Friday, July 10, 2026
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आर्थोस्कोपी से आर्थोपेडिक सर्जरी हुई आसान, घुटने की लिगामेंट बनाना भी संभव

कोटा। दिल्ली के एओ कौंसिल मेंबर डाॅ. रिताभ मित्तल ने कहा कि फुटबॉल और लॉन्ग जंप जैसे खेल में जरा-सी चूक से बड़ी इंजरी हो जाती है। इसमें अक्सर लिगामेंट टूट जाते हैं, जो एक्स-रे में भी पकड़ में नहीं आते। लेकिन, अब नई तकनीक के कारण लिगामेंट खराब होने पर दूसरा लिगामेंट बनाना भी आसान हो गया है।

वे आर्थोपेडिक शिक्षा मे विश्व विख्यात संस्था एओ द्वारा मेडिकल काॅलेज मे रविवार को आयोजित प्री बेसिक कोर्स के दौरान जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि हम जांघ में मौजूद टेंडन लिगामेंट की जगह पर लगा देते है, जो छह से सात महीने में लिगामेंट में परिवर्तित हो जाता है। घुटनों की सर्जरी में यह ज्यादा आसान होता है, जबकि कंधे की सर्जरी में लिगामेंट को रिपेयर किया जाता है।

कोटा मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. विजय सरदाना ने कहा कि इसके माध्यम से नए चिकित्सकों को नई तकनीक और मेडिकल साइंस के नवाचार सीखने को मिलते हैं। यही नवाचार बाद में रोगियों के काम आते हैं। पहले आर्थोपेडिक में महिलाएं नहीं आती थीं, लेकिन अब महिला चिकित्सक भी आर्थोपेडिक्स में आ रही हैं।

आयोजन समिति के अध्यक्ष डाॅ. एसएन सोनी ने बताया कि पहले हड्डियों की सभी सर्जरी ओपन होती थी। इसमें ज्यादा खर्च के साथ मरीज को ठीक होने में भी ज्यादा समय लगता था। इसके उलट ऑर्थोस्कोपी में चार एमएम से भी कम के कुछ छेद किए जाते हैं। एक छेद से कैमरा डालते हैं तो दूसरे से उपकरण। ओपन सर्जरी में मांसपेशियां ढंग से नहीं दिखती थीं, लेकिन कैमरे के लैंस में कई गुना बड़ी दिखती हैं। ऐसे में सर्जरी ज्यादा सटीक होती है।

इन विषयों पर दी जानकारी
इस अवसर पर एओ के ओर्गेनाइजनिंग चैयरमेन डाॅ. एसएन सोनी, आर्थोपेडिक विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. राजेश गोयल, डाॅ. अशोक तिवारी, डाॅ. मोहन मंत्री, डाॅ. आरपी मीना, डाॅ. जसवंत सिंह, डाॅ. मो. इकबाल, डाॅ. मनीष गर्ग, कोटा ओर्थो सोसाइटी के अध्यक्ष डाॅ. जीडी रामचंदानी, सचिव डाॅ. हितेश मंगल, डाॅ. केजी नामा ने पांच सत्रों को संबोधित किया।

प्रथम और द्वितीय सत्र में आर्थोपेडिक फैक्चर, ट्रीटमेंट, डाइरेक्ट इनडायरेक्ट रिडक्शन, स्क्रू एनाटोमी, प्लेट्स फार्म एण्ड फंक्शन, टेंशन बैण्ड वायरिंग, एक्स्ट्रा मीडिल्यूरी फिक्सेशन, लेग स्क्रू फिक्शेसन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वहीं, अन्तिम दो सत्रों में मेनेजमेंट ऑफ आर्टिक्यूलर फे्रक्चर, डायफिजियल फ्रैक्चर्स ओपन फ्रैक्चर्स,, इन्फेक्शन आदि के बारे में चर्चा हुई। इस दौरान पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन, वीडियो और प्रेक्टिकल सेशन भी हुए।

इस कोर्से में राजस्थान के अजमेर, उदयपुर, जोधपुर और कोटा मेडिकल कॉलेज के 60 आर्थोपेडिक स्नातकोत्तर चिकित्सकों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव में लाइव सर्जरी के प्रेक्टिकल सेशन भी आयोजित किए गए थे। जिसमें कंधो, एंकल, घुटने, टखने और दूसरे जोड़ों की सर्जरी को उपकरणों के माध्यम से समझाया गया।

