एफडीआई हासिल करने में भारत 9वें स्थान पर

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नई दिल्ली। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए भारत, चीन और अमेरिका वैश्विक निवेशकों के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक हैं। पिछले साल (2016) जब वैश्विक स्तर पर कुल एफडीआई में गिरावट दर्ज की गई, तब भारत में एफडीआई में वृद्घि दर्ज की गई और यह सर्वाधिक एफडीआई हासिल करने वालों की संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास एजेंसी अंकटाड द्वारा तैयार की गई सूची में एक पायदान ऊपर चढ़कर नौवें पर पहुंच गया।

क्यों है महत्वपूर्ण
इससे आर्थिक विकास होता है। यह एक तरह से मुफ्त संसाधन है, जिसमें ऋण चुकाने का दबाव नहीं रहता है। विदेशी कंपनियां यहां के कम वेतन, कर छूट जैसी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए खुद ही निवेश करती हैं। अन्य लाभ यह है कि इससे रोजगार बढ़ता है और देश में नई तकनीक भी आती है। 12वीं पंच वर्षीय योजना के मुताबिक देश को इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 1,000 अरब डॉलर की जरूरत है, जिसे हासिल करने के लिए एफडीआई एक बड़ा स्रोत है।

एफडीआई के लिए क्या है प्रयास
नरेंद्र मोदी सरकार देश में अधिकाधिक एफडीआई आकर्षित करने के लिए कारोबारी सहूलियत बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है और विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई सीमा बढ़ाई गई है। हालांकि गत एक साल में विश्व बैंक के ‘कारोबार की सहूलियत सूचकांक’ में भारत का रैंक सिर्फ एक पायदान सुधर कर 130वें पर पहुंचा है। यह काफी असंतोषजनक है और इस मोर्चे पर काफी सुधार की जरूरत है।

2016-17 में सर्वाधिक एफडीआई वाले तीन बड़े क्षेत्र
सेवा क्षेत्र – 8.69 अरब डॉलर 
दूरसंचार – 5.56 अरब डॉलर
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर – 3.65 अरब डॉलर