Thursday, April 30, 2026
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ज्वैलर्स की लिवाली निकलने से सोना 200 रुपये उछला, चांदी 110 रुपये महंगी

नई दिल्ली/ कोटा। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, स्थानीय ज्वैलर्स की लिवाली बढ़ने से राष्ट्रीय राजधानी में आज मंगलवार को सोने के भाव में बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत में आज 200 रुपये की वृद्धि हुई और इसके भाव 34,470 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गए। सोने में तेजी के साथ ही चांदी की कीमतों में भी आज तेजी देखी गई है।

चांदी आज 110 रुपये की तेजी के साथ 39,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। कारोबारियों के अनुसार, औद्योगिक इकाइयों और सिक्का कारोबारियों द्वारा लिवाली बढ़ने के कारण चांदी के भाव में यह बढ़ोतरी हुई है। वैश्विक स्तर की बात करें तो न्यूयॉर्क में सोने के भाव बढ़कर 1,429.80 डॉलर प्रति औंस पहुंच गए।

वहीं चांदी का भाव भी बढ़कर 15.52 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। मध्य एशिया में तनाव के चलते इस समय वैश्विक स्तर पर सोने के भाव छह साल के सबसे उंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में आज 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 200 रुपये की तेजी के साथ 34,470 रुपये और 99.5 फीसदी शुद्धता वाला सोना भी 200 रुपये की तेजी के साथ 34,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

गिन्नी सोने की कीमत में भी 100 रुपये की वृद्धि हुई और इसके भव 26,900 रुपये प्रति आठ ग्राम आ गए। कारोबारियों के अनुसार, स्थानीय ज्वैलर्स की मांग में तेजी आने से सोने की कीमतों में यह तेजी देखी गई। उधर चांदी में आज 100 रुपये की तेजी देखी गई। इसके भाव आज 39,200 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए।

वहीं साप्ताहिक डिलीवरी वाली चांदी में 35 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई और इसका भाव आज 38,133 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। इसके अलावा चांदी के सिक्कों की लिवाली कीमत 1000 रुपये बढ़कर 81,000 रुपये प्रति सैकड़ा और बिकवाली कीमत 82,000 रुपये प्रति सैकड़ा हो गई।

कोटा सर्राफा
चांदी 38200 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 34100 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 39770 रुपये प्रति तोला।
सोना शुद्ध 34270 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 39970 रुपये प्रति तोला।

निवेशकों के समर्थन से सेंसेक्स 311 अंक उछला, निफ्टी 11,796 पर

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव में कमी आने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण मंगलवार को निवेशकों ने लिवाली की। इस कारण भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 311 अंकों की तेजी के साथ 39,434 अंकों पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों का संवेदी सूचकांक निफ्टी 96 अंकों की तेजी के साथ 11,796 अंकों पर जाकर बंद हुआ।

अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण मंगलवार को ऑयल एंड गैस सेक्टर में शेयरों में उछाल दर्ज किया गया। सेंसेक्स में ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयर 237 अंकों की तेजी के साथ 14,854 अंकों पर बंद हुए। इसके अलावा मेटल सेक्टर में 195 अंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में 233 अंक, बैंकिंग सेक्टर में 297 अंकों की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी में बैंकिंग सेक्टर में 245 अंक, फाइनेंस सर्विसेज सेक्टर में 110 अंक, एफएमसीजी सेक्टर में 88 अंक और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में 132 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।

ये हैं टॉप गेनर
सेंसेक्स में आईएफसीआई 17.06 फीसदी, टोरंट पावर 12.46 फीसदी, इमामी लिमिटेड 9.02 फीसदी, इंडिया सीमेंट 7.82 फीसदी, मण्णपुरम 7.54 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहे। निफ्टी में ओएनजीसी 0.64 फीसदी, टाइटन 0.35 फीसदी, एलएंडटी 0.30 फीसदी, आईओसी 0.23 फीसदी, हिन्दुस्तान यूनीलिवर 0.13 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहे।

