Wheat: सरकारी खरीद एवं निर्यात कोटा में वृद्धि से गेहूं के भाव में तेजी का अनुमान

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नई दिल्ली। Wheat Price: केन्द्र सरकार ने गेहूं की खरीद का लक्ष्य 303 लाख टन से 42 लाख टन बढ़ाकर 345 लाख टन नियत किया है और गेहूं के निर्यात कोटे को भी 25 लाख टन से दोगुना बढ़ाकर 50 लाख टन निर्धारित कर दिया है। उद्योग- व्यापार समीक्षकों का कहना है कि इन दोनों निर्णयों का मुख्य उद्देश्य गेहूं की कीमतों पर दबाव को घटाना और बाजार पर सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालना है।

सरकार ने 2025-26 के रबी सीजन हेतु गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जो 2024-25 सीजन के समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल से 160 रुपए ज्यादा है। लेकिन गेहूं का थोक मंडी भाव इससे नीचे चल रहा है।

दरअसल फ्लोर मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारी-स्टॉकिस्ट किसानों से ऊंचे दाम पर गेहूं खरीदने के इच्छुक तो हैं मगर सरकार की क्षण-क्षण बदलती नीतियों से उन्हें डर लगता है। सरकार अक्सर गेहूं पर भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) लगा देती है जिससे स्टॉकिस्टों को नीचे दाम पर अपना माल बेचने के लिए विवश होना पड़ता है। इस बार भी दहशत का माहौल है क्योंकि मिलर्स एवं स्टॉकिस्टों को पहले ही भारी आर्थिक नुकसान हो चुका है।

भारतीय गेहूं का निर्यात ऑफर मूल्य अंतर्राष्ट्रीय बाजार में फिलहाल प्रतिस्पर्धी स्तर पर नहीं है इसलिए निर्यातकों को आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। हो सकता है कि आगामी समय में बांग्ला देश, वियतनाम, नेपाल एवं म्यांमार सहित अन्य निकटवर्ती देश भारत से गेहूं की खरीद का प्रयास करे।

इसके अलावा दक्षिण कोरिया, ताईवान, इंडोनेशिया एवं मलेशिया तथा थाईलैंड जैसे देश पशु आहार निर्माण में उपयोग के लिए भारत से हल्की क्वालिटी के गेहूं की खरीद कर सकते हैं बशर्तें इसका भाव अन्य आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में आकर्षक हो।

जहां तक सरकारी खरीद का सवाल है तो यह नियत लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल है। गेहूं की सरकारी खरीद में हल्की क्वालिटी के माल की भागीदारी 30-35 प्रतिशत तक देखी जा रही है।

मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में खरीद की गति बहुत धीमी है। राजस्थान में तो गेहूं की खरीद पर भारी-भरकम बोनस भी देने की घोषणा हो चुकी है।