दिग्गज पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर नहीं रही, 89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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मुंबई। Suman-kalyanpur-passed-away: दिग्गज पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर, जिनकी मधुर आवाज ने कई पीढ़ियों के लोगों को मंत्रमुग्ध किया, उनका 31 मई को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सिनेमा में उनकी यात्रा ‘शुक्रची चांदनी’ और ‘मंगू’ (1954) जैसी फिल्मों से शुरू हुई थी।

वर्षों से उन्होंने ‘शराबी शराबी ये सावन का मौसम’, ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार’, ‘ना तुम हमें जानो’, ‘परबतों के पेड़ों पर’ और ‘निम्बोनीच्या झाड़ा मागे’ जैसे कई सदाबहार गानों को अपनी आवाज दी।

मोहम्मद रफी के साथ उनके सहयोग को काफी लोकप्रियता मिली। उनके निधन की खबर के बाद श्रद्धांजलि का तांता लग गया, जिनमें वरिष्ठ एनसीपी नेता शरद पवार और सिंगर फैयाज सबसे पहले शोक व्यक्त करने वालों में शामिल थे।

सुमन की आवाज सुरीली सिंगर लता मंगेशकर से इतनी मिलती-जुलती थी कि लोग अक्सर दोनों की आवाज को लेकर भ्रमित हो जाते थे। उन्होंने संगीत की दुनिया में दशकों तक अपनी एक अलग पहचान बनाई।

28 जनवरी, 1937 को अविभाजित भारत के ढाका में जन्मीं सुमन कल्याणपुर हिंदी और मराठी सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध सिंगर्स में से एक बनीं। फिल्मी संगीत के अलावा, उनके भजन, गजल, मराठी अभंग और भावगीत भी गाए, जो एक कलाकार के रूप में उनकी पहचान बनी।

मुंबई के सेंट कोलंबस स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, सुमन ने चित्रकला की पढ़ाई की और सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया। हालांकि, जल्द ही संगीत ही उनका जुनून बन गया।

उन्होंने पंडित केशवराव भोले, उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और उस्ताद नवरंग जैसे प्रख्यात गुरुओं से ट्रेनिंग ली, जिसने उनके करियर की नींव रखी। सुमन ने 1958 में बिजनेसमैन रामानंद कल्याणपुर से शादी की। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू अग्नि हैं।