ये हैं टॉप लूजर
सेंसेक्स में रिलायंस पावर 12.58 फीसदी, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर 8.14 फीसदी, रिलायंस कैपिटल 6.57 फीसदी, आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस 6.43 फीसदी, पीसी ज्वैलर्स 5.43 फीसदी की गिरावट के साथ टॉप लूजर रहे। निफ्टी में जी एंटरटेनमेंट 2.77 फीसदी, टाटा स्टील 2.05 फीसदी, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस 1.66 फीसदी, जेएसडब्ल्यू स्टील 1.57 फीसदी, यस बैंक 1.56 फीसदी की गिरावट के साथ टॉप लूजर रहे।

पायलट बनना अब आसान, 5 साल में 200 घंटे की उड़ान के नियम खत्म

नई दिल्ली। देश में कमर्शियल पायलटों की कमी को देखते हुये सरकार ने पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान कर दिए हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पायलट लाइसेंस के लिए उड़ान-अनुभव की शर्तों में ढील देते हुए अब उन पायलटों को भी लाइसेंस देने का फैसला किया है जिनका पिछले पांच साल में उड़ान भरने का कोई अनुभव न रहा हो। पहले आवेदन करने की तिथि से पिछले पांच साल में 200 घंटे की उड़ान का अनुभव अनिवार्य था।

मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर एयरक्राफ्ट रूल्स-1937 में संशोधन कर दिया है। अब प्रशिक्षण और उड़ान अनुभव हासिल करने के कितने भी समय बाद पायलट लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा सकेगा। साथ ही करियर के बीच में अंतराल आने से भी दोबारा लाइसेंस हासिल करने में पायलट को कोई दिक्कत नहीं होगी।

आपको बता दें कि देश में हवाई यात्रियों की संख्या पिछले चार साल में 20 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी है। इसे देखते हुए विमान सेवा कंपनियों ने बड़ी संख्या में विमानों के ऑर्डर दिए हुए हैं। इनके लिए प्रशिक्षत मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती है। सरकार ने इसी के मद्देनजर पायलट लाइसेंस हासिल करने के नियम आसान किए हैं।

टीसी अधिकारियों को 31 दिसंबर तक लेना होगा लाइसेंस
हवाई यातायात नियंत्रक (एटीसी) अधिकारियों के लिए पहली बार लाइसेंस की व्यवस्था करने के बाद सरकार ने सभी मौजूदा एटीसी अधिकारियों के लिए लाइसेंस हासिल करने के लिए 31 दिसंबर 2019 तक का समय तय किया है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एक अधिसूचना में बताया कि जो एटीसी अधिकारी 05 नवंबर 2018 से पहले हवाई यातायात नियंत्रक की जिम्मेदारी निभा रहे थे वे लाइसेंस हासिल करने तक या 31 दिसंबर 2019 तक काम करना जारी रख सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस जारी करने और इसके लिए परीक्षाएं आयोजित करने की जिम्मेवारी नागर विमानन महानिदेशालय को दी गई है।

आपका ड्राइविंग लाइसेंस 1 अक्टूबर से बदल जाएगा, सरकार ने संसद में दी जानकारी

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार सड़कों पर गाड़ी और ड्राइवर की पहचान को आसान बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसके लिए पूरे देश में एक समान ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) का नियम बनाया गया है। यह नया नियम 1 अक्टूबर 2019 से पूरे देश में लागू हो जाएगा। यानी 1 अक्टूबर 2019 के बाद पूरे देश में जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी एकसमान होंगे। यह जानकारी सड़क परिवहन एवं राज मार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को संसद में दी।