कारों के बाद अब टीवी की भी बिक्री घटी, इंडस्ट्री की इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है, जहां अब ऑटो के बाद टीवी की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में टीवी मैन्युफैक्चरर्स ने सरकार से जीएसटी में कटौती और ओपन टीवी सेल पैनल से इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग की है, जिससे टीवी की बिक्री को बढ़ावा मिल सके। बता दें कि आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 के बाद से टीवी पैनल सेल की बिक्री में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

टीवी मैन्युफैक्चरर्स ने कम डिमांड मिलने की वजह से टीवी की बिक्री में गिरावट की बात कही है। साथ ही अन्य होम अप्लायंस प्रोडक्ट जैसे वाशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर की ग्रोथ में भी जुलाई में माह में गिरावट दर्ज की गई है।कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड एप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CEAMA) के अध्यक्ष कमल नंदी ने कहा कि कुल मिलाकर जुलाई माह में इंडस्ट्री की ग्रोथ नहीं दर्ज की गई है।

जीरो ड्यूटी लगाने की मांग
नंदी कहा कि इंडस्ट्री एक निगेटिव दौर से गुजरे, उससे पहले सरकार को कुछ छूट देकर इंडस्ट्री की हालत दुरुस्त करनी चाहिए। पैनासोनिक इंडिया के सीईओ मनीश शर्मा ने सरकार से होम एप्लायंस पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती और ओपल सेल पर जीरो ड्यूटी लगाने की मांग की।

केरल में अधिक बारिश से इलायची की फसल को नुकसान, बढ़ सकते हैं दाम

इंदौर। केरल में लगातार बारिश और पिछले साल बाढ़ से पुराने पौधों को नुकसान के साथ-साथ स्टॉक की कमी से इलायची के भाव रिकॉर्ड ऊंचा स्तर पार कर गए हैं। इन भाव पर भी निर्यात और आगामी त्योहारों के लिए मांग बनी हुई है।

नई फसल में देरी और उत्तर भारत से बढ़ती मांग के चलते पिछले शनिवार को केरल के इडुक्की में हुई नीलामी में छोटी इलायची की कीमत 7,000 रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। औसत भाव 4,733 रुपए प्रति किलो रहा। एक महीने पहले इसका भाव 3,000 रुपए प्रति किलो के आसपास था।

नई फसल आने में देरी से छोटी इलायची के भाव बढ़े हैं। इडुक्की इलायची की बुआई के मामले में देश में अव्वल। आमतौर पर जुलाई में फसल की तुड़ाई (हार्वेस्टिंग) शुरू हो जाता है। मानसून में शुरुआती देरी और उसके बाद लगातार मानसून के सक्रिय रहने से अब फसल सितंबर मध्य तक आने की संभावना है।

‘कार्डमम ग्रोअर्स एसोसिशन’ के अनुसार नई फसल को खेत से निकालने का काम अब सितंबर में ही शुरू हो पाएगा। नई फसल आने में देरी और सप्लाई घटने की वजह से भाव और बढ़ सकते हैं। पिछले साल अगस्त में केरल में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से इलायची की खेती प्रभावित हुई थी, इससे पैदावार में भारी गिरावट आई, जिससे साल भर स्टॉक की कमी रही।

बारिश में देरी का भी असर
कार्डमम प्रोसेसिंग एंड मार्केटिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी के मुताबिक इस साल मई तक बारिश नहीं हुई, जिससे पौधों में फूल समय पर नहीं आए। ऐसे में फसल तैयार होने में देरी हो रही है। मानसून सीजन के शुरुआत में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई और अब लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में इस साल पैदावार पिछले साल से कम आने की आशंका है। नीलामी में पिछले माह तक रोजाना करीब 20-30 टन छोटी इलायची आती थी, जो अब घटकर 10 टन रह गई है।

सारा-वरुण स्‍टारर ‘कुली नं. 1’ का पहला टीजर पोस्‍टर जारी

मुंबई। सारा अली खान और वरुण धवन स्‍टारर ‘कुली नंबर 1’ इन दिनों काफी सुर्खियों में है। फिल्‍म अपने अनाउंसमेंट के बाद से ही चर्चा में है। इस फिल्‍म में पहली बार वरुण और सारा की जोड़ी साथ नजर आएगी जिसे लेकर फैंस काफी एक्‍साइटेड हैं।

