कोटा। गणिनी आर्यिका रत्नस्वस्ति भूषण माताजी (ससंघ) ने शनिवार को अपने प्रवचन में कहा कि द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव के आधार पर कर्मों का प्रभाव निर्धारित होता है। अनुकूल धर्म क्षेत्र, श्रेष्ठ वातावरण और सकारात्मक भावों में व्यक्ति का मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास सहज रूप से होता है, जबकि प्रतिकूल परिस्थितियां आत्मिक उन्नति में बाधा उत्पन्न करती हैं।
उन्होंने कहा कि जैसा वातावरण होता है, कर्म भी उसी अनुरूप फल प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को ऐसे वातावरण का चयन करना चाहिए जो आत्मबल को बढ़ाए और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करे।
आर्यिका माताजी ने कहा कि मोक्ष साधना के लिए अनुकूल द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव आवश्यक हैं। संयम, साधना और आत्मचिंतन से युक्त जीवन ही आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने णमोकार महामंत्र की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि इसमें अनंत अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधुओं की दिव्य ऊर्जा एवं आशीर्वाद समाहित हैं।
श्रद्धा और भावपूर्वक किए गए मंत्र जाप से आत्मशक्ति का जागरण होता है तथा अनेक पापकर्मों का क्षय संभव होता है। उन्होंने कहा कि णमोकार महामंत्र में अनंत शक्ति निहित है, जिसका प्रभाव तभी प्रकट होता है जब वह मन से आत्मा तक पहुंचे।
मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि 15 से 19 जून तक मंदिर परिसर में णमोकार महामंत्र जाप्य अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा, जिसमें लाखों मंत्रों का सामूहिक जाप किया जाएगा।
इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला,मनोज जैसवाल, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, टीकम पाटनी, पंकज खटोड़, पारस आदित्य, सेवानिवृत्त न्यायाधीश जितेंद्र कुमार, अशोक सांवाला, निर्मल अजमेरा, महावीर बड़ला, राजकुमार पाटनी, नरेंद्र कासलीवाल, अजीत गोधा, वर्धमान कासलीवाल, अनिल मित्तल, मनीष सेठी एवं संजय लुहाड़िया,विनोद टोरडी सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

