नई दिल्ली। देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून की अच्छी बारिश होने के कारण हाल के सप्ताहों में खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ गई। इसके फलस्वरूप इसका कुल उत्पादन क्षेत्र 7 अगस्त तक बढ़कर 180.20 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 175.01 लाख हेक्टेयर से 5.19 लाख हेक्टेयर या 3 प्रतिशत ज्यादा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन में मूंगफली उत्पादन क्षेत्र 43.11 लाख हेक्टेयर से 8.6 प्रतिशत बढ़कर 46.82 लाख हेक्टेयर, सूरजमुखी का रकबा 59 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 1.01 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 119.66 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 119.92 लाख हेक्टेयर तथा तिल का क्षेत्रफल 8.52 लाख हेक्टेयर से करीब 17 प्रतिशत उछलकर 9.92 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों का कहना है कि अगर अगस्त में मौसम एवं मानसून की स्थिति अनुकूल रही तो खरीफ कालीन तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र इसके पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल (करीब 200 लाख हेक्टेयर) के अत्यन्त करीब या उससे ऊपर पहुंच सकता है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने चालू खरीफ सीजन के लिए तिलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र का लक्ष्य 206.45 लाख हेक्टेयर तथा उत्पादन का लक्ष्य 289.25 लाख टन निर्धारित किया है। इसके तहत 148.50 लाख टन सोयाबीन, 113.50 लाख टन मूंगफली, 21.50 लाख टन अरंडी तथा 4.20 लाख टन तिल के उत्पादन का लक्ष्य भी शामिल है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 के खरीफ सीजन में कुल मिलाकर 196.38 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसलों की खेती हुई थी और इसका सकल वास्तविक उत्पादन 266.68 लाख टन पहुंचा था।
अरंडी का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से 23 प्रतिशत पीछे चल रहा है। सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- गुजरात में इसका रकबा 44 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 1.30 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। राजस्थान में रकबा लगभग सामान्य है।

