नई दिल्ली। LPG Ship Symi Reach Kandla Port: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करके रसोई गैस से भरा एक बड़ा जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘सिमी’ करीब 20 हजार टन रसोई गैस लेकर गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पहुंचा है।
लेकिन इस खबर की सबसे बड़ी बात सिर्फ जहाज का पहुंचना नहीं, बल्कि उसका वह खतरनाक सफर है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। बताया जा रहा है कि ईरानी नौसेना की कड़ी निगरानी, अमेरिकी नाकेबंदी और युद्ध के खतरे के बीच जहाज को सुरक्षित निकालना किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन से कम नहीं था। यहां तक कि दुश्मन के रडार से बचने के लिए जहाज का ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी AIS तक बंद करना पड़ा।
भारत के लिए यह राहत इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि युद्ध के कारण देश के ईंधन भंडार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह खेप देश की रसोई और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आखिर कैसे पूरा हुआ यह हाई रिस्क ऑपरेशन… आइए आपको बताते हैं इस वीडियो में।
पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी मालवाहक जहाज ‘सिमी’ रविवार सुबह सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पहुंच गया।
यह जहाज करीब 20 हजार टन रसोई गैस लेकर भारत पहुंचा है। खास बात यह है कि जहाज ने दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री रास्तों में गिने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पार कर यह सफर पूरा किया है। पश्चिम एशिया में पिछले करीब 75 दिनों से जारी युद्ध के कारण यह समुद्री मार्ग पूरी तरह तनाव के घेरे में है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन यानी IOC ने कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से यह एलपीजी खरीदी थी। जहाज पर सवार 21 विदेशी चालक दल के सदस्य भी पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं। ओमान की खाड़ी में ईरानी नौसेना की कड़ी निगरानी और अमेरिकी नाकेबंदी के बीच इस जहाज को सुरक्षित बाहर निकालना किसी बड़े मिशन से कम नहीं था।
सूत्रों के मुताबिक जहाज ने युद्ध क्षेत्र से गुजरते समय बेहद सावधानी बरती। दुश्मन के रडार और निगरानी तंत्र से बचने के लिए जहाज का ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ यानी AIS अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।
AIS बंद होने के बाद जहाज ने बेहद सतर्कता के साथ ईरान के लारक द्वीप के पूर्वी हिस्से से रास्ता तय किया। यही वजह रही कि जहाज किसी भी तरह की निगरानी या हमले की चपेट में आए बिना सुरक्षित रूप से भारतीय सीमा तक पहुंच सका।
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में भारत सरकार के कई मंत्रालयों ने अहम भूमिका निभाई। बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच लगातार समन्वय बना रहा।
सूत्रों का कहना है कि जहाज की हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही थी ताकि उसे किसी भी गोलाबारी या सैन्य कार्रवाई से दूर रखा जा सके। मार्च की शुरुआत से अब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचने वाला यह 13वां जहाज है।
बताया जा रहा है कि इस जहाज के पीछे वियतनाम के ध्वज वाला एक और टैंकर ‘एनवी सनशाइन’ भी इसी समुद्री मार्ग से भारत की ओर बढ़ रहा है। यह टैंकर न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भारत को रसोई गैस की सप्लाई में कुछ राहत मिल सकती है।
दरअसल पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारत के ऊर्जा भंडार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। देश के रणनीतिक कच्चा तेल भंडार में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक भारत का तेल भंडार 10.7 करोड़ बैरल से घटकर अब करीब 9.1 करोड़ बैरल रह गया है। यही वजह है कि केंद्र सरकार लगातार ऊर्जा बचत पर जोर दे रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से पेट्रोल और डीजल का सोच-समझकर इस्तेमाल करने और ईंधन बचाने की अपील की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बन सकती है। फिलहाल ‘सिमी’ जहाज का सुरक्षित भारत पहुंचना सरकार और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

