मौसम की मार से लाल मिर्ची और हुई सुर्ख, एक महीने में दुगनी से भी ज्यादा महंगी

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भीलवाड़ा। मौसम की मार से रसोई में शामिल लाल मिर्ची के भाव पिछले एक महीने में बढ़कर दोगुना हो गए हैं। मध्य प्रदेश और गुजरात में मिर्ची का उत्पादन घटने का असर अब राजस्थान में भी देखने को मिल रहा है।

भीलवाड़ा मिर्ची मंडी में एक महीने पहले सूखी लाल मिर्च का थोक में भाव 130 रुपये प्रति किलो था, जो अब इसका 300 रुपये से अधिक हो गया है। इसका खुदरा मूल्य तो 400 से 500 रुपपे प्रति किलो तक पहुंच गया है। इस कारण मिर्च व्यापारियों ने अपना व्यापार सीमित करते हुए मिर्ची की खरीद कम कर दी है।

मिर्च मंडी के थोक व्यापारी महेश जागेटिया का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल मिर्च के भावों दोगुने हो गए हैं। राजस्थान में जिस मिर्च को बहुत पसंद किया जाता था, मगर इस बार मध्य प्रदेश में मिर्ची की 20 प्रतिशत ही पैदावार हुई है। धामोर, बेहरिया, इंदौर, मनावा सहित कई क्षेत्रों में बारिश ज्यादा होने से फसल खराब हो गई है। इससे मिर्ची के भावों में तेजी देखने को मिल रही है।

उन्होंने कहा कि 100-150 प्रति किलो बिकने वाली मिर्ची अभी 400 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है। इसके बावजूद भी ग्राहकों को जो क्वालिटी चाहिए, वह नहीं मिल पा रही है। अक्सर इस समय मिर्ची के भावों में गिरावट आ जाती है। लेकिन इस बार मिर्ची के भाव बढ़ गए हैं। भीलवाड़ा मिर्ची मंडी में अब तक के इतिहास में सबसे महंगी मिर्च बिक रही है।

गुजरात की मिर्ची की ज्यादा मांग: व्यापारियों की मानें तो भीलवाड़ा मिर्ची मंडी में मध्यप्रदेश और गुजरात से आने वाली देसी और मध्यम क्वालिटी की ठंडी लाल मिर्च की मांग ज्यादा रहती है। तीखी लाल मिर्च की भीलवाड़ा की मंडी में मांग कम रहती है। गुजरात से नई फसल आने के बाद ही लाल मिर्ची के दाम गिरने की संभावना है।

नहीं मिल रहा भाव: मध्यप्रदेश के रतलाम के किसान कानाराम गुर्जर ने कहा कि मिर्ची की फसल खराब होने के कारण भाव नहीं मिल रहा है। बेमौसम की बरसात और वायरस रोग के कारण हमारी फसल खराब हो गई। मिर्ची की भरपूर फसल नहीं ले पाए। अभी हमें क्वालिटी के हिसाब से 150 से 300 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है।