सेबी का पर्ल ग्रुप पर 2423 करोड़ का जुर्माना

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने गुरुवार को जुर्माने का ताजा आदेश जारी किया। नियामक ने यह भारी-भरकम पेनाल्टी सेबी के धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार रोकथाम नियम के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर लगाई है।

नई दिल्ली। बाजार नियामक सेबी ने गैरकानूनी तरीके से फंड जुटाने की वजह से पीएसीएल लिमिटेड (पर्ल) व इसके चार डायरेक्टरों पर 2,423 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। यह राशि डेढ़ महीने के भीतर जमा करानी होगी। कंपनी के इन निदेशकों में तारोलचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रत भट्टाचार्य शामिल हैं।

पर्ल ने अवैध स्कीमों के जरिये जनता से 49,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जुटाई थी। सेबी ने तीन साल पहले ही यह रकम सूद समेत निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति इस राशि की वापसी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने गुरुवार को जुर्माने का ताजा आदेश जारी किया। नियामक ने यह भारी-भरकम पेनाल्टी सेबी के धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार रोकथाम नियम के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर लगाई है।

अपने 47 पेज के आदेश में सेबी ने कहा है कि पीएसीएल लिमिटेड और इसके चारों डायरेक्टर जुर्माने की राशि 45 दिनों के भीतर जमा करा दें। सेबी के मुताबिक पीएसीएल से अभी तक कुछ सौ करोड़ की राशि एकत्र करने में ही सफलता मिल पाई है।

ऐसे में पर्ल और उसके डायरेक्टरों द्वारा अवैध तरीके से कमाए गए मुनाफे पर ज्यादा बड़ा जुर्माना लगाने की जरूरत है। हालांकि, निवेशकों के हित को सर्वोपरि रखते हुए नियामक ने अवैध रूप से अर्जित लाभ के बराबर ही पेनाल्टी लगाने का फैसला किया है।

सेबी ने कहा कि ताजा मामले में उल्लंघन कितना भयावह है इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि 15 साल की अवधि में पर्ल ने 49 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए। जबकि इस राशि पर एक साल में ही 2,423 करोड़ रुपये का मोटा मुनाफा कमाया।

नियामक ने 307 फर्मों से पाबंदी हटाई
सेबी ने कर चोरी के लिए शेयर बाजार का दुरुपयोग करने के चलते जांच के दायरे में आई 307 कंपनियों पर लगी पाबंदी हटा ली है। हालांकि नियामक ने कहा है कि बाकी 96 कंपनियों के खिलाफ अपनी कार्यवाही जारी रखेगा, क्योंकि उन्होंने कई बार नियम-कानूनों का उल्लंघन किया है।

सेबी ने दो अलग-अलग आदेशों में कहा है कि 307 कंपनियों की जांच में उसके नियमों के उल्लंघन का कोई सुबूत नहीं मिला है। नियामक ने सबसे पहले 19 दिसंबर, 2014 को अंतरिम आदेश के जारी 152 कंपनियों के कारोबार पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद 11 अगस्त, 2015 को उसने कुछ कंपनियों के खिलाफ पाबंदी का अंतिरिम आदेश जारी किया था।