विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव, पर वैश्विक झटकों से निपटने को तैयार भारत: वित्त मंत्री

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नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की ऊंची कीमतें विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं। यह बात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज एक कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने की अपील को अस्थिर वैश्विक जिंस बाजार और बढ़ती आयात लागत के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मुंबई में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा, ‘ऐसा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण है और कच्चे तेल की ये कीमतें लगातार बदल रही हैं।’ उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया का संकट केवल कूटनीति या भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है।

व्यवसायों और आम लोगों के लिए इसका मतलब ईंधन की ऊंची लागत, माल ढुलाई में देर, महंगी शिपिंग, कच्चे माल की किल्लत, कार्यशील पूंजी पर दबाव और निर्यात ऑर्डर में अनिश्चितता हो सकती है।‘ उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने न केवल भारत बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

सीतारमण ने कहा कि ईंधन की कीमतें ऊंची हैं और लगातार बदल रही हैं। वै​श्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में अकल्पनीय वृद्धि हुई है। सोने की ऊंची कीमतें भी बाहरी मोर्चे पर चुनौतियां पैदा कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘इन तीनों मदों के लिए भुगतान विदेशी मुद्रा में किया जाता है और रुपये में कोई कारोबार नहीं होता है। मौजूदा स्थिति में ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा (तीन एफ) पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।’ वित्त मंत्री ने कहा कि इस संदर्भ में प्रधानमंत्री का विदेशी मुद्रा को संरक्षित करने का आह्वान बहुत महत्त्वपूर्ण है।

वित्त मंत्री के बयान ऐसे समय आए हैं जब पश्चिम एशिया संघर्ष के आर्थिक प्रभावों- शिपिंग मार्गों के लिए जोखिम, माल ढुलाई की उच्च लागत और ऊर्जा बाजार में व्यवधान को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालांकि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें शुरू में अपरिवर्तित रहीं लेकिन अब तेल मार्केटिंग कंपनियां बढ़ी लागत के भार का एक हिस्सा ग्राहकों पर डालने लगी हैं। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम चार बार बढ़ गए हैं।

सीतारमण ने कहा, ‘नागरिकों को कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। इससे वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी खजाने पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का असर पड़ेगा।‘ वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर भी दबाव पर प्रकाश डाला और कहा कि लंबी अनिश्चितता से व्यावसायिक योजना बनाना मुश्किल हो गया है।

उन्होंने निराशावादी विमर्श गढ़ने वालों पर भी निशाना साधा और कहा कि इस समय भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता। हमें अपने शब्दों और अपने कार्यों से लोगों में भरोसा पैदा करने की जरूरत है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह संकट बाहरी घटनाओं के कारण उत्पन्न हुआ है और घरेलू अर्थव्यवस्था सकारात्मक तथा मजबूत बनी हुई है।

सीतारमण ने भू-राजनीतिक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दर्शाने वाले आर्थिक संकेतकों जीएसटी संग्रह, ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों की बिक्री, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के खराब ऋणों में कमी का हवाला दिया। भारतीय उद्योग परिसंघ के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में सितंबर 2025 में 67 फीसदी की वृद्धि हुई जो निजी क्षेत्र के निवेश में सुधार का संकेत है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया ‘बहुत संतुलित’ रही है और समग्र विकास की गति को बनाए रखते हुए एमएसएमई, निर्यातकों और कार्यशील पूंजी तनाव का सामना करने वाले क्षेत्रों का समर्थन करने पर केंद्रित है। उन्होंने केंद्रीय बजट में आर्थिक ​स्थिरता कोष के लिए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक देने के सरकार के फैसले का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने इसे बाहरी झटकों के खिलाफ एक एहतियाती बफर बताया।

उन्होंने कहा, ‘यह पश्चिम एशिया की स्थिति के पूर्ण प्रभाव से पहले बनाया गया एक आपातकालीन उपाय था ताकि भारत वैश्विक झटकों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों और किसी भी क्षेत्र में अचानक तनाव पर तेज प्रतिक्रिया कर सके।’

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से केंद्र सरकार को अ​धिशेष हस्तांतरण पर सीतारमण ने कहा कि भुगतान एक समिति द्वारा अनुशंसित स्थापित सूत्र के अनुसार किया गया है और उन्हें आरबीआई के मूल्यांकन पर पूरा भरोसा है।

पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरित करने का निर्णय लिया था। यह राशि कई अर्थशास्त्रियों द्वारा अनुमानित राशि से थोड़ी कम थी। रुपये की गिरावट और संभावित संप्रभु डॉलर बॉन्ड जारी करने के बारे में वित्त मंत्री ने कहा, “सरकार मुद्रा प्रबंधन, निवेश और गोल्ड बॉन्ड सहित अन्य मुद्दों पर सुझाव एकत्र कर रही है। हम इन सभी समाधानों पर गौर करेंगे।’