स्मार्ट होगा ड्राइविंग लाइसेंस
नितिन गडकरी की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार नया ड्राइविंग लाइसेंस बिना चिप वाला लेमिनेटिड कार्य या फिर स्मार्ट कार्ड के रूप में जारी किया जाएगा। इन स्मार्ट ड्राइविंग ड्राइविंग लाइसेंस माइक्रोचिप और क्यूआर कोड होंगे, जिसमें आपकी यातायात नियमों के उल्लंघन संबधी सभी जानकारियां होंगी। इसको लेकर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 1 मार्च 2019 को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।

पूरे देश में एक समान होगा फॉर्मेट
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार 1 अक्टूबर 2019 से पूरे देश में एक ही फॉर्मेट में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी जारी की जाएंगी। इसमें सामने की ओर चिप और पीछे की ओर क्यूआर कोड होगा। इस चिप और बार कोड में लाइसेंस होल्डर और वाहन की समस्त जानकारी होगी। क्यूआर कोड की मदद से केंद्रीय ऑनलाइन डेटाबेस से ड्राइवर या वाहन का पूरा रिकॉर्ड एक डिवाइस के जरिए पढ़ा जा सकेगा।

फॉन्ट और रंग भी होगा एकसमान
नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 अक्टूबर 2019 से जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी का रंग भी एक समान होगा। नोटिफिकेशन में ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी पर दर्ज की जाने वाली जानकारी के फॉन्ट भी तय कर दिए गए हैं।

Jeep Compass Trailhawk भारत में लॉन्च, कीमत 26.8 लाख

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नई दिल्ली।Jeep ने अपनी बहुप्रतीक्षित ऑफ-रोड एसयूवी Compass Trailhawk लॉन्च कर दी। इसकी एक्स शोरूम कीमत 26.8 लाख रुपये है। Jeep Compass Trailhawk का दाम स्टैंडर्ड कंपस के टॉप वेरियंट से 3.7 लाख रुपये ज्यादा है। कंपनी की डीलरशिप पर 50 हजार रुपये में 11 जून से कंपस ट्रेलहॉक की बुकिंग शुरू है।

जीप कंपस ट्रेलहॉक में 2.0-लीटर, 4-सिलिंडर, टर्बो डीजल इंजन दिया गया है, जो 170.63 bhp का पावर और 350Nm टॉर्क जनरेट करता है। यह इंजन बीएस6 एमिशन नॉर्म्स के अनुरूप है। कंपस ट्रेलहॉक का इंजन 9-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स से लैस है। खास बात यह है कि यह कंपस एसयूवी के लाइनअप में पहली गाड़ी है, जिसमें डीजल इंजन के साथ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स दिया गया है।

ट्रेलहॉक कंपनी की कंपस एसयूवी का ऑफ-रोड वेरियंट है। स्टैंडर्ड कंपस की तुलना में यह थोड़ी अगल दिखती है। ट्रेलहॉक में फेंडर्स पर ‘Trail Rated’ बैज, बोनट पर ब्लैक कलर का बड़ा स्टीकर, ब्लैक फ्रंट ग्रिल और अलग डिजाइन के फ्रंट और रियर बंपर दिए गए हैं। इसके अलावा स्टैंडर्ड कंपस की तुलना में ट्रेलहॉक का ग्राउंड क्लियरेंस 30 mm ऊंचा है। ट्रेल हॉक में पांच ड्राइविंग मोड्स- ऑटो, स्नो, सैंड, मड और रॉक हैं। दमदार ऑफ-रोड परफॉर्मेंस के लिए इसमें हिल होल्ड कंट्रोल और हिल डिसेंट कंट्रोल फीचर्स दिए गए हैं।

जीप कंपस ट्रेलहॉक में ऐपल कारप्ले, ऐंड्रॉयड ऑटो, और नेविगेशन के साथ 8.4-इंच का टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल, की-लेस गो, ऑटो स्टार्ट-स्टॉप फंक्शन, क्रूज कंट्रोल और 7-इंच मल्टी-इन्फर्मेशन डिस्प्ले जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड दिए गए हैं। इस ऑफ-रोड एसयूवी में सनरूफ भी है।

