राजस्थान में 20 जिलों के पेट्रोल पंप पर हेरा फेरी का खुलासा, ग्राहकों को लूट रहे पंप

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जयपुर। Petrol Pump fraud: अगर आप भी अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराते वक्त मीटर स्क्रीन पर ‘0’ देखकर निश्चिंत हो जाते हैं, तो संभल जाइए। राजस्थान के पेट्रोल पंपों पर मीटर तो सही चल रहा है, लेकिन आपकी टंकी में तेल कम पहुंच रहा है।

उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सुमित गोदारा के निर्देश पर राज्यभर में चलाए गए एक गुप्त ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने पेट्रोल पंप मालिकों के इस घिनौने खेल का पर्दाफाश कर दिया है।

विभाग की 23 विशेष जांच टीमों ने 5 मई से 18 मई के बीच राजस्थान के 20 जिलों में ताबड़तोड़ 226 पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया। इस जांच में जो सच सामने आया, उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।

राज्य के 110 पेट्रोल पंप नियमों की धज्जियां उड़ाते मिले, जिन पर तत्काल 2,21,500 रुपये का जुर्माना ठोका गया। सबसे चौंकाने वाला खुलासा कम तेल देने को लेकर हुआ।

प्रदेश के 60 पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा से कम ईंधन दिया जा रहा था। खेल यह था कि प्रति 5 लीटर तेल पर 30 मिलीलीटर से लेकर 120 मिलीलीटर तक तेल कम दिया जा रहा था।

इस मामूली सी दिखने वाली चोरी से जनता की जेब पर हर रोज 211 लीटर तेल का डाका डाला जा रहा था। महीने का हिसाब लगाएं तो यह आंकड़ा 6,357 लीटर ईंधन और 6,35,700 रुपये की शुद्ध चपत तक पहुंचता है।

जयपुर-नागौर-बाड़मेर में सबसे बड़ा खेल
गड़बड़ी मिलते ही विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए 60 पेट्रोल पंपों के कुल 103 नोजल तुरंत सीज कर दिए और 1,53,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना वसूला। कम तेल देने के मामले में राजस्थान के इन जिलों में सबसे ज्यादा नोजल सीज किए गए।

  1. जयपुर: 3 पेट्रोल पंपों पर 12 नोजल सीज।
  2. नागौर: 4 पेट्रोल पंपों पर 11 नोजल सीज।
  3. बाड़मेर: 6 पेट्रोल पंपों पर 10 नोजल सीज।
  4. सिरोही: 7 पेट्रोल पंपों पर 9 नोजल सीज।
  5. दौसा: 2 पेट्रोल पंपों पर 7 नोजल सीज।

इसके अलावा भरतपुर, अलवर, जोधपुर, पाली, सीकर, अजमेर, भीलवाड़ा, जैसलमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर, डूंगरपुर, झालावाड़, झुंझुनूं और सवाई माधोपुर में भी नोजल सीज करने की बड़ी कार्रवाई की गई।

72 पंपों पर नहीं था 5 लीटर का ‘सत्यापित पैमाना’
जांच में 72 पेट्रोल पंप ऐसे मिले जो विधिक मापविज्ञान नियमों का सीधा उल्लंघन कर रहे थे। इन पंपों पर ग्राहकों की जांच के लिए रखा जाने वाला ‘5 लीटर का सरकारी माप’ सत्यापित नहीं था और न ही उन्होंने सत्यापन प्रमाण पत्र डिस्प्ले कर रखा था। इस लापरवाही पर 68,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।