रविवार को मेकर्स ने इसका पहला टीजर पोस्‍टर रिलीज किया है। इसमें एक कुली हाथ में काफी सामान लिए हुए नजर आ रहा है जबकि सारा को कहते हुए सुना जा सकता है, ‘ऐ कुली।’

बता दें, फिल्‍म का मेन पोस्‍टर सोमवार को आउट होगा। टीम इन दिनों बैंकॉक में शूटिंग कर रही है और वरुण की मां करुणा धवन ने फिल्‍म के लिए मुहूर्त क्‍लैप दी थी।

वरुण ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर टीजर पोस्‍टर शेयर करते हुए लिखा, ‘मुझे पता है कि आपको पता है। आपको पता है कि मुझे पता है लेकिन क्‍या आपको वो पता है जो मुझे पता है? #1May2020#CoolieNo.1’

डायरेक्‍टर डेविड धवन की यह फिल्‍म 1995 में आई ‘कुली नं 1’ का ही रीमेक है। बता दें, ऑरिजनल फिल्‍म में गोविंदा और करिश्‍मा कपूर मुख्‍य किरदारों में नजर आए थे।

माहवारी में यूज सैनिटरी पैड कचरे से पर्यावरण को खतरा

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कोच्चि। हर साल देश में करीब 12 अरब सैनिटरी नैपकिन कचरे के रूप में लैंडफिल में समा रहे हैं और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कचरा पर्यावरण को एक गंभीर चुनौती है । इससे निपटने के लिए अब वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है जिसके तहत सैनिटरी नैपकिन कचरे को आंशिक रूप से छांट कर उसका पर्यावरण अनुकूल तरीके से निपटान किया जाएगा।

महाराष्ट्र में स्थित ‘पैडकेयर लैब्स’ द्वारा विकसित इस तकनीक के तहत सैनिटरी नैपकिन कचरे को छांटकर उसका निपटान करने वाली मशीन का प्रोटोटाइप तैयार किया गया है लेकिन इसे अभी बाजार में पेश नहीं किया गया है।

केरल सरकार की नई पहल ‘केरल स्टार्टअप मिशन’ के तहत पिछले दिनों कोच्चि में ‘विमिन स्टार्टअप समिट 2019’ का आयोजन किया गया। ‘पैड केयर लैब्स’ (पीसीएल) द्वारा इसी सम्मेलन में इस तकनीक को पेश किया गया।

पीसीएल से जुड़े अजिंकिया धारिया ने बताया, ‘नैशनल केमिकल लैबोरेटरी’ के तहत पुणे में ‘पैड केयर लैब्स’ को स्टार्टअप के तौर पर शुरू किया गया है और इस स्टार्टअप ने दुनिया की पहली ऐसी मशीन विकसित की है जो सैनिटरी नैपकिन कचरे का पर्यावरण अनुकूल तरीके से कीटाणुशोधन करती है, उसे अलग करती है और उसका निपटान करती है।

उन्होंने बताया कि इस मशीन से कचरा प्रबंधन की समस्या से छुटकारा पाया जा सकेगा। धारिया के अनुसार, ‘देशभर के घरों में से एक साल में करीब 12 अरब सैनिटरी नैपकिन कचरे के रूप में लैंडफिल में जा रहे हैं। इन नैपकिन्स में जो प्लास्टिक इस्तेमाल की जाती है, वह प्राकृतिक तरीके से नष्ट नहीं होती, ऐसे में यह इसे इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की सेहत के लिए ही एक बड़ा खतरा नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है।’

उन्होंने बताया, ‘इससे पैदा हो रहे खतरे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये नैपकिन लैंडफिल में करीब 800 साल तक पड़े रहेंगे। ये ठोस कचरा श्रेणी में आते हैं और अगर इनका उचित निपटान नहीं किया जाए तो ये एचआईवी, एचबीवी तथा कई अन्य बीमारियों के वाहक बन सकते हैं।’

‘मैन्स्ट्रुअल हाईजीन अलायंस आफ इंडिया’ (एमएचएआई) के अनुमान भारत में 33 करोड़ 60 लाख महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें माहवारी होती है और इनमें से 36 फीसदी सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं। इस प्रकार कुल 12 करोड़ 10 लाख महिलाएं सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करती हैं।