सेफ्टी के लिए कंपस ट्रेलहॉक में 6-एयरबैग्स, एबीएस, ईएससी, ट्रैक्शन कंट्रोल, हिल-स्टार्ट असिस्ट, रोल-ओवर मिटिगेशन, इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, रिवर्स पार्किंग सेंसर्स और रियर कैमरा जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड दिए गए हैं।

अब बनेंगे इ-पासपोर्ट, हर लोकसभा क्षेत्र में खुलेगा पासपोर्ट सेवा केंद्र

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने सोमवार को कहा कि पासपोर्ट सेवा में सुधार के कार्यक्रम जारी रहेंगे और जल्द ही देश में इलेक्ट्रॉनिक चिप युक्त ई-पासपोर्ट जारी होना शुरू हो जाएंगे।

डॉ. जयशंकर ने दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू भवन में पासपोर्ट सेवा दिवस और पासपोर्ट अधिकारियों के सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पूर्ववर्ती सुषमा स्वराज की ओर से शुरू किए गए पासपोर्ट सेवाओं में क्रांतिकारी सुधारों को जारी रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि डाक विभाग के सहयोग से देश में अब तक 413 डाकघर पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोले जा चुके हैं। इसके अलावा 93 पासपोर्ट कार्यालयों को मिला कर 505 पासपोर्ट सेवा केन्द्र देश में सालाना करीब एक करोड़ पासपोर्ट जारी कर रहे हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका एवं चीन के बाद भारत विश्व में तीसरा सर्वाधिक पासपोर्ट जारी करने वाला देश बन चुका है। देश में इस समय करीब साढ़े आठ करोड़ नागरिकों के पास पासपोर्ट हैं। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट सेवा में सुधार, विस्तार और आपके द्वार के मंत्र पर काम हो रहा है।

देश के हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोलने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि पासपोर्ट सुधार एवं सरलीकरण का कार्यक्रम सुरक्षा चिंताओं से समझौता किए बिना जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक चिप युक्त पासपोर्ट जारी किया जाने लगेगा। सूत्रों के अनुसार, ई-पासपोर्ट इसी वर्ष से जारी होने लगेंगे। लोगों के पासपोर्ट के नवीकरण के समय सबको ई-पासपोर्ट ही जारी किए जाएंगे।

बेहतर पासपोर्ट सेवाएं देने वाले पुरस्कृत
इस कार्यक्रम में डाक सचिव अनंत नारायण नंदा, विदेश मंत्रालय में सचिव (काउंसलर, पासपोर्ट, वीसा) संजीव अरोड़ा और संयुक्त सचिव एवं मुख्य पासपोर्ट अधिकारी अरुण चटर्जी उपस्थित थे। विदेश मंत्री ने पासपोर्ट सेवाओं के श्रेष्ठतम क्रियान्वयन के लिए पुरस्कार भी प्रदान किए।

सर्वश्रेष्ठ पासपोर्ट सेवा केन्द्र के रूप में पहला पुरस्कार जालंधर कार्यालय को, दूसरा पुरस्कार कोच्ची कार्यालय को और तीसरा पुरस्कार कोयम्बटूर कार्यालय को दिया गया। राज्य पुलिस अधिकारियों की श्रेणी में पहला पुरस्कार गुंटूर पुलिस अधीक्षक कार्यालय को और दूसरा पुरस्कार कोचीन पुलिस आयुक्त कार्यालय को दिया गया। डाकघर पासपोर्ट सेवा केन्द्र की श्रेणी में गुजरात के आणंद और आंध्रप्रदेश के कुर्नूल को पुरस्कृत किया गया।

लाल निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स 137 अंक गिर कर 38,985 पर

