक-दूसरे के बंदरगाहों तथा व्यावसयिक जहाजों पर भीषण बमबारी कर रहे हैं जिसे सूरजमुखी तेल का शिपमेंट बाधित हो रहा है। जहां तक पाम तेल का सवाल है तो इसका भाव बढ़कर उस स्तर पर पहुंच गया है जहां सोयाबीन तेल इसकी प्रतिस्पर्धी में आ गया है।

भारत में सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन एक निश्चित सीमा में स्थिर हो गया है जबकि सोया तेल की घरेलू मांग एवं खपत लगातार बढ़ती जा रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सोया तेल के आयात पर भारत की निर्भरता निकट भविष्य में कम या खत्म होने वाली नहीं है।

सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से कुछ पीछे हो गया है जबकि मौसम एवं मानसून की हालत भी पूरी तरह फसल के लिए अनुकूल नहीं है। इसकी अगैती बिजाई वाली नई फसल की कटाई-तैयारी सितम्बर के तीसरे-चौथे सप्ताह में आरंभ हो सकती है मगर सोया तेल के आयात पर इसका विशेष असर नहीं पड़ेगा।