‘पैड केयर लैब्स’ उन 20 स्टार्टअप्स में शामिल था जिन्होंने अपने स्टार्टअप के बारे में ‘विमिन स्टार्टअप समिट’ में प्रस्तुति दी। हालांकि इस तकनीक के बारे में धारिया ने ज्यादा बताने से इनकार करते हुए कहा कि यह केवल अभी प्रोटोटाइप चरण में है और अभी इसे बाजार में पेश नहीं किया गया है, इसलिए वह इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दे सकते।

ये हैं दमदार इलेक्ट्रिक SUV, जानिए कीमत एवं खूबियां

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मौजूदा हालातों को देखते हुए ऐसा कहा जा सकता है कि इलेक्ट्रॉनिक वीकल ही ट्रांसपोर्टेशन का भविष्य हैं। ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियां अब पहले से कहीं ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक वीकल ऑफर कर रही हैं।

दुनिया भर के देशों की सरकारें भी इलेक्ट्रिक वीकल्स को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आप भी इलेक्ट्रिक कार लेने का मन बना रहे हैं तो हम आपको मौजूदा समय में मिलने वाली इलेक्ट्रिक SUV कार के बारे में बता रहे हैं।

MG ZS

इस कार की कीमत 18.40 लाख रुपये है। यह कंपनी की पहली ऑल इलेक्ट्रॉनिक कार है। कार में 44.5kWh की बैटरी मौजूद है। कार की रेंज 230 KM है।

ह्युंदै कोना ईवी

इस कार की कीमत 23.71 लाख रुपये है। कार में 39.2kWh बैटरी मौजूद है। इस कार की रेंज 452km है।

आउडी ई-ट्रॉन

इस कार की कीमत 53 लाख रुपये है। कार में Q5 की तरह स्टाइलिंग दी गई है। कार दो इलेक्ट्रिक मीटर दिए गए हैं। कार को 40 मिनट में फुल चार्ज किया ज सकता है।

मर्सिडीज बेंज EQC

इस कार की कीमत 57 लाख रुपये है। कार की रेंज 420KM है। कार 6 सेकेंड में 0 से 100 किमी की स्पीड पकड़ सकती है।

जैगुआर आई-स्पेस

54 लाख रुपये की यह कार कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक कार है। 4.8 सेकेंड में यह कार 0 से 100 किमी की स्पीड पकड़ सकती है। कार की रेंज 470 किमी है।

सप्ताह भर में 2,250 रु. महंगा हुआ सोना, 38,420 रुपए पहुंची कीमत

नई दिल्ली।विदेश में सोने की कीमतों में लगातार जारी तेजी के बीच आभूषण निर्माताओं ने भी पीली धातु की खरीद बढ़ा दी है जिससे बीते सप्ताह दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 2,2250 रुपए की ऊंची छलांग लगाकर सप्ताहांत पर 38,420 रुपए प्रति दस ग्राम पर रहा।

विदेश में सोने की कीमत 3.18 फीसदी बढ़ी तो स्थानीय बाजार में यह 6.22 फीसदी बढ़ गई। रुपए की गिरावट का असर भी देखा गया। लंदन एवं न्यूयॉर्क से मिली जानकारी के अनुसार, गत सप्ताह वहां सोना 45.85 डॉलर चढ़कर 1,496.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह तीन साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।

सप्ताह दौरान एक दिन यह 1,500 डॉलर प्रति औंस को भी पार कर छह साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। अमेरिकी सोना वायदा 55.10 डॉलर की बढ़त में शुक्रवार को 1,501.90 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।

ट्रेड वॉर से सोने में आई तेजी
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध की स्थिति और गहराने से सोने में तेजी आई है। व्यापार युद्ध की चिंता में निवेशकों ने सुरक्षित मानी जाने वाली पीली धातु का रुख किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी हाजिर 0.64 डॉलर यानी 3.95 फीसदी की साप्ताहिक तेजी के साथ 16.93 डॉलर प्रति औंस पर रहा।