नई दिल्ली। वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय शेयर बाजारों की मंगलवार को एक बार फिर गिरावट के साथ लाल निशान में खुले। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 137 अंकों की गिरावट के साथ 38985 अंकों पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों का संवेदी सूचकांक निफ्टी 41 अंकों की गिरावट के साथ 11,658 अंकों पर खुला। सुबह 9.24 बजे सेंसेक्स 122 अंकों की गिरावट के साथ 39,000 अंकों पर और निफ्टी 32 अंकों की गिरावट के साथ 11,667 अंकों पर कारोबार कर रहे हैं।

इन शेयरों में तेजी का माहौल
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में वक्रांगी, आईएफसीआई, इमामी लिमिटेड, मनपसंद बेवरेजेस, पीसी ज्वैलर्स में तेजी का माहौल है। निफ्टी में ओएनजीसी, टाइटन, एलएंडटी, आईओसी, हिन्दुस्तान यूनिलीवर में तेजी का माहौल है।

इन शेयरों में मंदी का माहौल
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में रिलायंस पावर, आरकॉम, एसबीआई लाइफ, सद्भाव इंजीनियरिंग लिमिटेड, टाटा स्टील में मंदी का माहौल है। निफ्टी में जी एंटरटेनमेंट, टाटा स्टील, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, जेएसडब्ल्यू स्टील, यस बैंक के शेयरों में मंदी का माहौल है।

अब बिना बीमा पॉलिसी के वाहन चलाने पर दो हजार रुपये तक का जुर्माना

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नयी दिल्ली। अब बिना बीमा पॉलिसी के वाहन चलाने पर दो हजार रुपये तक का जुर्माना लगेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। इस विधेयक में यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। विधेयक में आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर दस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

इसी तरह अयोग्य घोषित किये जाने के बावजूद वाहन चलाते रहने पर भी दस हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। एक आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी दी। विधेयक इससे पहले राज्य सभा में लंबित था और 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह निरस्त हो गया था। सूत्रों ने बताया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई है।

इसमें विभिन्न यातायात नियमों के उल्लंघन पर ऊंचे जुर्माने का प्रावधान किया गया है।’’ विधेयक में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में काफी सख्त प्रावधान रखे गये हैं। किशोर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना लाइसेंस, खतरनाक ढंग से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, निर्धारित सीमा से तेज गाड़ी चलाना और निर्धारित मानकों से अधिक लोगों को बिठाकर अथवा अधिक माल लादकर गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर जुर्माना
संशोधन विधेयक में आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर दस हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार अयोग्य करार दिये जाने के बावजूद वाहन चलाते रहने पर भी दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ओला, उबर जैसे समूहकों द्वारा ड्राइविंग लाइसेंसों के नियमों का उल्लंघन करने पर विधेयक के प्रावधानों के अनुरूप एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

विधेयक में किये गये प्रावधान 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की सिफारिशों पर आधारित हैं। इन सिफारिशों को संसद की स्थायी समिति ने भी जांच परख की है। विधेयक के मसौदे में तेज गाड़ी भगाने पर एक हजार से दो हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। बिना बीमा पॉलिसी के वाहन चलाने पर दो हजार रुपये तक का जुर्माना रखा गया है। बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर एक हजार रुपये रुपये का जुर्माना और तीन माह के लिये लाइसेंस निलंबित किया जाना शामिल है।

किशोर द्वारा गाड़ी चलाते हुये सड़क पर कोई अपराध करने की स्थिति में गाड़ी के मालिक अथवा अभिभावक को दोषी माना जायेगा और वाहन का पंजीकरण भी निरस्त किया जायेगा। इस तरह के अपराध में वाहन मालिक अथवा अभिभावक को दोषी माना जायेगा और तीन साल के सजा के साथ ही 25 हजार रुपये तक का जुर्माना किया जायेगा। साथ ही वाहन का पंजीकरण भी निरस्त कर दिया जायेगा।

संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार यातायात नियमों का उल्लंघन होने पर न्यूनतम 100 रुपये के स्थान पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। अधिकारियों के आदेश का पालन नहीं करने पर 500 रुपये के स्थान पर अब दो हजार रुपये का जुर्माना देना होगा।

वाहन का अनाधिकृत इस्तेमाल करने पर पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर भी इतना ही जुर्माना देना होगा जबकि अयोग्य करार दिये जाने के बावजूद वाहन चलाने पर दस हजार रुपये का जुर्मान देय होगा। अन्य नियमों के उल्लंघन पर भी कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

बैंकों, NBFC के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए एप्प शुरू

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने और समय से उनका निवारण करने के लिए एक ऐप्लिकेशन पेश किया। केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) की शुरुआत की गई है।

यहां उसके द्वारा नियमन किए जाने वाले किसी भी वाणिज्य बैंक, शहरी सहकारी बैंक और एनबीएफसी के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इस प्रणाली पर दर्ज कराई जाने वाली शिकायत को उपयुक्त लोकपाल या रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय को भेज दिया जाएगा।

सीएमएस को डेस्कटॉप और मोबाइल दोनों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। रिजर्व बैंक की योजना इसे जल्द ही एक प्रतिबद्ध आईवीआर (इंटरएक्टिव वॉयस रेस्पांस) प्रणाली से जोड़ने की भी है ताकि शिकायत की स्थिति को देखा जा सके।

बैंक सम्बन्धी शिकायत के लिए यहां क्लिक करें

विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या 5 साल में 60% बढ़कर 8,582 पहुंची

नई दिल्ली।सरकारी बैंकों में विलफुल डिफॉल्टर्स की तादाद बीते पांच साल में मार्च 2019 तक 60 फीसदी से भी ज्यादा बढ़कर 8,582 हो गई है। केंद्र सरकार ने सोमवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि 2014-15 के अंत तक विलफुल डिफॉल्टर्स आंकड़ा 5,349 था। विलफुल डिफॉल्टर एक व्यक्ति या संस्था होती है, जो क्षमता के बावजूद कर्ज का भुगतान नहीं करता है। वित्त मंत्री एक सवाल का जवाब दे रही थीं, जिसमें पूछा गया था कि बीते पांच साल में विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या बढ़ी है या नहीं।

उन्होंने बताया कि 2014-15 के बाद बैंकों के विलफुल डिफॉल्टर्स की तादाद में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वित्त वर्ष 2015-16 में इसका आंकड़ा 6,575, वित्त वर्ष 2016-17 में 7,079 और वित्त वर्ष 2017-18 में बढ़कर 7,535 पर पहुंच गया।

सीतारमण ने कहा, ‘विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ व्यापक पैमाने पर कार्रवाई की जाती है। आरबीआई के दिशा-निर्देश के मुताबिक, बैंकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा विलफुल डिफॉल्टर्स को कोई अतिरिक्त सुविधाएं नहीं मिली हुई हैं और उनकी कंपनी को पांच साल के लिए कोई और उपक्रम लाने पर पाबंदी लगा दी जाती है।’ उन्होंने कहा कि बीते पांच साल में विलफुल डिफॉल्टर्स से 7,654 करोड़ रुपये की रकम वसूल की गई है।

सरकारी बैंकों द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च, 2019 तक उनके पास वसूली के लिए 8,121 मामले लंबित पड़े थे। सिक्यॉर्ड ऐसेट्स के मामलों में 6,251 केसेज में सारफेसी ऐक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। भारत में कुल 17 सरकारी बैंक हैं।

सीतारमण ने कहा, ‘इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर आरबीआई के आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश के मुताबिक, 2,915 मामलों में एफआईआर दर्ज किए गए हैं।’ वित्त मंत्री ने कहा कि दिवाला एवं दिवालिया संहिता, 2016 का इस्तेमाल करते हुए विलफुल डिफॉल्टर्स को दिवाला निस्तारण प्रक्रियाओं में हिस्सा लेने से रोका गया है।