कोटा। राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा के संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब पुस्तकालयों के लिए भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वर्तमान में ज्ञान सेवाओं को परिवर्तित करने वाली वास्तविक शक्ति बन चुकी है।
वे नई दिल्ली में आयोजित प्रेक्टीकल इंप्लीकेशन ऑफ आर्टीफ़ीसियल इंटेलीजेन्स इन मॉडर्न पब्लिक लाईब्रेरीज : ट्रांसफोर्मिंग सर्विसेज , एम्पावरींग कम्युनिटीज़विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कर रहे थे।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सार्वजनिक पुस्तकालयों को केवल सूचना भंडार से आगे बढ़ाकर बुद्धिमान, समावेशी एवं समुदाय-केंद्रित ज्ञान तंत्र में परिवर्तित कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुस्तकालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रश्न केवल तकनीक का नहीं, बल्कि सामाजिक, नैतिक, शैक्षिक एवं मानवीय मूल्यों का भी है।
अपने व्याख्यान में उन्होंने पुस्तकालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के व्यावहारिक उपयोगों जैसे बुद्धिमान खोज प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कैटलॉगिंग, उपयोगकर्ता सहायता हेतु चैटबॉट, संग्रह प्रबंधन में प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, अभिलेखों का डिजिटलीकरण तथा दृष्टिबाधित पाठकों के लिए सुलभता तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) बहुभाषीय सेवाओं, व्यक्तिगत सूचना खोज तथा वंचित समुदायों के डिजिटल समावेशन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि आने वाले समय में पुस्तकालयों की भूमिका केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) साक्षरता के प्रमुख केंद्र बनेंगे, जहाँ नागरिकों को नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपयोग, फेक न्यूज, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात तथा डिजिटल सत्यापन के बारे में जागरूक किया जाएगा।
उनके अनुसार भविष्य के पुस्तकालय AI से प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगे, बल्कि समाज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को समझने और जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की दिशा देंगे।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पुस्तकालयाध्यक्षों का स्थान नहीं लेगा, लेकिन जो पेशेवर तकनीकी परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को विकसित नहीं करेंगे, वे प्रासंगिकता खो सकते हैं। उन्होंने पुस्तकालय पेशेवरों के लिए निरंतर प्रशिक्षण, अंतर्विषयी अध्ययन तथा तकनीकी दक्षता को आवश्यक बताया।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों (यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका , श्रीलंका) के विद्वानों, शोधकर्ताओं, पुस्तकालय विज्ञान विशेषज्ञों एवं तकनीकी पेशेवरों ने भाग लिया।