ऐंड्रॉयड यूजर्स की सिक्यॉरिटी खतरे में, लाखों फोन में मिला मैलवेयर

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नई दिल्ली।अगर आप ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन यूज करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। हाल ही में एक रिसर्च में टेक एक्सपर्ट्स ने पाया है कि लाखों ऐंड्रॉयड डिवाइस प्री-लोडेड मैलवेयर के साथ आ रहे हैं। ऐंड्रॉयड यूजर्स के लिए डिवाइस पर मैलवेयर अटैक की खबरें नई नहीं हैं।

इससे पहले भी कई बार गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद ऐप्स द्वारा फोन को मैलवेयर से इंफेक्ट करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐंड्रॉयड पर होने वाले मैलवेयर अटैक इसलिए चिंता का कारण हैं क्योंकि हर महीने ऐंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करने वाले डिवाइसेज को दुनियाभर में 2 अरब से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं।

पहले भी हो चुके हैं अटैक
कुछ दिन पहले भी ऐंड्रॉयड डिवाइस के लिए एक और बड़ा खतरा सामने आया था। इसमें गूगल प्ले स्टोर के 50 मैलवेयर ऐप्स से 3 करोड़ ऐंड्रॉयड डिवाइस के इंफेक्ट होने की बात कही गई थी। डिवाइसेज के मैलवेयर से इंफेक्ट होने की चर्चा अभी शांत नहीं हुई थी कि रिसर्चर्स ने बार फिर से ऐंड्रॉयड यूजर्स के लिए वॉर्निंग जारी कर दी है।

75 लाख ऐंड्रॉयड डिवाइस को खतरा
ताजा मामले में कहा गया है कि दुनिया में इस वक्त गूगल मोबाइल ओएस ऐंड्रॉयड पर काम करने वाले लाखों डिवाइस में एक मलीशस सॉफ्टवेयर पाया गया है। गूगल प्रॉजेक्ट जीरो के सिक्यॉरिटी रिसर्चर मैडी स्टोन ने बताया कि यह प्री-इंस्टॉल्ड मैलवेयर करीब 75 लाख ऐंड्रॉयड डिवाइस पर डिटेक्ट किया गया है। यह मैलवेयर ऐंड्रॉयड डिवाइस को हैक कर बैकग्राउंड में ऐप्स को डाउनलोड करने के साथ ही विज्ञापनों से जुड़े फर्जीवाड़े भी कर सकता है।

बजट स्मार्टफोन निशाने पर
स्टोन ने कहा कि यह मैलवेयर ज्यादातर बजट स्मार्टफोन्स पर पाया गया है जो थर्ड पार्टी ऐप्स और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। ऐप्स और सॉफ्टवेयर को डिवेलप करने वाले हैकर यूजर्स को सही सर्विस देने का झांसा देकर उनके डिवाइस में मैलवेयर पहुंचाने का काम करते हैं।

स्टोन ने यह सारी जानकारी हाल ही में लास वेगस में हुए ब्लैक हैट साइबर सिक्यॉरिटी कॉन्फ्रेंस में दी। स्टोन ने आगे कहा कि उन्होंने ऐसे कई मामलों की पड़ताल करने पर पाया कि ये प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स लाखों डिवाइस को प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही यह ऐंड्रॉयड यूजर पर नजर रखने के लिए गूगल प्ले प्रटेक्ट सर्विस को भी बंद कर देते हैं।

क्या हैं बचने के उपाय
इससे बचने के उपायों के बारे में पूछे जाने पर स्टोन ने कहा कि इन अटैक्स को रोकना काफी मुश्किल है। हालांकि, यूजर्स अलर्ट रहकर इन अटैक्स से काफी हद तक खुद को बचा सकते हैं। इसके लिए सबसे जरूर है कि यूजर अपने डिवाइस में एक अच्छा ऐंटीवायरस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करके रखें। इसके अलावा डिवाइस पर ऐंड्रॉयड के लेटेस्ट अपडेट्स को इंस्टॉल कर ऐसे मलीशस सॉफ्टवेयर से बचा जा सकता है।

बिजनस ठप करने से पाक को घाटा, कई चीजों के देने पड़ रहे ज्यादा दाम

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और राज्य के पुनर्गठन के विरोध में भले ही पाकिस्तान ने भारत के साथ कारोबार ठप कर दिया है, लेकिन यह फैसला उसे ही महंगा पड़ रहा है। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले से पहले ही आर्थिक तंगी से गुजर रहे देश को और संकट झेलना पड़ सकता है।

ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल प्रॉसेसिंग मिल्स असोसिएशन के पूर्व चेयरमैन सलीम पारेख ने कहा, ‘भारत का सामान चीन और कोरियाई प्रॉडक्ट्स के मुकाबले 30 से 35 पर्सेंट तक सस्ता होता है। इसके अलावा अन्य देशों के मुकाबले आने में वक्त भी कम लगता है। यही नहीं माल ढुलाई का खर्च भी अन्य देशों से कम रहता है।’

प्याज तक के लिए भारत पर निर्भर
हालांकि इसके बाद भी पाकिस्तान की इंडस्ट्री का कहना है कि भले ही नुकसान की स्थिति है, लेकिन देश के फैसले के साथ हैं। पाकिस्तान होजरी मैन्युफैक्चरर्स ऐंड एक्सपोर्ट्स असोसिएशन के चेयरमैन जावेद बिलवानी ने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर काफी हद तक भारत के केमिकल्स और डाई पर उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि भारत से कारोबार प्रतिबंधित किए जाने के बाद अब दुबई के रास्ते से भारत का सामान आ सकता है। इसकी वजह यह है कि भारतीय प्रॉडक्ट्स चीन और कोरिया के मुकाबले 15 से 20 फीसदी तक सस्ते हैं।

एफबी एरिया असोसिएशन ऑफ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री के चेयरमैन खुर्शीद अहमद ने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर अब चीन और पूर्वी एशियाई देशों से आयात करेगा, लेकिन यह महंगा पड़ता है। इसके अलावा पाकिस्तान चाय का भी भारत से बड़े पैमाने पर आयात करता है। अब पाकिस्तान को इसके विकल्प के लिए वियतनाम और अफ्रीकी देशों का रुख करना होगा।

पाकिस्तान के जोडिया बाजार को लेकर उन्होंने कहा कि अब भी भारत की बनी आर्टिफिशल जूलरी, कॉस्मेटिक्स, साबुन, फेस वॉश आदि दूसरे चैनल से आ सकते हैं। दिलचस्प यह है कि पुलवामा अटैक के बाद भी पाकिस्तानी कारोबारियों ने भारत के प्रॉडक्ट्स को बेचने से बॉयकॉट किया था। इसके बावजूद पाकिस्तान के बाजार में इंडियन प्रॉडक्ट्स धड़ल्ले से बिक रहे थे।

आर्थिक आंकड़ों, नीतिगत उपायों से तय होगी बाजारों की चाल

नयी दिल्ली। शेयर बाजारों की चाल इस सप्ताह वृहत आर्थिक आंकड़े के साथ-साथ सरकार के आर्थिक वृद्धि को गति देने तथा कर मुद्दों के समाधान के लिये उठाये जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगी। इस सप्ताह अवकाश के कारण कारोबारी दिवस कम होंगे। शेयर बाजार सोमवार को बकरीद और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बंद रहेंगे।

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘आने वाले समय में निवेशकों की आर्थिक वृद्धि को गति देने तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के कर मुद्दों के समाधान के लिये सरकार की तरफ से उठाये जाने पर कदमों पर नजर होगी।’’ मंगलवार को बाजार पर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े का असर देखने को मिल सकता है।

यह आंकड़ा शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद जारी किया गया था। मुख्य रूप से खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण देश की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर जून महीने में 2 प्रतिशत रही जो चार महीने का न्यूनतम स्तर है।

एक्सिस सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी अरूण ठुकराल ने कहा, ‘‘हालांकि निवेशकों की धारणा से शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बनी रहेगी लेकिन इस बात पर नजर होगी कि सरकार मांग में नरमी से निपटने के लिये क्या कदम उठाएगी।

मांग में कमी चक्रीय नरमी का संकेत देती है। सरकार के आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये किये गये उपायों का असर होता है, तो अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकती है…।’’ पिछले सपताह सेंसेक्स में 463.69 अंक यानी 1.24 प्रतिशत की तेजी आयी।

सरकार के एफपीआई पर कर बोझ कम करने तथा नरम पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये कदम उठाये जाने से बाजार में बृहस्पतिवार और शुक्रवार को तेजी आयी। पिछले दो सत्रों में 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 891.41 अंक मजबूत हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार बाजार धारणा पर रुपया, तेल के भाव तथा विदेशी निवेशकों की निवेश प्रवृत्ति का भी असर होगा।